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Rewari News: फर्जी कोटेशन लगाकर स्ट्रीट लाइट खरीद में लाखों की हेराफेरी, तीन पंचायतों के सरपंच-सचिव समेत आठ पर एफआईआर

Sun, 06 Sep 2026 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 06 Sep 2026 11:36 PM IST
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Embezzlement of lakhs in street light procurement using fake quotations; FIR registered against eight individuals, including Sarpanchs and Secretaries of three panchayats.
धारूहेड़ा। जिले की ग्राम पंचायतों में वर्ष 2010 से 2015 के दौरान स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट खरीद में अनियमितताओं को लेकर गुरुग्राम एसीबी ने जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज की है। एसीबी ने घटाल महानियावास, मालपुरा और सुनारिया असदपुर पंचायतों के सरपंच, सचिव समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया है।
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मामले की जांच एसीबी रेवाड़ी के प्रभारी निरीक्षक जयपाल सिंह को सौंपी गई है। आरोपी बनाए गए लोगों में घटाल महानियावास के तत्कालीन सरपंच रामपाल, तत्कालीन ग्राम सचिव राजपाल, इलेक्ट्रिकल स्टोर के रघुबीर सिंह, मालपुरा की तत्कालीन सरपंच सुशीला देवी, तत्कालीन ग्राम सचिव राम सिंह, फर्म मालिक प्रदीप कुमार, सुनारिया असदपुर के तत्कालीन सरपंच राकेश और तत्कालीन ग्राम सचिव राजेश गुप्ता शामिल हैं।
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आरोप है कि फर्मों की फर्जी कोटेशन लगाकर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर लाइटें खरीदी गईं और सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के दौरान घटाल महानियावास ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड की जांच में वर्ष 2010 से 2013 के बीच स्ट्रीट लाइट खरीद के चार बिल सामने आए। इनमें बालाजी इलेक्ट्रिक स्टोर नई सब्जी मंडी और भारत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, पाल्हावास से लाइट खरीद दिखाई गई। एक बिल में 26 स्ट्रीट लाइट 1.25 लाख रुपये से अधिक में खरीदी गईं। तकनीकी मूल्यांकन में इस खरीद पर 81,212 रुपये का अंतर पाया गया।
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इसी तरह मार्च 2011 के एक अन्य बिल में 30 स्ट्रीट लाइटों की खरीद पर तकनीकी मूल्यांकन में 93,660 रुपये अधिक खर्च होने की बात सामने आई। इन दोनों मामलों में लगी कोटेशन की जांच में भी सवाल उठे।
एक फर्म के संचालक ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में लगी कोटेशन उनकी फर्म की नहीं थी। दूसरी फर्म की कोटेशन देने से भी संबंधित संचालक ने इनकार किया। जांच में एक फर्म का आबकारी एवं कराधान विभाग में रिकॉर्ड भी नहीं मिला।
वर्ष 2013 के दो अन्य बिलों में 60 और 50 स्ट्रीट लाइटों की खरीद दिखाई गई। इनमें 56,520 और 47,100 रुपये का अंतर तकनीकी मूल्यांकन में सामने आया। जांच रिपोर्ट में इन मामलों में भी सरकारी राशि की रिकवरी का सुझाव दिया गया है।

मालपुरा में 1.15 लाख रुपये का अंतर
मालपुरा ग्राम पंचायत में भी स्ट्रीट लाइट खरीद के दो बिलों की जांच की गई। इनमें 30 स्ट्रीट लाइट और अन्य लाइटें एक ही फर्म से खरीदी गई दिखाई गईं। रिकॉर्ड में दूसरी फर्मों की कोटेशन लगी थी, लेकिन जांच में आरोप है कि ये कोटेशन संबंधित फर्मों से जारी नहीं हुई थीं। तकनीकी अधिकारी की ओर से दोनों बिलों का मूल्यांकन करने पर 1,15,352 रुपये का अंतर सामने आया। जांच के अनुसार तत्कालीन सरपंच सुशीला देवी, तत्कालीन ग्राम सचिव राम सिंह और संबंधित फर्म के संचालक प्रदीप कुमार के खिलाफ मिलीभगत कर फर्जी कोटेशन तैयार करने और सरकारी राशि को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
सुनारिया असदपुर में भी फर्जी कोटेशन का आरोप
सुनारिया असदपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2011 और 2015 की स्ट्रीट लाइट खरीद का रिकॉर्ड जांचा गया। वर्ष 2011 के बिल में छह स्ट्रीट लाइट खरीद दिखाई गई थीं। इसमें लगी कोटेशन की तस्दीक के दौरान संबंधित फर्म के मौके पर कार्यरत नहीं होने और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। वर्ष 2015 में 40 स्ट्रीट लाइटें 1.68 लाख रुपये में खरीदी गई थीं। इस खरीद के संबंध में उपलब्ध अनुमानित राशि के दस्तावेजों की भी जांच की गई। तकनीकी मूल्यांकन में इस खरीद सहित संबंधित रिकॉर्ड में 47,780 रुपये का अंतर सामने आया। जांच रिपोर्ट में सरपंच राकेश, तत्कालीन ग्राम सचिव राजेश गुप्ता और संबंधित फर्म संचालक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई।


कई पंचायतों में नहीं मिली वित्तीय गड़बड़ी
सतर्कता ब्यूरो की जांच केवल इन तीन पंचायतों तक सीमित नहीं थी। करावरा मानकपुर पंचायत, जाटूवास, मंडिया कला, ततारपुर इस्तमुरार, भाकली, गोपालपुर गाजी, रोजूवास, चिल्हड़ और तुर्कियावास समेत अन्य पंचायतों में भी वर्ष 2010 से 2015 तक खरीदी गई स्ट्रीट और हाईमास्ट लाइटों के बिल, कोटेशन, मांग प्रस्ताव और भुगतान प्रस्ताव की जांच की गई। इन पंचायतों के मामलों में तकनीकी मूल्यांकन के दौरान भुगतान और निर्धारित राशि में कोई अंतर नहीं पाया गया और सरकार को वित्तीय नुकसान होना नहीं मिला। जांच रिपोर्ट में संबंधित पंचायतों के तत्कालीन ग्राम सचिवों की ओर से रिकॉर्ड और कोटेशन सुरक्षित नहीं रखने को भी लापरवाही माना गया है। अब दर्ज मामले में एसीबी दस्तावेज, बिल, कोटेशन, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित फर्मों की भूमिका की जांच करेगी।
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