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Rewari News: फिर से बढ़ने लगा प्रदूषण का प्रकोप, रेड जोन में पहुंचा जिला

Tue, 11 Nov 2025 12:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 11 Nov 2025 12:35 AM IST
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Pollution rises again, district enters red zone
दोपहर के समय छाया प्रदूषण। संवाद - फोटो : chineni news
रेवाड़ी। करीब एक सप्ताह तक प्रदूषण से राहत मिलने के बाद जिले का प्रदूषण स्तर एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 306 दर्ज किया गया, जो रेड जोन (बहुत खराब श्रेणी) में आता है। पिछले सप्ताह तक वायु गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा था और एक्यूआई 200 के नीचे बना हुआ था।
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स्थानीय लोगों को लगा था कि अब प्रदूषण का असर कम होगा, लेकिन रविवार को ही स्थिति बिगड़नी शुरू हो गई थी, जब एक्यूआई 256 तक पहुंच गया था। सोमवार को यह स्तर और खतरनाक हो गया। सुबह-शाम धूल और धुएं की मोटी परत छाई रही। धुंध के साथ जब प्रदूषण मिला तो दृश्यता भी काफी कम हो गई।
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मुख्य सड़कों, खासकर, सर्कुलर रोड, दिल्ली रोड, धारूहेड़ा और बावल क्षेत्र में प्रदूषण का असर ज्यादा दिखा। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक हवा की गति धीमी रहने की संभावना है। इसके चलते प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन ने नगर परिषद और औद्योगिक इकाइयों को पानी का छिड़काव बढ़ाने, सड़कों की सफाई और निर्माण स्थलों पर ढकाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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अभी तक अधिकतम एक्यूआई 434 किया जा चुका दर्ज

इस सीजन का प्रदूषण सबसे खतरनाक स्तर 2 नवंबर को 434 दर्ज किया गया। इससे पहले दीपावली पर प्रदूषण का स्तर 412 व 31 अक्तूबर को 406 पहुंचा था। अगर एक्यूआई रेड जोन में रहा तो आने वाले दिनों में ग्रैप 4 की पांबदी लग सकती हैं।

अभी ग्रैप का दूसरा चरण है लागू

19 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांसिबल एक्शन प्लान के चरण 2 को लागू किया था। अगर एक्यूआई 201 से 300 के बीच है तो हवा खराब मानी जाती है। इसमें ग्रैप का पहला स्टेज लागू होता है। 301 से 400 के बीच एक्यूआई होने पर हवा बहुत खराब होती है और ग्रैप का दूसरा स्टेज लागू किया जाता है। जब एक्यूआई 401 से 450 के बीच होता है तो हवा गंभीर श्रेणी में आती है और ग्रैप का तीसरा स्टेज लागू होता है। अगर एक्यूआई 450 से ऊपर चला जाए तो हवा बेहद गंभीर मानी जाती है और ग्रैप का चौथा स्टेज लागू होता है। प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ ग्रैप के नियम भी सख्त होते जाते हैं।



केवल मौसम पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल मौसम पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। शहर में धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी और वाहनों के धुएं को कम करने के ठोस प्रयास करने होंगे। आने वाले दिनों में यदि तापमान में और गिरावट हुई और हवा की गति धीमी पड़ी तो एक्यूआई फिर से बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को सजग रहने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की जरूरत है।
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