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संक्रांत पै रुस्से मां अर बाबू, चाल मनावांगे...
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रेवाड़ी। मकर संक्रांति के दिन दान देने और गंगा स्नान की पुरातन परंपरा है। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। हरियाणा में संक्रांति पर एक और पर्व भी खास तौर पर मनाया जाता है। इसे जागो पर्व कहते हैं। इस दिन घर की छोटी बहुएं अपने बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करती हैं। गीत गाती हुई उन्हें मनाने के लिए जाती है। साथ ही उपहार स्वरूप चादर, मिष्ठान साड़ी या शॉल कर भेंट कर आशीर्वाद लेती हैं। यह पर्व समाज में मानवीय रिश्तों को नई ऊर्जा भी प्रदान कर रहा।
परंपरा के अनुसार छोटी बहू अपने सास-ससुर को, रिश्तेदारी में कोई बहन अपनी बहन-बहनोई, भांजे की बहू, अपने पति के मामा को बड़ा बुजुर्ग मानकर परंपरा का निर्वहन करती आ रही है। अहम बात यह है कि केवल महिलाओं की ओर से ही इस पर्व को मानने की परम्परा है। पुरुष समाज की ओर से इस पर्व के आयोजन में अपनी किसी महिला परिजन माता, पत्नी, बहन को पूर्ण व सकारात्मक सहयोग दिया जाता है। इस पर्व पर महिला अपने बुजुर्ग रिश्तेदार के घर पर जाकर उनको मनाने का काम करती है, जिसके दौरान रात को वह उस घर में ठहरती हैं। उनके साथ आए परिजन भी उस दिन उसी जगह ठहरते हैं। दूसरे दिन खाना खिलाकर सभी लोगों को यथा सामर्थ्य उपहार आदि देकर विदा किया जाता है।
सकरांत भेजने का है रिवाज
हरियाणा में मायके की ओर से मकर संक्रांति पर्व पर विशेष रूप से सकरात भेजने का रिवाज चला आ रहा है। इसमें देसी घी, गोंद के लड्डू, फल, मूंगफली, गज्जक, रेवड़ी, तिल, चावल, गुड़ आदि भेंट स्वरूप दिया जाता है। इसके एवज में बहन की ओर से भाई या मायके को अपनी ओर से कुछ भेंट देने का रिवाज चला आ रहा है। खास यह है कि इस पर्व में बहन का सगा भाई, चचेरा भाई, सकरांत देने के लिए आता है, मगर उस पर रात ठहराव की बाध्यता नहीं होती, जबकि जागो या जाग पर्व में अपनी रिश्तेदारी या दूर के रिश्तेदार को जगाने आए लोग उस दिन शाम होने के बाद रात को उसी घर में रात्रि प्रवास करते हैं।
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लोग बोले-आपसी प्रेम का प्रतीक है मकर संक्रांति और जागो पर्व
हरियाणा में मकर संक्रांति और जागो पर्व को काफी समय से देखते आ रहे हैं। इसमें महिला अपनी किसी रिश्तेदार को आत्मीयता का इजहार करती है। साथ ही उपहार स्वरूप भेंट भी देती है। यह पर्व को आपसी प्रेम का प्रतीक है।
-किशोर कुमार, सैनी मोहल्ला, कुतुबपुर
जागो और मकर संक्रांति प्राचीन काल से मनाई जा रही है। सूर्यदेव के राशि परिवर्तन और मल मास खत्म होने के बाद सभी मंगल कार्यों के आयोजन का मार्ग खुल जाता है। आपसी भाईचारे और दो परिवारों के संबंध प्रगाढ़ हो, इसलिए यह पर्व मनाए जाते हैं। दोनों का अपना अलग-अलग महत्व हैं।
-शंकरदास महाराज, नन्दरामपुर बास
मकर संक्रांति और जागो पर्व महिलाओं में पुराने पारिवारिक संबंधों को नई ऊर्जा देने के लिए मनाए जाते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भी इस दिन दान और स्नान का बड़ा महत्व है।
-निरंजन, ग्रामीण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण हरियाणा में जागो पर्व और मकर संक्रांति पर्व मनाए जाते हैं। गरीबों में अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दान को पुण्य कार्य बताया गया है। महिलाएं परंपराओं का निर्वाह करतीं हैं। आपसी रिश्तों को प्रगाढ़ करने का यह अच्छा माध्यम माना जाता है।
-सुरेंद्र वशिष्ठ, पंजाबी मार्केट
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परंपरा के अनुसार छोटी बहू अपने सास-ससुर को, रिश्तेदारी में कोई बहन अपनी बहन-बहनोई, भांजे की बहू, अपने पति के मामा को बड़ा बुजुर्ग मानकर परंपरा का निर्वहन करती आ रही है। अहम बात यह है कि केवल महिलाओं की ओर से ही इस पर्व को मानने की परम्परा है। पुरुष समाज की ओर से इस पर्व के आयोजन में अपनी किसी महिला परिजन माता, पत्नी, बहन को पूर्ण व सकारात्मक सहयोग दिया जाता है। इस पर्व पर महिला अपने बुजुर्ग रिश्तेदार के घर पर जाकर उनको मनाने का काम करती है, जिसके दौरान रात को वह उस घर में ठहरती हैं। उनके साथ आए परिजन भी उस दिन उसी जगह ठहरते हैं। दूसरे दिन खाना खिलाकर सभी लोगों को यथा सामर्थ्य उपहार आदि देकर विदा किया जाता है।
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सकरांत भेजने का है रिवाज
हरियाणा में मायके की ओर से मकर संक्रांति पर्व पर विशेष रूप से सकरात भेजने का रिवाज चला आ रहा है। इसमें देसी घी, गोंद के लड्डू, फल, मूंगफली, गज्जक, रेवड़ी, तिल, चावल, गुड़ आदि भेंट स्वरूप दिया जाता है। इसके एवज में बहन की ओर से भाई या मायके को अपनी ओर से कुछ भेंट देने का रिवाज चला आ रहा है। खास यह है कि इस पर्व में बहन का सगा भाई, चचेरा भाई, सकरांत देने के लिए आता है, मगर उस पर रात ठहराव की बाध्यता नहीं होती, जबकि जागो या जाग पर्व में अपनी रिश्तेदारी या दूर के रिश्तेदार को जगाने आए लोग उस दिन शाम होने के बाद रात को उसी घर में रात्रि प्रवास करते हैं।
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लोग बोले-आपसी प्रेम का प्रतीक है मकर संक्रांति और जागो पर्व
हरियाणा में मकर संक्रांति और जागो पर्व को काफी समय से देखते आ रहे हैं। इसमें महिला अपनी किसी रिश्तेदार को आत्मीयता का इजहार करती है। साथ ही उपहार स्वरूप भेंट भी देती है। यह पर्व को आपसी प्रेम का प्रतीक है।
-किशोर कुमार, सैनी मोहल्ला, कुतुबपुर
जागो और मकर संक्रांति प्राचीन काल से मनाई जा रही है। सूर्यदेव के राशि परिवर्तन और मल मास खत्म होने के बाद सभी मंगल कार्यों के आयोजन का मार्ग खुल जाता है। आपसी भाईचारे और दो परिवारों के संबंध प्रगाढ़ हो, इसलिए यह पर्व मनाए जाते हैं। दोनों का अपना अलग-अलग महत्व हैं।
-शंकरदास महाराज, नन्दरामपुर बास
मकर संक्रांति और जागो पर्व महिलाओं में पुराने पारिवारिक संबंधों को नई ऊर्जा देने के लिए मनाए जाते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भी इस दिन दान और स्नान का बड़ा महत्व है।
-निरंजन, ग्रामीण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण हरियाणा में जागो पर्व और मकर संक्रांति पर्व मनाए जाते हैं। गरीबों में अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दान को पुण्य कार्य बताया गया है। महिलाएं परंपराओं का निर्वाह करतीं हैं। आपसी रिश्तों को प्रगाढ़ करने का यह अच्छा माध्यम माना जाता है।
-सुरेंद्र वशिष्ठ, पंजाबी मार्केट