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Rewari News: रेवाड़ी पुलिस ने दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, चार साइबर ठग गिरफ्तार
Sat, 05 Jul 2025 11:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 05 Jul 2025 11:22 PM IST
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फोटो: 07रेवाड़ी। ठगी के चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेवाड़ी साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर देश के विभिन्न राज्यों में 150 लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस चारों आरोपियों को अदालत में पेेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लेगी।
डीएसपी हेडक्वार्टर डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि फिदेड़ी गांव निवासी नीतेश ने मई में शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 मई को साइबर ठग ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उनके एकाउंट से जुड़ी जानकारी ले ली। इसके बाद साइबर ठगों ने उनके खाते से 1 लाख 3 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए।
मामला दर्ज करने के बाद साइबर थाने के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर नीतिश ने जांच शुरू की। पुलिस टीम ने गिरोह का पता लगाने के लिए बिहार से लेकर दिल्ली तक छानबीन की।
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जांच में पता चला कि यह गिरोह दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर ठगी कर रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के छपरा जिले के खिजूरी गांव के मूल निवासी अजीत मांझी, उसका साला बिहार के सीवान के जगतपुर निवासी विकास, दिल्ली के मोहन गार्डन सैनिक विहार निवासी संदीप, दिल्ली के विकास नगर निवासी संजय उर्फ लल्ला हैं।
जीजा-साले ने मिलकर बनाया गिरोह
गिरफ्तार आरोपियों में अजीत मांझी पोस्ट ग्रेजुएट है जबकि उसका साला विकास पहले बैंकिंग सेक्टर में नौकरी कर चुका है। अजीत मांझी वाॅइस चेंजर के जरिये महिला की आवाज में बात करता था। कॉल के दौरान वह बैंक एकाउंट से जुड़ी जानकारी जुटा लेता था। इसके बाद वह ये जानकारी अपने साले विकास और गैंग के अन्य सदस्यों संदीप व संजय को देता था। आरोपियों ने बिहार में कुछ लोगों के बैंक खाते खुलवा रखे थे, जिनके माध्यम से वह ठगी की रकम उसमें ट्रांसफर करते थए।
फर्राटेदार अंग्रेजी बोतला है अजीत
डीएसपी ने बताया कि अजीत मांझी ने लंबे समय तक कॉल सेंटर में काम किया था और वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने में माहिर था। इसी हुनर का फायदा उठाकर वह महिला की आवाज में अंजान नंबरों से लोगों को कॉल कर आसानी से फंसा लेता था। इसी तरह उसने 29 मई को रेवाड़ी के गांव फिदेड़ी के रहने वाले नितेश को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उसके एकाउंट से जुड़ी जानकारी ली थी। उन्होंने बताया कि आरोपी 2022 से हर दिन 4 वारदातों को अंजाम देते आ रहे हैं। आरोपी अब तक यह 150 वारदात कर चुके हैं। रेवाड़ी में चार वारदातों अंजाम देने की बात आरोपियों ने कबूल की है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल, सिम कार्ड, क्रेडिट कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपी ठगी के लिए बिहार में कुछ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। बदले में उन्हें ठगी की रकम में से 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा देते थे।
नौकरी जाने के बाद शुरू की ठगी
डीएसपी ने बताया कि अजीत मांझी पोस्ट ग्रेजुएट, विकास 12वीं पास, संदीप और संजय ग्रेजुएट हैं। पहले सभी अच्छी नौकरी कर रहे थे। 2021 में नौकरी जाने और सट्टे की लत के कारण पैसों की कमी पड़ गई। इसके बाद 2022 में चारों ने मिलकर यह गिरोह बना लिया। गैंग में शामिल संजय और संदीप बैंकिंग सेक्टर और विकास कॉल सेंटर में काम कर चुका है।
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रेवाड़ी। रेवाड़ी साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर देश के विभिन्न राज्यों में 150 लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस चारों आरोपियों को अदालत में पेेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लेगी।
डीएसपी हेडक्वार्टर डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि फिदेड़ी गांव निवासी नीतेश ने मई में शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 मई को साइबर ठग ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उनके एकाउंट से जुड़ी जानकारी ले ली। इसके बाद साइबर ठगों ने उनके खाते से 1 लाख 3 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए।
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मामला दर्ज करने के बाद साइबर थाने के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर नीतिश ने जांच शुरू की। पुलिस टीम ने गिरोह का पता लगाने के लिए बिहार से लेकर दिल्ली तक छानबीन की।
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जांच में पता चला कि यह गिरोह दिल्ली के उत्तम नगर में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर ठगी कर रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के छपरा जिले के खिजूरी गांव के मूल निवासी अजीत मांझी, उसका साला बिहार के सीवान के जगतपुर निवासी विकास, दिल्ली के मोहन गार्डन सैनिक विहार निवासी संदीप, दिल्ली के विकास नगर निवासी संजय उर्फ लल्ला हैं।
जीजा-साले ने मिलकर बनाया गिरोह
गिरफ्तार आरोपियों में अजीत मांझी पोस्ट ग्रेजुएट है जबकि उसका साला विकास पहले बैंकिंग सेक्टर में नौकरी कर चुका है। अजीत मांझी वाॅइस चेंजर के जरिये महिला की आवाज में बात करता था। कॉल के दौरान वह बैंक एकाउंट से जुड़ी जानकारी जुटा लेता था। इसके बाद वह ये जानकारी अपने साले विकास और गैंग के अन्य सदस्यों संदीप व संजय को देता था। आरोपियों ने बिहार में कुछ लोगों के बैंक खाते खुलवा रखे थे, जिनके माध्यम से वह ठगी की रकम उसमें ट्रांसफर करते थए।
फर्राटेदार अंग्रेजी बोतला है अजीत
डीएसपी ने बताया कि अजीत मांझी ने लंबे समय तक कॉल सेंटर में काम किया था और वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने में माहिर था। इसी हुनर का फायदा उठाकर वह महिला की आवाज में अंजान नंबरों से लोगों को कॉल कर आसानी से फंसा लेता था। इसी तरह उसने 29 मई को रेवाड़ी के गांव फिदेड़ी के रहने वाले नितेश को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर उसके एकाउंट से जुड़ी जानकारी ली थी। उन्होंने बताया कि आरोपी 2022 से हर दिन 4 वारदातों को अंजाम देते आ रहे हैं। आरोपी अब तक यह 150 वारदात कर चुके हैं। रेवाड़ी में चार वारदातों अंजाम देने की बात आरोपियों ने कबूल की है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल, सिम कार्ड, क्रेडिट कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपी ठगी के लिए बिहार में कुछ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। बदले में उन्हें ठगी की रकम में से 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा देते थे।
नौकरी जाने के बाद शुरू की ठगी
डीएसपी ने बताया कि अजीत मांझी पोस्ट ग्रेजुएट, विकास 12वीं पास, संदीप और संजय ग्रेजुएट हैं। पहले सभी अच्छी नौकरी कर रहे थे। 2021 में नौकरी जाने और सट्टे की लत के कारण पैसों की कमी पड़ गई। इसके बाद 2022 में चारों ने मिलकर यह गिरोह बना लिया। गैंग में शामिल संजय और संदीप बैंकिंग सेक्टर और विकास कॉल सेंटर में काम कर चुका है।