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Rewari News: सीएम के कार्यक्रम से राव इंद्रजीत ने फिर बनाई दूरी
Sun, 06 Sep 2026 11:32 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:32 PM IST
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केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का विशिष्ट अतिथि का पोस्टर
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रेवाड़ी। नशा विरोधी हाफ मैराथन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही। तीसरी बार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यक्रम में राव इंद्रजीत की अनुपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम के पोस्टर और बैनरों पर राव इंद्रजीत का नाम प्रमुखता से अंकित था, लेकिन वह कार्यक्रम में नजर नहीं आए।
कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पूछा कि रेवाड़ी आने पर राव इंद्रजीत दूर क्यों रहते हैं, तो मुख्यमंत्री बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। इससे पहले भी मुख्यमंत्री के रेवाड़ी और बावल में हुए कार्यक्रमों से राव इंद्रजीत और उनके समर्थकों की अनुपस्थिति देखने को मिली थी।
मैराथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं धावकों के साथ दौड़ लगाई। कार्यक्रम में रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव, बावल के विधायक डॉ. कृष्ण कुमार और कोसली के विधायक अनिल यादव मौजूद रहे।
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प्रशासन की ओर से जारी पोस्टर में राव इंद्रजीत का नाम मुख्यमंत्री के ठीक नीचे विशिष्ट अतिथि के रूप में दर्ज था। इससे पहले 23 अगस्त और 30 जून को बावल में हुए मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी राव इंद्रजीत सिंह और उनके समर्थक शामिल नहीं हुए थे।
आरती राव के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
तीन सितंबर को नारनौल में यादव महासभा के कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। उन्होंने कहा था कि उनके परिवार ने हमेशा दक्षिण हरियाणा की आवाज उठाई है। उन्होंने श्रीकृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही थी। यह भी कहा था कि आज कुछ लोगों को राव तुलाराम का नाम लेने से भी परेशानी होती है। आरती राव ने दक्षिण हरियाणा की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह वीरों की भूमि है और क्षेत्र के लोगों को अपनी पहचान पर गर्व है। उन्होंने कहा था कि यदि अपनी आवाज नहीं उठाई जाएगी तो कौन उठाएगा।
पहले भी दिखा चुके हैं तेवर
14 अगस्त को गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में भी राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में क्षेत्रीय राजनीति को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि केवल पंजाबी होने के नाम पर चुनाव लड़कर देख लें, तब पता चलेगा कि कितने वोट मिलते हैं। उनके इस बयान को भी दक्षिण हरियाणा की राजनीति के संदर्भ में देखा गया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में थामा था भाजपा का दामन
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले राव इंद्रजीत सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अहीरवाल की अनदेखी आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ दी थी। आत्मसम्मान का हवाला देते हुए उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में लगातार चुनाव जीतने के बावजूद उन्हें पूर्ण कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी उनकी दावेदारी पीछे रही।
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कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पूछा कि रेवाड़ी आने पर राव इंद्रजीत दूर क्यों रहते हैं, तो मुख्यमंत्री बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए। इससे पहले भी मुख्यमंत्री के रेवाड़ी और बावल में हुए कार्यक्रमों से राव इंद्रजीत और उनके समर्थकों की अनुपस्थिति देखने को मिली थी।
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मैराथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं धावकों के साथ दौड़ लगाई। कार्यक्रम में रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव, बावल के विधायक डॉ. कृष्ण कुमार और कोसली के विधायक अनिल यादव मौजूद रहे।
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प्रशासन की ओर से जारी पोस्टर में राव इंद्रजीत का नाम मुख्यमंत्री के ठीक नीचे विशिष्ट अतिथि के रूप में दर्ज था। इससे पहले 23 अगस्त और 30 जून को बावल में हुए मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी राव इंद्रजीत सिंह और उनके समर्थक शामिल नहीं हुए थे।
आरती राव के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
तीन सितंबर को नारनौल में यादव महासभा के कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। उन्होंने कहा था कि उनके परिवार ने हमेशा दक्षिण हरियाणा की आवाज उठाई है। उन्होंने श्रीकृष्ण के संदेश का उल्लेख करते हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही थी। यह भी कहा था कि आज कुछ लोगों को राव तुलाराम का नाम लेने से भी परेशानी होती है। आरती राव ने दक्षिण हरियाणा की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह वीरों की भूमि है और क्षेत्र के लोगों को अपनी पहचान पर गर्व है। उन्होंने कहा था कि यदि अपनी आवाज नहीं उठाई जाएगी तो कौन उठाएगा।
पहले भी दिखा चुके हैं तेवर
14 अगस्त को गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में भी राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में क्षेत्रीय राजनीति को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि केवल पंजाबी होने के नाम पर चुनाव लड़कर देख लें, तब पता चलेगा कि कितने वोट मिलते हैं। उनके इस बयान को भी दक्षिण हरियाणा की राजनीति के संदर्भ में देखा गया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में थामा था भाजपा का दामन
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले राव इंद्रजीत सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अहीरवाल की अनदेखी आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ दी थी। आत्मसम्मान का हवाला देते हुए उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में लगातार चुनाव जीतने के बावजूद उन्हें पूर्ण कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी उनकी दावेदारी पीछे रही।