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Rewari News: दादूपंथी आश्रम में संत सम्मेलन व मेला आज
Wed, 04 Jun 2025 12:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:32 AM IST
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फोटो : 15सीहा स्थित बाबा रामस्वरूप का मंदिर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
डहीना। महंत भगवानदास और प्रेमदास की स्मृति में 4 जून को सीहा के दादूपंथी आश्रम में संत सम्मेलन, मेले और भंडारे का आयोजन होगा। इस दौरान संत महात्माओं का स्मरण किया जाता है। महंत नरोत्तम दास की देखरेख में संत सम्मेलन की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया है।
महंत नरोत्तम दास ने बताया कि संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप महाराज ऐसे संत थे, जिनके आध्यात्मिक योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। साहित्यकार व पत्रकार बाबू बालमुकुंद गुप्त ने अपने एक शोध आलेख में दादूपंथी संत बाबा रामस्वरूप दास को आध्यात्मिक हीरा की संज्ञा दी है।
इतिहासकार डॉ. केसी यादव ने युवा चेतना संगठन सीहा के सहयोग से प्रकाशित व वरिष्ठ साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया द्वारा लिखित पुस्तक संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास महाराज : व्यक्तित्व एवं कृतित्व नामक पुस्तक में इस शोध आलेख का जिक्र किया है।
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संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास की ब्रह्मलीन होने पर सीहा स्थित आश्रम की स्थिति बदतर होती गई। बाद में रेवाणा दादूपीठ से एक महंत भगवान दास को भेजा गया जिन्होंने इस आश्रम को नई दिशा दी। उन्होंने आश्रम की बागडोर संभालते ही बहुआयामी जीर्णोद्धार व नव निर्माण के अनेक कार्य किए। मंदिर परिसर में संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई।
महंत भगवान दास ने बाबा रामस्वरूप दास के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिरस्थायी एवं प्रेरणापुंज बनाने के लिए आश्रम में मन, वचन व कर्म से एक निष्काम कर्मयोगी के रूप में साधना की। यही कारण है कि प्रतिवर्ष 4 जून को उनकी पुण्यतिथि पर लगने वाले मेेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।
महंत नरोत्तम दास संभाल रहे विरासत
सीहा आश्रम के वर्तमान महंत नरोत्तम दास इस समृद्ध विरासत को संभाल रहे हैं। उन्हीं की देखरेख में संत सम्मेलन, मेले तथा भंडारे की तैयारियों में पूरा गांव जुटा है। गांव तथा क्षेत्र के छत्तीस बिरादरी के सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिवर्ष इस आयोजन में निष्काम भाव से जुटे रहते हैं। गांव के सभी पंच-सरपंच, नंबरदार, आध्यात्मिक विचारक, श्रद्धालु तथा कार्यकर्ता भीषण गर्मी में भी मेले में श्रमदान करते देखे जा सकते हैं।
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डहीना। महंत भगवानदास और प्रेमदास की स्मृति में 4 जून को सीहा के दादूपंथी आश्रम में संत सम्मेलन, मेले और भंडारे का आयोजन होगा। इस दौरान संत महात्माओं का स्मरण किया जाता है। महंत नरोत्तम दास की देखरेख में संत सम्मेलन की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया है।
महंत नरोत्तम दास ने बताया कि संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप महाराज ऐसे संत थे, जिनके आध्यात्मिक योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। साहित्यकार व पत्रकार बाबू बालमुकुंद गुप्त ने अपने एक शोध आलेख में दादूपंथी संत बाबा रामस्वरूप दास को आध्यात्मिक हीरा की संज्ञा दी है।
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इतिहासकार डॉ. केसी यादव ने युवा चेतना संगठन सीहा के सहयोग से प्रकाशित व वरिष्ठ साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया द्वारा लिखित पुस्तक संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास महाराज : व्यक्तित्व एवं कृतित्व नामक पुस्तक में इस शोध आलेख का जिक्र किया है।
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संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास की ब्रह्मलीन होने पर सीहा स्थित आश्रम की स्थिति बदतर होती गई। बाद में रेवाणा दादूपीठ से एक महंत भगवान दास को भेजा गया जिन्होंने इस आश्रम को नई दिशा दी। उन्होंने आश्रम की बागडोर संभालते ही बहुआयामी जीर्णोद्धार व नव निर्माण के अनेक कार्य किए। मंदिर परिसर में संत शिरोमणि बाबा रामस्वरूप दास महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई।
महंत भगवान दास ने बाबा रामस्वरूप दास के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व को चिरस्थायी एवं प्रेरणापुंज बनाने के लिए आश्रम में मन, वचन व कर्म से एक निष्काम कर्मयोगी के रूप में साधना की। यही कारण है कि प्रतिवर्ष 4 जून को उनकी पुण्यतिथि पर लगने वाले मेेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।
महंत नरोत्तम दास संभाल रहे विरासत
सीहा आश्रम के वर्तमान महंत नरोत्तम दास इस समृद्ध विरासत को संभाल रहे हैं। उन्हीं की देखरेख में संत सम्मेलन, मेले तथा भंडारे की तैयारियों में पूरा गांव जुटा है। गांव तथा क्षेत्र के छत्तीस बिरादरी के सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिवर्ष इस आयोजन में निष्काम भाव से जुटे रहते हैं। गांव के सभी पंच-सरपंच, नंबरदार, आध्यात्मिक विचारक, श्रद्धालु तथा कार्यकर्ता भीषण गर्मी में भी मेले में श्रमदान करते देखे जा सकते हैं।