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Rewari News: पिस्टल चलने लायक थी या नहीं, साबित नहीं कर सकी पुलिस, आरोपी हुआ बरी
Sun, 11 Oct 2026 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। अवैध हथियार रखने के सात साल पुराने मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने सरस्वती विहार निवासी नवीन उर्फ फुल्ला को बरी कर दिया है। पुलिस ने पिस्तौल और दो कारतूस के साथ आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया था।अभियोजन पक्ष यह नहीं साबित कर सका कि हथियार चलने लायक था या नहीं। अदालत ने हथियार की जांच करने वाले गवाह की विशेषज्ञता के प्रमाण और जांच रिपोर्ट में आवश्यक विवरण की कमी को महत्वपूर्ण माना।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 26 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने नवीन उर्फ फुल्ला सांघी को बास मोहल्ले में पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसकी पैंट की दाईं जेब से देसी पिस्तौल बरामद होने और पिस्तौल से दो कारतूस मिलने का दावा किया गया।
आरोपी हथियार रखने का लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके बाद सिटी थाना पुलिस ने शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। इनमें बरामदगी में शामिल पुलिसकर्मी, जांच अधिकारी और हथियार की तकनीकी जांच करने वाला गवाह शामिल था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि बरामदगी के समय किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया और हथियार के चलने योग्य होने तथा कारतूसों के जीवित होने का ठोस प्रमाण भी पेश नहीं किया गया।
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रेवाड़ी। अवैध हथियार रखने के सात साल पुराने मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने सरस्वती विहार निवासी नवीन उर्फ फुल्ला को बरी कर दिया है। पुलिस ने पिस्तौल और दो कारतूस के साथ आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया था।अभियोजन पक्ष यह नहीं साबित कर सका कि हथियार चलने लायक था या नहीं। अदालत ने हथियार की जांच करने वाले गवाह की विशेषज्ञता के प्रमाण और जांच रिपोर्ट में आवश्यक विवरण की कमी को महत्वपूर्ण माना।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 26 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने नवीन उर्फ फुल्ला सांघी को बास मोहल्ले में पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसकी पैंट की दाईं जेब से देसी पिस्तौल बरामद होने और पिस्तौल से दो कारतूस मिलने का दावा किया गया।
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आरोपी हथियार रखने का लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके बाद सिटी थाना पुलिस ने शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। इनमें बरामदगी में शामिल पुलिसकर्मी, जांच अधिकारी और हथियार की तकनीकी जांच करने वाला गवाह शामिल था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि बरामदगी के समय किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया और हथियार के चलने योग्य होने तथा कारतूसों के जीवित होने का ठोस प्रमाण भी पेश नहीं किया गया।