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परिवहन विभाग को अपने ही लगा रहे हैं चूना
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roadways
- फोटो : Rewari
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लगातार घाटे में चले रहे रोडवेज को परिचालक ही चूना लगा रहे हैं। टिकट के जरिये रोडवेज को चूना लगाने के मामले में अकेले रेवाड़ी डिपो के 85 परिचालक हेराफेरी करते हुए पकड़े गए। इन पर 6219 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज एक परिचालक को निलंबित किया गया। यूनियनबाजी व राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते ऐसे परिचालक बड़ी कार्रवाई से बच निकलते हैं।
100 रुपये के अधिक की हेराफेरी में सस्पेंड
राज्य परिवहन द्वारा 100 रुपये से अधिक की हेराफेरी में परिचालक को पकड़ा जाता है तो चार माह के लिए सस्पेंड कर दिया जाता है। वहीं 100 रुपये से कम की हेराफेरी में पकड़े जाने पर केवल जुर्माना लगा दिया जाता है। दोनों ही स्थितियों में जाचं अधिकारी नियुक्त कर जांच कराई जाती है। ऐसे में अधिकारी द्वारा जांच की जाती है। यदि परिचालक दोषी पाया जाता है तो जुर्माना भरवाकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन सवाल है कि जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज किया जाता है, परिवहन विभाग में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है।
यूं लगाते हैं परिचालक राज्य परिवहन को चूना
राज्य परिवहन बसों में परिचालकों द्वारा कुछ यात्रियों से कम पैसे लेकर टिकट नहीं दिया जाता है। यात्री भी कम पैसे के लालच में टिकट का दबाव परिचालक पर नहीं बनाता। वर्ष 2019 में राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो की जीएम, टीएम व बस फ्लाइंग द्वारा हेराफेरी में पकड़े गए परिचालकों के मामलों की बात करें तो जनवरी में 5, फरवरी 8, मार्च 10, अप्रैल 16, मई 8, जून 16 , जुलाई 4, अगस्त 4, सितंबर 4, अक्तूबर 5, नवंबर माह में भी 5 परिचालकों को रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है।
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जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई
राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो महा प्रबंधक नवीन कुमार भारद्वाज ने बताया कि समय-समय पर बसों की चैकिंग की जाती है। चैकिंग में दोषी पाए जाने पर विभाग के नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। भविष्य में इस प्रकार के फ्रॉड न हों इसके लिए बसों की चैंकिग बढ़ाई जाएगी।
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100 रुपये के अधिक की हेराफेरी में सस्पेंड
राज्य परिवहन द्वारा 100 रुपये से अधिक की हेराफेरी में परिचालक को पकड़ा जाता है तो चार माह के लिए सस्पेंड कर दिया जाता है। वहीं 100 रुपये से कम की हेराफेरी में पकड़े जाने पर केवल जुर्माना लगा दिया जाता है। दोनों ही स्थितियों में जाचं अधिकारी नियुक्त कर जांच कराई जाती है। ऐसे में अधिकारी द्वारा जांच की जाती है। यदि परिचालक दोषी पाया जाता है तो जुर्माना भरवाकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन सवाल है कि जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज किया जाता है, परिवहन विभाग में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है।
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यूं लगाते हैं परिचालक राज्य परिवहन को चूना
राज्य परिवहन बसों में परिचालकों द्वारा कुछ यात्रियों से कम पैसे लेकर टिकट नहीं दिया जाता है। यात्री भी कम पैसे के लालच में टिकट का दबाव परिचालक पर नहीं बनाता। वर्ष 2019 में राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो की जीएम, टीएम व बस फ्लाइंग द्वारा हेराफेरी में पकड़े गए परिचालकों के मामलों की बात करें तो जनवरी में 5, फरवरी 8, मार्च 10, अप्रैल 16, मई 8, जून 16 , जुलाई 4, अगस्त 4, सितंबर 4, अक्तूबर 5, नवंबर माह में भी 5 परिचालकों को रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है।
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जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई
राज्य परिवहन रेवाड़ी डिपो महा प्रबंधक नवीन कुमार भारद्वाज ने बताया कि समय-समय पर बसों की चैकिंग की जाती है। चैकिंग में दोषी पाए जाने पर विभाग के नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। भविष्य में इस प्रकार के फ्रॉड न हों इसके लिए बसों की चैंकिग बढ़ाई जाएगी।