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Rewari News: रेलवे के सिग्नल कर्मचारियों को मिले टैबलेट, डिजिटल सिस्टम से होगा रखरखाव
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रेवाड़ी। सिग्नल कर्मचारियों को हैंड-हेल्ड टैबलेट उपकरण वितरित करते रेलवे अधिकारी। स्रोत: प्रवक
रेवाड़ी। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में सिग्नल विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सिग्नल मेंटेनेंस एंड मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएमएस) के तहत सिग्नल कर्मचारियों को हैंड-हेल्ड टैबलेट उपकरण वितरित किए गए हैं।
इस नई व्यवस्था का लाभ रेवाड़ी जंक्शन सहित मंडल के अन्य स्टेशनों पर भी मिलेगा। इससे सिग्नलिंग परिसंपत्तियों के रख-रखाव, निरीक्षण और प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पूजा मित्तल ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने सिग्नल कर्मचारियों को टैबलेट प्रदान किए। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशफाक हुसैन अंसारी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर ललित कुमार सहित अन्य अधिकारी और पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहे।
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ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही का डिजिटल तरीके से होगा काम
मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने बताया कि सिग्नलिंग व्यवस्था ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बहुत जरूरी होती है। पहले सिग्नल से जुड़े रख-रखाव और जांच का रिकॉर्ड कागजों में रखा जाता था। अब कर्मचारियों को दिए गए टैबलेट के जरिए यह सारा काम डिजिटल तरीके से किया जाएगा। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी सिग्नल, ट्रैक और अन्य उपकरणों की जांच के बाद उसकी जानकारी सीधे टैबलेट में दर्ज कर सकेंगे। इससे अधिकारियों को भी तुरंत जानकारी मिल जाएगी और जरूरत पड़ने पर जल्दी कार्रवाई की जा सकेगी।
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टैबलेट आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस
रेलवे की ओर से दिए गए टैबलेट आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस हैं। इनमें आवश्यक एप्लिकेशन के साथ वाई-फाई और 5जी कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। नेटवर्क उपलब्ध होने पर सिग्नल कर्मचारी फील्ड से ही सिग्नलिंग परिसंपत्तियों से संबंधित डेटा रियल-टाइम में अपडेट कर सकेंगे। इससे किसी भी तकनीकी समस्या या रख-रखाव कार्य की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।
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वर्जन
इस डिजिटल प्रणाली से सिग्नलिंग उपकरणों के निरीक्षण और रख-रखाव की प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। इससे भविष्य में मेंटेनेंस की बेहतर योजना बनाने और संभावित तकनीकी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने में भी मदद मिलेगी। -ललित कुमार, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर, जयपुर मंडल
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इस नई व्यवस्था का लाभ रेवाड़ी जंक्शन सहित मंडल के अन्य स्टेशनों पर भी मिलेगा। इससे सिग्नलिंग परिसंपत्तियों के रख-रखाव, निरीक्षण और प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।
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वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पूजा मित्तल ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने सिग्नल कर्मचारियों को टैबलेट प्रदान किए। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशफाक हुसैन अंसारी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर ललित कुमार सहित अन्य अधिकारी और पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहे।
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ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही का डिजिटल तरीके से होगा काम
मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने बताया कि सिग्नलिंग व्यवस्था ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बहुत जरूरी होती है। पहले सिग्नल से जुड़े रख-रखाव और जांच का रिकॉर्ड कागजों में रखा जाता था। अब कर्मचारियों को दिए गए टैबलेट के जरिए यह सारा काम डिजिटल तरीके से किया जाएगा। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी सिग्नल, ट्रैक और अन्य उपकरणों की जांच के बाद उसकी जानकारी सीधे टैबलेट में दर्ज कर सकेंगे। इससे अधिकारियों को भी तुरंत जानकारी मिल जाएगी और जरूरत पड़ने पर जल्दी कार्रवाई की जा सकेगी।
टैबलेट आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस
रेलवे की ओर से दिए गए टैबलेट आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस हैं। इनमें आवश्यक एप्लिकेशन के साथ वाई-फाई और 5जी कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। नेटवर्क उपलब्ध होने पर सिग्नल कर्मचारी फील्ड से ही सिग्नलिंग परिसंपत्तियों से संबंधित डेटा रियल-टाइम में अपडेट कर सकेंगे। इससे किसी भी तकनीकी समस्या या रख-रखाव कार्य की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।
वर्जन
इस डिजिटल प्रणाली से सिग्नलिंग उपकरणों के निरीक्षण और रख-रखाव की प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। इससे भविष्य में मेंटेनेंस की बेहतर योजना बनाने और संभावित तकनीकी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने में भी मदद मिलेगी। -ललित कुमार, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर, जयपुर मंडल