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बड़ा सवाल: आखिर कैप्टन क्यों छोड़ रहे खून में बसी कांग्रेस!
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:37 AM IST
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पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव
- फोटो : amar ujala
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लगातार छह बार कांग्रेस पार्टी से चुनाव लडने और जीतने वाले, खुद को पक्का कांग्रेसी कहने वाले कैप्टन अजय सिंह यादव ने शुक्रवार सुबह ट्विटर और कुछ देर बाद जब फेसबुक पर कांग्रेस छोडने का ऐलान किया तो एक बार सभी भौंचक्के रह गए। कुछ राजनीतिज्ञ इसे सीएम खट्टर से कैप्टन अजय की करीब एक महीने पहले हुई मुलाकात से जोड़कर देख रहे हैं, कुछ हुड्डा से लगातार चल रही मुखालफत तो कुछ इसे महज पॉलिटिकल स्टंट बता रहे हैं। कैप्टन के पिता राव अभय सिंह भी जहां इंडियन नेशनल कांग्रेस से विधायक रहे थे। वहीं कैप्टन अजय भी लगातार 6 बार इसी पार्टी की टिकट पर रेवाड़ी विधानसभा से चुनाव जीते थे। देश के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी को अपना गुरु कहने वाले कैप्टन अजय यादव की गांधी परिवार से तथाकथित निकटता थी। भले ही प्रदेश के कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी कैप्टन अजय को मनाने की बात कह रहे हों लेकिन अनुशासनसहीनता के चलते नए प्रदेश प्रभारी कमलनाथ से मिली फटकार और पार्टी में हल्कापन को कारण बताते हुए पार्टी छोडने के ऐलान ने लोगों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि आखिर मरते दम तक कांग्रेस में रहने की बात करने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी को यह फैसला क्यों लेना पड़ा।
-कैप्टन हटे, तो हुड्डा का अहीरवाल में होगा सीधा दखल
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कैप्टन अजय यादव से हमेशा से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। वहीं भूपेंद्र हुड्डा भी जानते हैं कि दक्षिणी हरियाणा में एक कैप्टन ही उनकी खुलकर मुखालफत करते रहे हैं। ऐसे में कैप्टन अगर कांग्रेस पार्टी छोड़ते हैं तो सीधे तौर पर हुड्डा का दक्षिणी हरियाणा में सीधा दखल होगा। महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली, बावल, बादशाहपुर, गुडग़ांव, मेवात, कोसली समेत आसपास की विधानसभाओं में कांग्रेस के विधायक रहे नेता हुड्डा के ही कट्टर समर्थक हैं।
रेवाड़ी विधायक बोले: पलटूराम हैं कैप्टन
कैप्टन के कांग्रेस छोडने के ऐलान पर रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने उन्हें पलटूराम करार दिया है। विधायक कहते हैं कि कैप्टन कई बार अपनी बात से मुकर चुके हैं। कुछ दिनों में ही कहेंगे कि आलाकमान ने मना लिया और वे उनकी बात काट नहीं सके। भूपेंद्र हुड्डा से मंत्रालय बदलने की बात कैप्टन अजय यादव ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही मंत्रीपद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। दो-तीन दिन में मामला शांत हुआ। इसके अलावा भी राव इंद्रजीत और हुड्डा के खिलाफ एक-एक कर कई बार विरोध दर्ज कराने वाले कैप्टन अपनी बात से पलट चुके हैं।
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-कांग्रेस छोड़ी, तो भाजपा में क्या भविष्य है कैप्टन का!
एक और बड़ा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस कैप्टन अजय को मनाने में कामयाब नहीं होती है तो कैप्टन जाएंगे कहां। हालांकि भाजपा के मंत्री ओपी धनखड़ ने झज्जर के एक कार्यक्रम के दौरान देशहित को ऊपर मानने वालों का पार्टी में स्वागत करने की बात कहते हुए अनकहा आमंत्रण तो दे ही दिया है। लेकिन सवाल यह है कि आगामी चुनाव के तीन साल बचे हैं और हाल में ही पार्टी ने अपने कई महत्वपूर्ण पद भी बांट दिये हैं। ऐसे में कैप्टन जैसे वरिष्ठ नेता को पार्टी किस रूप में अपनाएगी। हालांकि कैप्टन ने अभी किसी पार्टी को ज्वाइन करने के संकेत नहीं दिये हैं।
-बेटे चिरंजीव के राजनीतिक करियर के लिए होगा खतरनाक
कुछ समय पहले कांग्रेस से ही सीएम की दावेदारी और बेटे चिरंजीव को विधायक के लिए तैयार कराने का ऐलान करने वाले कैप्टन के बेटे राव चिरंजीव यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की तैयारी में लगे हैं। लेकिन अगर कैप्टन पार्टी छोड़ते हैं तो निश्चित ही राव चिरंजीव के पार्टी में राजनीतिक करियर पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा के होते हुए राव चिरंजीव की राह आसान नहीं होगी।
हुड्डा गुट कांग्रेसी बोले: कैप्टन का पॉलिटिकल स्टंट
इस मसले पर हुड्डा गुट के रेवाड़ी के वरिष्ठ कांग्रेसियों से बात की गई तो उन्होंने कैप्टन के पार्टी छोडने के ऐलान को केवल पॉलिटिकल स्टंट बताया। वरिष्ठ कांग्रेसियों का कहना है कि कैप्टन महज पार्टी पर दबाव बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, अगर पार्टी छोडनी होती तो छोड़ देते। उधर जिले में पार्टी की कार्यकारिणी भंग होने के चलते पूर्व मंत्री चौ.जसवंत सिंह से बात कही तो उन्होंने औपचारिक घोषणा से पहले कुछ भी कहने से मना कर दिया।
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-कैप्टन हटे, तो हुड्डा का अहीरवाल में होगा सीधा दखल
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कैप्टन अजय यादव से हमेशा से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। वहीं भूपेंद्र हुड्डा भी जानते हैं कि दक्षिणी हरियाणा में एक कैप्टन ही उनकी खुलकर मुखालफत करते रहे हैं। ऐसे में कैप्टन अगर कांग्रेस पार्टी छोड़ते हैं तो सीधे तौर पर हुड्डा का दक्षिणी हरियाणा में सीधा दखल होगा। महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली, बावल, बादशाहपुर, गुडग़ांव, मेवात, कोसली समेत आसपास की विधानसभाओं में कांग्रेस के विधायक रहे नेता हुड्डा के ही कट्टर समर्थक हैं।
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रेवाड़ी विधायक बोले: पलटूराम हैं कैप्टन
कैप्टन के कांग्रेस छोडने के ऐलान पर रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने उन्हें पलटूराम करार दिया है। विधायक कहते हैं कि कैप्टन कई बार अपनी बात से मुकर चुके हैं। कुछ दिनों में ही कहेंगे कि आलाकमान ने मना लिया और वे उनकी बात काट नहीं सके। भूपेंद्र हुड्डा से मंत्रालय बदलने की बात कैप्टन अजय यादव ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही मंत्रीपद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। दो-तीन दिन में मामला शांत हुआ। इसके अलावा भी राव इंद्रजीत और हुड्डा के खिलाफ एक-एक कर कई बार विरोध दर्ज कराने वाले कैप्टन अपनी बात से पलट चुके हैं।
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-कांग्रेस छोड़ी, तो भाजपा में क्या भविष्य है कैप्टन का!
एक और बड़ा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस कैप्टन अजय को मनाने में कामयाब नहीं होती है तो कैप्टन जाएंगे कहां। हालांकि भाजपा के मंत्री ओपी धनखड़ ने झज्जर के एक कार्यक्रम के दौरान देशहित को ऊपर मानने वालों का पार्टी में स्वागत करने की बात कहते हुए अनकहा आमंत्रण तो दे ही दिया है। लेकिन सवाल यह है कि आगामी चुनाव के तीन साल बचे हैं और हाल में ही पार्टी ने अपने कई महत्वपूर्ण पद भी बांट दिये हैं। ऐसे में कैप्टन जैसे वरिष्ठ नेता को पार्टी किस रूप में अपनाएगी। हालांकि कैप्टन ने अभी किसी पार्टी को ज्वाइन करने के संकेत नहीं दिये हैं।
-बेटे चिरंजीव के राजनीतिक करियर के लिए होगा खतरनाक
कुछ समय पहले कांग्रेस से ही सीएम की दावेदारी और बेटे चिरंजीव को विधायक के लिए तैयार कराने का ऐलान करने वाले कैप्टन के बेटे राव चिरंजीव यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की तैयारी में लगे हैं। लेकिन अगर कैप्टन पार्टी छोड़ते हैं तो निश्चित ही राव चिरंजीव के पार्टी में राजनीतिक करियर पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा के होते हुए राव चिरंजीव की राह आसान नहीं होगी।
हुड्डा गुट कांग्रेसी बोले: कैप्टन का पॉलिटिकल स्टंट
इस मसले पर हुड्डा गुट के रेवाड़ी के वरिष्ठ कांग्रेसियों से बात की गई तो उन्होंने कैप्टन के पार्टी छोडने के ऐलान को केवल पॉलिटिकल स्टंट बताया। वरिष्ठ कांग्रेसियों का कहना है कि कैप्टन महज पार्टी पर दबाव बनाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, अगर पार्टी छोडनी होती तो छोड़ देते। उधर जिले में पार्टी की कार्यकारिणी भंग होने के चलते पूर्व मंत्री चौ.जसवंत सिंह से बात कही तो उन्होंने औपचारिक घोषणा से पहले कुछ भी कहने से मना कर दिया।