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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेज मासूमों ने मांगी बेहतर शिक्षा

Thu, 27 Jan 2022 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jan 2022 11:45 PM IST
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Sending a postcard to the Chief Justice of the High Court, the innocent sought better education
लघु सचिवालय में धरने पर बैठे बच्चे एवं अभिभावक। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। सरकार की ओर से नियम 134ए के तहत अतिगरीब परिवारों के बच्चों को निजी शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा उपलब्ध कराए जाने के लिए लागू प्रावधान के तहत बेहतर शिक्षा का हक मांग रहे मासूमों ने वीरवार को लघु सचिवालय में करीब ढाई घंटे तक अपनी विशेष कक्षा लगाई। इसमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा को संबोधित करते हुए पोस्टकार्ड भेजते हुए उनसे बेहतर शिक्षा दिलाने की गुहार लगाई गई है।
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जिला रेवाड़ी में नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में अब तक लगभग 546 दाखिले हुए हैं, जिनमें से 108 दाखिले अलग-अलग कारणों से रद्द हो चुके हैं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में कुल 2150 सीटें हैं, जिनमें से केवल 546 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं। मामले पर करीब एक दर्जन से अधिक बार इन बच्चों के अभिभावक उपायुक्त से लेकर उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला तक को अपना ज्ञापन सौंपकर दाखिले जल्द कराने की गुहार लगा चुके हैं। एसडीएम और डीडीपीओ को भी ज्ञापन सौंपे गए हैं। इसी माह में जिले की पूर्व एडीसी आशिमा सांगवान ने भी अभिभावकों और निजी स्कूलों के प्रबंधकों के साथ अलग-अलग बैठकें करके इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया मगर यह कोशिश भी असफल रही।
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उपायुक्त यशेंद्र सिंह की ओर से लगातार शिक्षा विभाग और निजी स्कूल प्रबंधन के साथ इस विषय पर लगातार संपर्क करने के बावजूद अभी तक इन मासूमों को सरकार की सबको शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पाया है। अब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा को मासूमों ने बेहतर शिक्षा के लिए जवाबी पोस्टकार्ड भेजकर इस मामले को नए मोड़ पर ला दिया है। मासूमों की यह गुहार न्याय पालिका के माध्यम से सरकार के कानों पर कितना असर डाल पाती है, यह आने वाला वक्त बताएगा।
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अभिभावक बोले :
नियम 134 ए के तहत गरीब बच्चों के दाखिले की गुहार सरकार से लगातार लगाई जा रही है। इसी कड़ी में मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा को पोस्टकार्ड भेजकर बच्चों के लिए हक मांगा गया है। निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं, जिनकी वजह से आज ये बच्चे और अभिभावक जमीन पर बैठे हैं।
शिक्षा सबका हक : कैलाश
मामले में एडवोकेट कैलाश ने कहा कि कुछ साल पहले ही 134ए कानून लागू किया गया, जिसमें गरीब परिवारों को निजी स्कूलों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। शिक्षा सबका हक है और सरकार इन बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराए की व्यवस्था को मजबूत करे।

कोट
नियम 134ए के तहत जिले में रिक्त सीटों को भरने के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जल्द सूची जारी की जाने वाली है। अभिभावकों और बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग कृत संकल्प है। सरकार, कोर्ट और निदेशालय की ओर से हमें जो आदेश और निर्देश मिलेगा, उसको हम लागू कराएंगे।
-कपिल पूनिया, डीईईओ रेवाड़ी।
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