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गिरफ्तारी के डर से कर्मचारी नेता भूमिगत

Wed, 29 Jun 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Wed, 29 Jun 2016 12:22 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
23 सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से कड़ाई से निपटने के लिए जहां प्रशासन ने कमर कस ली है वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी नेता भी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने मोबाइल घर पर ही छोड़कर भूमिगत हो गए हैं। सरकार ने गुप्तचर विभाग सहित अन्य एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया है।
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नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। एचएसईबी के प्रदेश अध्यक्ष कंवर सिंह यादव और जिले स्तर के सभी नेताओं के फोन या तो बंद हैं या फिर उनके परिजन फोन उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जब कर्मचारी नेताओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो हड़ताल को हर हालत में सफल बनाया जाएगा। प्रदेशस्तर के बिजली निगम के कर्मचारी नेता ने कहा है कि भाजपा सरकार ने तो कांग्रेस की भी सारी हदें पार कर दी हैं।
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1200 स्थायी और 450 अनुबंध कर्मचारी रहेंगे हड़ताल पर
डीएचबीवीएन के 800 और रेवाड़ी सर्कल में एचपीवीएनएल के करीब 400 स्थायी कर्मचारियों के साथ 450 से अधिक अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की आशंका है। एक दिन के सामूहिक अवकाश के दौरान अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद इन कर्मचारियों में नौकरी जाने का डर जरूर है फिर ये साथी कर्मचारियों के साथ हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। ऐसी स्थिति में यदि बिजली में कोई फाल्ट आ गया तो ठीक कराने के लिए दो दिन का इंतजार करना पड़ सकता है।
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जेई यूनियन बना सकती है हड़ताल से दूरी
बिजली निगम से जुड़े जूनियर इंजीनियरों की यूनियन अलग से होने के कारण जेई यूनियन हड़ताल से दूरी बना सकती है। बिजली निगम के सर्व कर्मचारी संघ से जुड़े नेताओं ने बताया कि जेई यूनियन से भी हड़ताल में शामिल होने की बात चल रही है। उन्हें उम्मीद है कि यह यूनियन भी निगम की भलाई के लिए कर्मियों का समर्थन करेगी।


एमडी पर निगम को बर्बाद करने का आरोप
बिजली निगम के कर्मचारी यूनियन के नेता कंवर सिंह यादव ने बताया कि प्रदेश की 23 सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में सरकार को एक फार्मूला सुझाया गया था। इसके तहत दो सब डिविजन प्राइवेट संस्था को और दो निगम के पास। एक साल की परफार्मेंस के आधार पर यदि निगम के दो सब डिविजन घाटे में रहते हैं तो कर्मचारी नेता सरकार के निजीकरण के फैसले से सहमत हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार एचयूबीवीएन के एमडी के कहने पर निगम को बर्बाद करने पर उतारू है।
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