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Rewari News: राई ब्लॉक को मिला जिला विकास योजना का दर्जा
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सोनीपत। प्रदेश सरकार ने राज्य में विकास को गति देने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए सोनीपत के राई ब्लॉक को जिला विकास योजना में शामिल कर लिया है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल की तर्ज पर अब राई क्षेत्र के लिए भी जिला स्तर पर विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
इससे एनसीआर से सटे तेजी से उभरते क्षेत्र को पहली बार साझा विकास दृष्टि, कानूनी मजबूती और संस्थागत निगरानी के साथ आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
नगर एवं ग्राम योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की तरफ से जारी निर्देशों के अनुसार जिला विकास योजनाओं के निर्माण और अनुमोदन की जिम्मेदारी जिला योजना समिति (डीपीसी) तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग को सौंपी गई है।
पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग नोडल एजेंसी था लेकिन जिला स्तर पर स्पष्ट वैधानिक ढांचा न होने के कारण राई जैसे क्षेत्रों में विकास बिखरा और असंतुलित रहा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि डीपीसी के माध्यम से तैयार की जाने वाली योजना राई को एक संगठित शहरी-औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित कर सकती है जहां उद्योग, आवास, परिवहन और सामाजिक बुनियादी ढांचा एक-दूसरे से तालमेल में हों।
विकास की रफ्तार तेज, सुविधाएं पीछे छूटीं
दिल्ली से सटा राई ब्लॉक एनएच-44, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे और बड़े औद्योगिक क्षेत्रों के चलते निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक कंपनियों के साथ-साथ रिहायशी परियोजनाओं में भी तेजी आई, लेकिन उसी अनुपात में सडक़, सीवरेज, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्रों का विकास नहीं हो सका। परिणाम ट्रैफिक जाम, जलभराव, अवैध कॉलोनियों और नागरिक असुविधाओं के रूप में सामने आया।
योजनाओं को मिलेगी कानूनी ताकत
नए निर्देशों के तहत ड्राफ्ट जिला विकास योजनाओं को जिला या महानगर योजना समिति से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग को इन योजनाओं को अधिसूचित करने का वैधानिक अधिकार दिया गया है। इससे अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
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इससे एनसीआर से सटे तेजी से उभरते क्षेत्र को पहली बार साझा विकास दृष्टि, कानूनी मजबूती और संस्थागत निगरानी के साथ आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
नगर एवं ग्राम योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की तरफ से जारी निर्देशों के अनुसार जिला विकास योजनाओं के निर्माण और अनुमोदन की जिम्मेदारी जिला योजना समिति (डीपीसी) तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग को सौंपी गई है।
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पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग नोडल एजेंसी था लेकिन जिला स्तर पर स्पष्ट वैधानिक ढांचा न होने के कारण राई जैसे क्षेत्रों में विकास बिखरा और असंतुलित रहा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि डीपीसी के माध्यम से तैयार की जाने वाली योजना राई को एक संगठित शहरी-औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित कर सकती है जहां उद्योग, आवास, परिवहन और सामाजिक बुनियादी ढांचा एक-दूसरे से तालमेल में हों।
विकास की रफ्तार तेज, सुविधाएं पीछे छूटीं
दिल्ली से सटा राई ब्लॉक एनएच-44, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे और बड़े औद्योगिक क्षेत्रों के चलते निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक कंपनियों के साथ-साथ रिहायशी परियोजनाओं में भी तेजी आई, लेकिन उसी अनुपात में सडक़, सीवरेज, जल निकासी, सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्रों का विकास नहीं हो सका। परिणाम ट्रैफिक जाम, जलभराव, अवैध कॉलोनियों और नागरिक असुविधाओं के रूप में सामने आया।
योजनाओं को मिलेगी कानूनी ताकत
नए निर्देशों के तहत ड्राफ्ट जिला विकास योजनाओं को जिला या महानगर योजना समिति से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग को इन योजनाओं को अधिसूचित करने का वैधानिक अधिकार दिया गया है। इससे अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।