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Rewari News: पहली से आठवीं तक स्कूलों को वर्ष 2023 में मिली ग्रांट की देनी होगी जानकारी
Tue, 14 May 2024 03:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 14 May 2024 03:26 AM IST
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रेवाड़ी। राजकीय विद्यालयों में जारी ग्रांट का सदुपयोग हो हा रहा है या नहीं इसका पता लगाने के लिए डाटा जुटाना शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न समारोह के लिए पहली से आठवीं तक के राजकीय स्कूलों को 2023 में ग्रांट दी गई थी। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से डाटा मांगा गया है कि विभाग की ओर से जारी ग्रांट को किस मद में खर्च किया गया।
इसका मुख्य मकसद दी गई राशि का सही प्रयोग होने का पता लगाना है। भेजे गए बजट की राशि अगर लैप्स हुई है तो उसका अलग से कॉलम में कारण भी संबंधित स्कूल के मुखिया को बताना होगा। बीईओ (खंड शिक्ष्रा अधिकारी) के माध्यम से यह जानकारी जुटाई जाएगी। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार स्कूलों को शैक्षणिक सत्र के दौरान कई तरह की ग्रांट जारी की जाती है। एक सत्र पूरा होने के बाद नया सत्र शुरू होने पर स्कूलों से भेजे गए बजट को लेकर जानकारी जुटाई जाती है। इससे मुख्यालय में यह पता लग सके कि स्कूलों में दी गई ग्रांट जिस कार्य के लिए भेजी गई, उसका उसमें प्रयोग किया गया या नहीं। इस तरह की सही जानकारी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किए जाने के बाद ही मिलती है।
ये प्रोफार्मा स्कूलों को करना है तैयार
शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षणिक सत्र 2023-2024 में विद्यालय, ब्लॉक, जिला, स्तरीय कल्चरल फेस्ट, अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव, थिएटर वर्कशॉप, मुख्यमंत्री सुंदरीकरण ब्लॉक, जिला स्तरीय ग्रांट पहली से पांचवी, छठी से आठवीं की फीस प्रतिपूर्ति, टॉयलेट ग्रांट, बिजली, पानी ग्रांट के उपयोगिता प्रमाण पत्र अलग-अलग प्रफोर्मा में स्कूलों को तैयार करने हैं। इन्हें डीईईओ ऑफिस संबंधित बीईओ के माध्यम से जमा कराना होगा। इसे लेकर डायरेक्टर मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से भी पत्र जारी किया गया है।
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करीब ढाई करोड़ का मिला था बजट
विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना कि अधिकतर स्कूलों के मुखियाओं को यह जानकारी नहीं होती है कि बजट का यूज सर्टिफिकेट भी जमा कराना होता है। इसलिए ये शिक्षक भेजी गई राशि को कई बार दूसरे मद में प्रयोग कर लेते हैं। बाद में रिकॉर्ड मिलान नहीं हो पाता। जिले में स्कूलों मेंशैक्षणिक सत्र 2023-2024 के दौरान विभिन्न उत्सवों, मरम्मत, शौचालय, बिजली, पानी के लिए ढाई करोड़ रुपए के करीब बजट दिया गया। अब इसका उपयोग प्रमाण पत्र ब्लाक वाइज सभी स्कूलों को अपने बीईओ को जमा कराना होगा। सभी बीईओ बाद में डीईईओ ऑफिस में इसे सबमिट करेंगे
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मुख्यालय की तरफ से जो भी निर्देश आते हैं, उन पर नियमानुसार कार्य किया जाता है। सरकारी स्कूलों को हर साल अलग-अलग प्रकार की ग्रांट दी जाती है। विभिन्न ग्रांटो की राशि किन कार्यों के लिए खर्च की गई है, इसका ब्योरा भी देना जरूरी होता है।
कपिल पूनिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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इसका मुख्य मकसद दी गई राशि का सही प्रयोग होने का पता लगाना है। भेजे गए बजट की राशि अगर लैप्स हुई है तो उसका अलग से कॉलम में कारण भी संबंधित स्कूल के मुखिया को बताना होगा। बीईओ (खंड शिक्ष्रा अधिकारी) के माध्यम से यह जानकारी जुटाई जाएगी। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार स्कूलों को शैक्षणिक सत्र के दौरान कई तरह की ग्रांट जारी की जाती है। एक सत्र पूरा होने के बाद नया सत्र शुरू होने पर स्कूलों से भेजे गए बजट को लेकर जानकारी जुटाई जाती है। इससे मुख्यालय में यह पता लग सके कि स्कूलों में दी गई ग्रांट जिस कार्य के लिए भेजी गई, उसका उसमें प्रयोग किया गया या नहीं। इस तरह की सही जानकारी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किए जाने के बाद ही मिलती है।
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ये प्रोफार्मा स्कूलों को करना है तैयार
शिक्षा विभाग की ओर से शैक्षणिक सत्र 2023-2024 में विद्यालय, ब्लॉक, जिला, स्तरीय कल्चरल फेस्ट, अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव, थिएटर वर्कशॉप, मुख्यमंत्री सुंदरीकरण ब्लॉक, जिला स्तरीय ग्रांट पहली से पांचवी, छठी से आठवीं की फीस प्रतिपूर्ति, टॉयलेट ग्रांट, बिजली, पानी ग्रांट के उपयोगिता प्रमाण पत्र अलग-अलग प्रफोर्मा में स्कूलों को तैयार करने हैं। इन्हें डीईईओ ऑफिस संबंधित बीईओ के माध्यम से जमा कराना होगा। इसे लेकर डायरेक्टर मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से भी पत्र जारी किया गया है।
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करीब ढाई करोड़ का मिला था बजट
विभागीय अधिकारियों का यह भी कहना कि अधिकतर स्कूलों के मुखियाओं को यह जानकारी नहीं होती है कि बजट का यूज सर्टिफिकेट भी जमा कराना होता है। इसलिए ये शिक्षक भेजी गई राशि को कई बार दूसरे मद में प्रयोग कर लेते हैं। बाद में रिकॉर्ड मिलान नहीं हो पाता। जिले में स्कूलों मेंशैक्षणिक सत्र 2023-2024 के दौरान विभिन्न उत्सवों, मरम्मत, शौचालय, बिजली, पानी के लिए ढाई करोड़ रुपए के करीब बजट दिया गया। अब इसका उपयोग प्रमाण पत्र ब्लाक वाइज सभी स्कूलों को अपने बीईओ को जमा कराना होगा। सभी बीईओ बाद में डीईईओ ऑफिस में इसे सबमिट करेंगे
मुख्यालय की तरफ से जो भी निर्देश आते हैं, उन पर नियमानुसार कार्य किया जाता है। सरकारी स्कूलों को हर साल अलग-अलग प्रकार की ग्रांट दी जाती है। विभिन्न ग्रांटो की राशि किन कार्यों के लिए खर्च की गई है, इसका ब्योरा भी देना जरूरी होता है।
कपिल पूनिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी