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Rewari News: पुष्प वाटिका में श्रीराम को हुए सीता के दर्शन
Sun, 06 Oct 2024 04:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 06 Oct 2024 04:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेलवे कॉलोनी में श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से चल रही रामलीला के तीसरे दिन पुष्प वाटिका प्रसंग का मंचन किया गया। गुरु की आज्ञा पर फूल लेने गए श्रीराम को सीता के दर्शन होते हैं।
रामलीला का शुभारंभ डॉ. पवन गोयल और डाॅ. गुंजन गोयल ने किया। मंचन में गुरु विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण को पूजा के लिए फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में भेजते हैं। उधर, मां पार्वती की पूजा के लिए फूल लाने सीता जी अपनी सखियों के साथ वाटिका में पहुंचती हैं। वाटिका में प्रभु श्रीराम के दर्शन पाकर उनको नारद का वह वचन याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रथम बार तुमको अपने पति के दर्शन पुष्प वाटिका में होंगे, क्या वह आज वो सच होगा।
उधर, सीता स्वयंवर की घोषणा होती है कि जो भी शिव धनुष तोड़ेगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर कार्यक्रम में जब कई राजा धनुष को हिला तक नहीं पाता है तो जनक दुखी होते हैं। इसके बाग गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम शिव धनुष को तोड़ देते हैं। इसी बीच क्रोधित हो परशुराम पहुंचते हैं। लक्ष्मण और परशुराम संवाद होता है। प्रभु श्रीराम की विनती पर परशुराम शांत होते हैं। परशुराम को ज्ञात हो जाता है कि राम का अवतार हो गया है।
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रेवाड़ी। रेलवे कॉलोनी में श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से चल रही रामलीला के तीसरे दिन पुष्प वाटिका प्रसंग का मंचन किया गया। गुरु की आज्ञा पर फूल लेने गए श्रीराम को सीता के दर्शन होते हैं।
रामलीला का शुभारंभ डॉ. पवन गोयल और डाॅ. गुंजन गोयल ने किया। मंचन में गुरु विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण को पूजा के लिए फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में भेजते हैं। उधर, मां पार्वती की पूजा के लिए फूल लाने सीता जी अपनी सखियों के साथ वाटिका में पहुंचती हैं। वाटिका में प्रभु श्रीराम के दर्शन पाकर उनको नारद का वह वचन याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रथम बार तुमको अपने पति के दर्शन पुष्प वाटिका में होंगे, क्या वह आज वो सच होगा।
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उधर, सीता स्वयंवर की घोषणा होती है कि जो भी शिव धनुष तोड़ेगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर कार्यक्रम में जब कई राजा धनुष को हिला तक नहीं पाता है तो जनक दुखी होते हैं। इसके बाग गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम शिव धनुष को तोड़ देते हैं। इसी बीच क्रोधित हो परशुराम पहुंचते हैं। लक्ष्मण और परशुराम संवाद होता है। प्रभु श्रीराम की विनती पर परशुराम शांत होते हैं। परशुराम को ज्ञात हो जाता है कि राम का अवतार हो गया है।
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