{"_id":"64ac6dd1046bd0064808384a","slug":"shiva-mesmerized-by-water-consecration-in-pagodas-rewari-news-c-198-1-rew1003-2098-2023-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: शिवालयों में जलाभिषेक से सम्मोहित हुए शिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: शिवालयों में जलाभिषेक से सम्मोहित हुए शिव
Tue, 11 Jul 2023 02:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 11 Jul 2023 02:15 AM IST
विज्ञापन
रेवाड़ी। सावन माह के पहले सोमवार पर शिवालयों और अन्य मंदिरों में भोले के भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर शिव को सम्मोहित कर लिया। लोगों ने महादेव को दुग्ध, बेलपत्र, धतूरा, मांग, काली तिल और मिठाई चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं लोगों ने शिव चालीसा आदि का पाठ भी किया। इस दौरान संपूर्ण वातावरण शिवमय बना रहा। वहीं, हर-हर महादेव के जयघोष से शिवालय गुंजायमान रहे।
शहर के मोती चौक पर घंटेश्वर महादेव मंदिर, सेक्टर एक भूतेश्वर महादेव मंदिर, नई अनाजमंडी स्थित शिव मंदिर, बारह पत्थर स्थित भूतेश्वर मंदिर, सर्कुलर रोड स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सोमवार की सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर पूजा-अर्चना कर की। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, मिठाई आदि चढ़ाकर दुग्धाभिषेक किया।
पुजारियों और ज्योतिषियों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। इस माह का हर दिन भगवान शिव की पूजा के लिए पवित्र होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यदि भगवान शिव को प्रसन्न करना है तो सावन माह में पूरे विधि विधान के साथ उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए। यदि कोई श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ भोलेनाथ की आराधना करता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। पौराणिक मान्यता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद माता सती का दूसरा जन्म माता पार्वती के रूप में हुआ था। माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। सावन माह में शिवजी ने माता पार्वती से विवाह किया था। इसलिए उन्हें यह माह प्रिय है।
विज्ञापन
इस बार 59 दिनों का सावन माह
इस बार सावन 59 दिनों तक चलेगा। यानी शिवजी की पूजा-पाठ और भक्ति के लिए सावन का महीना 2 माह का होगा। मंगलवार 4 जुलाई से शुरू हुआ सावन का पवित्र महीना 31 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिमास रहेगा। इसी कारण से इस वर्ष सावन का महीना 2 महीने का होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। ऐसे में सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में रहता है। अधिमास के चलते इस बार चातुर्मास 4 के बजाये 5 महीनों का होगा।
विज्ञापन
शहर के मोती चौक पर घंटेश्वर महादेव मंदिर, सेक्टर एक भूतेश्वर महादेव मंदिर, नई अनाजमंडी स्थित शिव मंदिर, बारह पत्थर स्थित भूतेश्वर मंदिर, सर्कुलर रोड स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सोमवार की सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर पूजा-अर्चना कर की। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, मिठाई आदि चढ़ाकर दुग्धाभिषेक किया।
विज्ञापन
पुजारियों और ज्योतिषियों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। इस माह का हर दिन भगवान शिव की पूजा के लिए पवित्र होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यदि भगवान शिव को प्रसन्न करना है तो सावन माह में पूरे विधि विधान के साथ उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए। यदि कोई श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ भोलेनाथ की आराधना करता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। पौराणिक मान्यता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद माता सती का दूसरा जन्म माता पार्वती के रूप में हुआ था। माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। सावन माह में शिवजी ने माता पार्वती से विवाह किया था। इसलिए उन्हें यह माह प्रिय है।
विज्ञापन
इस बार 59 दिनों का सावन माह
इस बार सावन 59 दिनों तक चलेगा। यानी शिवजी की पूजा-पाठ और भक्ति के लिए सावन का महीना 2 माह का होगा। मंगलवार 4 जुलाई से शुरू हुआ सावन का पवित्र महीना 31 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिमास रहेगा। इसी कारण से इस वर्ष सावन का महीना 2 महीने का होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। ऐसे में सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में रहता है। अधिमास के चलते इस बार चातुर्मास 4 के बजाये 5 महीनों का होगा।