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Rewari News: जापानी तकनीक से बनेंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंक, 4.43 करोड़ होंगे खर्च
Fri, 24 Jan 2025 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 24 Jan 2025 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहरवासियों को अब वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से 4.43 करोड़ रुपये की लागत से अधिक जलभराव वाले स्थानों पर जापानी क्रॉस-वेव तकनीक से रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों का निर्माण कराया जाएगा।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों के निर्माण के लिए नगर परिषद ने दो टेंडर जारी किए हैं। नगर परिषद ने एक टेंडर अनाज मंडी व उसके आसपास क्षेत्रों में वर्षा के दिनों में होने वाले जलभराव को रोकने के लिए जारी किया है। यहां पर करीब 2.36 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। दूसरा टेंडर करीब 2.07 करोड़ रुपये का है। इसमें शहर के उन क्षेत्रों को कवर किया जाएगा, जहां पर सबसे अधिक जलभराव होता है। जनवरी में टेंडर जारी होने से उम्मीद है कि मानसून से पहले रिचार्ज टैंकों का निर्माण हो जाएगा। ऐसे में इस बार मानसून से पहले ही नगर परिषद ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ताकि समय से काम शुरू हो जाए और लोगों को इस वर्ष जलभराव के कारण परेशानियों का सामना न करना पड़े। हर वर्ष जिले में जलभराव होने से न सिर्फ लोगों को परेशानी होती है बल्कि प्रशासन को भी जलनिकासी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
क्या है क्रॉस-वेव तकनीक
क्रॉस-वेव तकनीक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अनुरूप है। इसमें शुद्ध वर्षा जल फिल्टर प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसकी कोई रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए बाद में लागत ज्यादा नहीं आएगी। वहीं, रैन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंक के अन्तर्गत वर्षा जल को एक गड्ढे के माध्यम से सीधे भूजल भण्डार में उतार दिया जाता है। इस विधि से बाउंड्रीवाल के साथ-साथ बड़ी-बड़ी नालियां बनाकर पानी को जमीन के भीतर उतारा जाता है। यह पानी जमीन में नीचे चला जाता है और भूजल स्तर में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इससे न केवल टैंक रिचार्ज होता है, बल्कि इससे पानी जमीन के भीतर भी चला जाता है। यह पानी जमीन के अन्दर के भूजल स्तर को ऊपर उठाता है। भूजल भंडार को रिचार्ज करने के अलावा बरसाती पानी को टैंक में जमा करके अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। इस विधि से बरसाती पानी का लम्बे समय तक उपयोग किया जा सकता है।
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नालों की नहीं होती सफाई, इसलिए भी होता है जलभराव
नगर परिषद प्रशासन मानसून सीजन में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास करता है, इसके बाद भी इससे स्थायी रूप से निजात नहीं मिल पाती है। नगर परिषद ने जुलाई 2024 में मुख्य सर्कुलर रोड, दिल्ली रोड, अग्रसेन चौक से भाड़ावास गेट और पंजाबी पोटरी नाले की सफाई के लिए 36.79 लाख रुपये का टेंडर लगाया था। जब इन नालों की सफाई व्यवस्था को लेकर पड़ताल की गई तो पता चला कि कई नालों की तो कनेक्टिविटी भी नहीं है। नाले जगह-जगह से टूटे पड़े हैं। अग्रसेन चौक से भाड़ावास गेट तक नाला गंदगी से अटा पड़ा है। सर्कुलर रोड पर बना नाला जगह-जगह से टूटा हुआ है। दिल्ली रोड स्थित नाले की स्थिति बदहाल है। ऐसे में नालों की मरम्मत की जरूरत है।
ये क्षेत्र होते हैं सबसे अधिक प्रभावित
शहर के कुछ इलाकों में सबसे अधिक जलभराव होता है। इनमें रेलवे अंडरपास, सर्कुलर रोड, नाई वाली चौक, भाड़ावास मार्ग, शहर के विभिन्न बाजार, बस अड्डा, पुराना हाउसिंग बोर्ड, ब्रास मार्केट, माडल टाउन, रेलवे अंडरपास, विभिन्न सेक्टर्स, सब्जी मंडी, नई अनाज मंडी कुतुबपुर, गुलाबी बाग क्षेत्र शामिल है। यहां जलभराव अधिक होने के कारण आसपास रिचार्ज टैंक की जरूरत है।
वर्जन
शहर में 20 से अधिक क्षेत्रों में बारिश के मौसम में सबसे अधिक जलभराव देखने को मिलता है। लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों का निर्माण किया जाएगा। इसका टेंडर जारी किया गया है।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। शहरवासियों को अब वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से 4.43 करोड़ रुपये की लागत से अधिक जलभराव वाले स्थानों पर जापानी क्रॉस-वेव तकनीक से रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों का निर्माण कराया जाएगा।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों के निर्माण के लिए नगर परिषद ने दो टेंडर जारी किए हैं। नगर परिषद ने एक टेंडर अनाज मंडी व उसके आसपास क्षेत्रों में वर्षा के दिनों में होने वाले जलभराव को रोकने के लिए जारी किया है। यहां पर करीब 2.36 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। दूसरा टेंडर करीब 2.07 करोड़ रुपये का है। इसमें शहर के उन क्षेत्रों को कवर किया जाएगा, जहां पर सबसे अधिक जलभराव होता है। जनवरी में टेंडर जारी होने से उम्मीद है कि मानसून से पहले रिचार्ज टैंकों का निर्माण हो जाएगा। ऐसे में इस बार मानसून से पहले ही नगर परिषद ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ताकि समय से काम शुरू हो जाए और लोगों को इस वर्ष जलभराव के कारण परेशानियों का सामना न करना पड़े। हर वर्ष जिले में जलभराव होने से न सिर्फ लोगों को परेशानी होती है बल्कि प्रशासन को भी जलनिकासी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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क्या है क्रॉस-वेव तकनीक
क्रॉस-वेव तकनीक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अनुरूप है। इसमें शुद्ध वर्षा जल फिल्टर प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसकी कोई रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए बाद में लागत ज्यादा नहीं आएगी। वहीं, रैन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंक के अन्तर्गत वर्षा जल को एक गड्ढे के माध्यम से सीधे भूजल भण्डार में उतार दिया जाता है। इस विधि से बाउंड्रीवाल के साथ-साथ बड़ी-बड़ी नालियां बनाकर पानी को जमीन के भीतर उतारा जाता है। यह पानी जमीन में नीचे चला जाता है और भूजल स्तर में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इससे न केवल टैंक रिचार्ज होता है, बल्कि इससे पानी जमीन के भीतर भी चला जाता है। यह पानी जमीन के अन्दर के भूजल स्तर को ऊपर उठाता है। भूजल भंडार को रिचार्ज करने के अलावा बरसाती पानी को टैंक में जमा करके अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। इस विधि से बरसाती पानी का लम्बे समय तक उपयोग किया जा सकता है।
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नालों की नहीं होती सफाई, इसलिए भी होता है जलभराव
नगर परिषद प्रशासन मानसून सीजन में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास करता है, इसके बाद भी इससे स्थायी रूप से निजात नहीं मिल पाती है। नगर परिषद ने जुलाई 2024 में मुख्य सर्कुलर रोड, दिल्ली रोड, अग्रसेन चौक से भाड़ावास गेट और पंजाबी पोटरी नाले की सफाई के लिए 36.79 लाख रुपये का टेंडर लगाया था। जब इन नालों की सफाई व्यवस्था को लेकर पड़ताल की गई तो पता चला कि कई नालों की तो कनेक्टिविटी भी नहीं है। नाले जगह-जगह से टूटे पड़े हैं। अग्रसेन चौक से भाड़ावास गेट तक नाला गंदगी से अटा पड़ा है। सर्कुलर रोड पर बना नाला जगह-जगह से टूटा हुआ है। दिल्ली रोड स्थित नाले की स्थिति बदहाल है। ऐसे में नालों की मरम्मत की जरूरत है।
ये क्षेत्र होते हैं सबसे अधिक प्रभावित
शहर के कुछ इलाकों में सबसे अधिक जलभराव होता है। इनमें रेलवे अंडरपास, सर्कुलर रोड, नाई वाली चौक, भाड़ावास मार्ग, शहर के विभिन्न बाजार, बस अड्डा, पुराना हाउसिंग बोर्ड, ब्रास मार्केट, माडल टाउन, रेलवे अंडरपास, विभिन्न सेक्टर्स, सब्जी मंडी, नई अनाज मंडी कुतुबपुर, गुलाबी बाग क्षेत्र शामिल है। यहां जलभराव अधिक होने के कारण आसपास रिचार्ज टैंक की जरूरत है।
वर्जन
शहर में 20 से अधिक क्षेत्रों में बारिश के मौसम में सबसे अधिक जलभराव देखने को मिलता है। लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज टैंकों का निर्माण किया जाएगा। इसका टेंडर जारी किया गया है।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।