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Rewari News: रोडवेज यूनियन ने किया इलेक्ट्रिक बसों का विरोध
Fri, 24 Jan 2025 12:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 24 Jan 2025 12:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की बैठक राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद की अध्यक्षता में हुई। इसका संचालन महा सचिव सुमेर सिवाच ने किया। इसमें 26 जनवरी को रोहतक, रेवाड़ी, हिसार व अन्य कई डिपो से इलेक्ट्रिक बसें चलाने के निर्णय का विरोध किया गया।
हरियाणा रोडवेज रेवाड़ी डिपो तालमेल कमेटी के प्रधान प्रवीण यादव, राजपाल यादव, संजय यादव, शवि यादव व सुरेश यादव ने राज्य कमेटी के निर्णय का समर्थन किया है। यूनियन ने सरकार से मांग की कि एक इलेक्ट्रॉनिक बस के बदले में साधारण 6 बसें आती हैं, जो पूरे हरियाणा प्रदेश में सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का निर्णय है, अगर उसकी जगह पर साधारण 300 बसें प्रत्येक डिपो के बेड़े में शामिल हो तो हरियाणा प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होंगी। वहीं, एक बस पर छह बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। विभाग में 10 हजार सरकारी बसें शामिल की जाती हैं तो 60 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलता है और जनता को बेहतर एवं सुरक्षित सेवा मिलती है, जबकि 62 रुपये प्रत्येक किलोमीटर के हिसाब से बसें चलाने के निर्णय से जनता पर महंगे किराये के साथ साथ विभाग को भी घाटा भुगतना करना पड़ेगा। बैठक में नरेंद्र दिनोद, सुमेर सिवाच, सुशील ईकश, शिवकुमार श्योराण, रमेश श्योकंद, जयकुंवार दहिया मौजूद रहे।
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रेवाड़ी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन की बैठक राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद की अध्यक्षता में हुई। इसका संचालन महा सचिव सुमेर सिवाच ने किया। इसमें 26 जनवरी को रोहतक, रेवाड़ी, हिसार व अन्य कई डिपो से इलेक्ट्रिक बसें चलाने के निर्णय का विरोध किया गया।
हरियाणा रोडवेज रेवाड़ी डिपो तालमेल कमेटी के प्रधान प्रवीण यादव, राजपाल यादव, संजय यादव, शवि यादव व सुरेश यादव ने राज्य कमेटी के निर्णय का समर्थन किया है। यूनियन ने सरकार से मांग की कि एक इलेक्ट्रॉनिक बस के बदले में साधारण 6 बसें आती हैं, जो पूरे हरियाणा प्रदेश में सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का निर्णय है, अगर उसकी जगह पर साधारण 300 बसें प्रत्येक डिपो के बेड़े में शामिल हो तो हरियाणा प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होंगी। वहीं, एक बस पर छह बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। विभाग में 10 हजार सरकारी बसें शामिल की जाती हैं तो 60 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलता है और जनता को बेहतर एवं सुरक्षित सेवा मिलती है, जबकि 62 रुपये प्रत्येक किलोमीटर के हिसाब से बसें चलाने के निर्णय से जनता पर महंगे किराये के साथ साथ विभाग को भी घाटा भुगतना करना पड़ेगा। बैठक में नरेंद्र दिनोद, सुमेर सिवाच, सुशील ईकश, शिवकुमार श्योराण, रमेश श्योकंद, जयकुंवार दहिया मौजूद रहे।
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