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पेयजल और शौचालयों से जूझता बस स्टैंड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2016 01:55 AM IST
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sdf
- फोटो : Getty Images
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रेवाड़ी बस स्टैंड परिसर में महिला शौचालयों की कमी के कारण महिला सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले से निर्मित एक महिला और अन्य पुरुष शौचालयों में सफाई नहीं होने के कारण इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं। शौचालयों की दुर्दशा और बदबू के कारण लोगों ने परिसर में बनी पार्क व अन्य खाली दीवारों को ही पेशाबघर बना लिया है। बस स्टैंड से रोजाना 10 से 12 हजार यात्रियों की आवाजाही लगी रहती है। ऐसे में शौचालयों की समस्या सवारियों के लिए बड़ी परेशानी साबित हो रही है। सवारियों के साथ-साथ स्थानीय रोडवेज कर्मचारी भी इस समस्या का रोजाना सामना करते हैं।
बिना छत का महिला शौचालय
बस स्टैंड परिसर में कुल दो महिला शौचालय हैं। इसमें एक अस्थायी है। स्थायी शौचालय परिसर के भीतर बना है जबकि अस्थायी बाहर की तरफ है। सन् 1970 में निर्मित 46 साल पुराना स्थायी शौचालय अब कंडम अवस्था में है। अस्थायी शौचालय की छत नहीं है। ऐसे में महिला सवारियां इन शौचालयों में जाने से भी कतराती हैं। बस स्टैंड के भीतर वाले शौचालय में कई मीटर दूर तक भारी दुर्गंध आती है। अस्थायी शौचालय के पास पुरुष यूरिनल सटा है, इससे महिलाओं को इस तरफ जाने में हिचकिचाहट होती है।
बिना परदे का प्रसाधन
इसी अस्थाई महिला-पुरुष शौचालय के पास पुरुष शौचालय बना हुआ है। यह शौचालय बिना परदे और पानी वाला है। इसे न तो पुरुष इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही महिलाएं।
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शौचालयों की नहीं होती सफाई
सफाई कर्मचारियों की कमी और विभाग की अनदेखी के चलते परिसर में बने शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है। रेवाड़ी डिपो में सफाई कर्मचारियों के कुल 25 पद स्वीकृत हैं। इसमें से पांच पद रिक्त हैं। वहीं बसस्टैंड परिसर में केवल 10 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। 10-12 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले बसस्टैंड की पूरी सफाई का जिम्मा 10 कर्मचारियों पर है जबकि भीड़ के हिसाब से अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की जरूरत है।
टंकियां की नहीं होती सफाई
बस स्टैंड परिसर में दो बड़ी पानी की टंकियां बनी हुई हैं। इन टंकियों की विभाग की तरफ से साफ-सफाई और क्लोरिनेशन भी नहीं करवाया जाता है। यात्रियों का कहना है कि सफाई के अभाव में बदबू आती है। यात्रियों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। कुछ यात्री खरीदकर भी पानी पीते हैं।
बसस्टैंड परिसर में शौचालय की साफ-सफाई को लेकर विभाग काफी संजीदा है। नियमित रूप से साफ-सफाई होती है। वहीं बसस्टैंड परिसर में एक और नए महिला शौचालय का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - राजीव नागपाल, महाप्रबंधक, रोडवेज विभाग
बिना छत का महिला शौचालय
बस स्टैंड परिसर में कुल दो महिला शौचालय हैं। इसमें एक अस्थायी है। स्थायी शौचालय परिसर के भीतर बना है जबकि अस्थायी बाहर की तरफ है। सन् 1970 में निर्मित 46 साल पुराना स्थायी शौचालय अब कंडम अवस्था में है। अस्थायी शौचालय की छत नहीं है। ऐसे में महिला सवारियां इन शौचालयों में जाने से भी कतराती हैं। बस स्टैंड के भीतर वाले शौचालय में कई मीटर दूर तक भारी दुर्गंध आती है। अस्थायी शौचालय के पास पुरुष यूरिनल सटा है, इससे महिलाओं को इस तरफ जाने में हिचकिचाहट होती है।
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बिना परदे का प्रसाधन
इसी अस्थाई महिला-पुरुष शौचालय के पास पुरुष शौचालय बना हुआ है। यह शौचालय बिना परदे और पानी वाला है। इसे न तो पुरुष इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही महिलाएं।
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शौचालयों की नहीं होती सफाई
सफाई कर्मचारियों की कमी और विभाग की अनदेखी के चलते परिसर में बने शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है। रेवाड़ी डिपो में सफाई कर्मचारियों के कुल 25 पद स्वीकृत हैं। इसमें से पांच पद रिक्त हैं। वहीं बसस्टैंड परिसर में केवल 10 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। 10-12 हजार यात्रियों की आवाजाही वाले बसस्टैंड की पूरी सफाई का जिम्मा 10 कर्मचारियों पर है जबकि भीड़ के हिसाब से अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की जरूरत है।
टंकियां की नहीं होती सफाई
बस स्टैंड परिसर में दो बड़ी पानी की टंकियां बनी हुई हैं। इन टंकियों की विभाग की तरफ से साफ-सफाई और क्लोरिनेशन भी नहीं करवाया जाता है। यात्रियों का कहना है कि सफाई के अभाव में बदबू आती है। यात्रियों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। कुछ यात्री खरीदकर भी पानी पीते हैं।
बसस्टैंड परिसर में शौचालय की साफ-सफाई को लेकर विभाग काफी संजीदा है। नियमित रूप से साफ-सफाई होती है। वहीं बसस्टैंड परिसर में एक और नए महिला शौचालय का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - राजीव नागपाल, महाप्रबंधक, रोडवेज विभाग