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Rewari News: निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ पीपीपी मॉडल पर शुरू होगी सेवा, 2 अप्रैल तक मांगे आवेदन
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रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबा इंतजार कर रहे मरीजों को जल्द राहत मिलने वाली है। स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ती भीड़ और रेडियोलॉजिस्ट की कमी को देखते हुए अब निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ पीपीपी (सरकारी-निजी भागीदारी) मॉडल पर सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर ली है।
इस पहल से खासकर गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी। वर्तमान में नागरिक अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के बावजूद केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के कारण रोजाना सीमित संख्या में ही जांच हो पाती है। ऐसे में मरीजों को तीन से चार महीने तक की लंबी तारीखें मिल रही हैं।
कई मरीज मजबूरी में निजी केंद्रों पर 800 से 1500 रुपये तक खर्च कर जांच कराने को विवश हैं। सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र सिंह दहिया के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जिले में पीपीपी मोड पर निजी केंद्रों के साथ अनुबंध प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत इच्छुक पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों से 2 अप्रैल तक आवेदन मांगे गए हैं।
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इसके बाद चयनित केंद्रों के साथ औपचारिक अनुबंध किया जाएगा। इस योजना के तहत न केवल रेवाड़ी शहर, बल्कि कोसली, बावल, नाहड़, जाटूसाना, खोल और मीरपुर जैसे खंड स्तर के क्षेत्रों में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों को भी जोड़ा जाएगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को 30 से 40 किलोमीटर दूर नागरिक अस्पताल आने की परेशानी से भी राहत मिलेगी। इस व्यवस्था से अस्पताल में लंबित मामलों की संख्या तेजी से घटेगी और मरीजों को समय पर जांच सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
इससे खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए यह पहल काफी लाभदायक साबित होगी, क्योंकि उन्हें अब सरकारी खर्च पर नजदीकी केंद्रों पर ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी जिससे आमजन को काफी राहत मिलेगी।
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इस पहल से खासकर गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी। वर्तमान में नागरिक अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के बावजूद केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के कारण रोजाना सीमित संख्या में ही जांच हो पाती है। ऐसे में मरीजों को तीन से चार महीने तक की लंबी तारीखें मिल रही हैं।
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कई मरीज मजबूरी में निजी केंद्रों पर 800 से 1500 रुपये तक खर्च कर जांच कराने को विवश हैं। सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र सिंह दहिया के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जिले में पीपीपी मोड पर निजी केंद्रों के साथ अनुबंध प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत इच्छुक पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों से 2 अप्रैल तक आवेदन मांगे गए हैं।
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इसके बाद चयनित केंद्रों के साथ औपचारिक अनुबंध किया जाएगा। इस योजना के तहत न केवल रेवाड़ी शहर, बल्कि कोसली, बावल, नाहड़, जाटूसाना, खोल और मीरपुर जैसे खंड स्तर के क्षेत्रों में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों को भी जोड़ा जाएगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को 30 से 40 किलोमीटर दूर नागरिक अस्पताल आने की परेशानी से भी राहत मिलेगी। इस व्यवस्था से अस्पताल में लंबित मामलों की संख्या तेजी से घटेगी और मरीजों को समय पर जांच सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
इससे खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए यह पहल काफी लाभदायक साबित होगी, क्योंकि उन्हें अब सरकारी खर्च पर नजदीकी केंद्रों पर ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को बेहतर और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी जिससे आमजन को काफी राहत मिलेगी।