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Rewari News: सिंथेटिक ट्रैक बनने से खिलाड़ियों को मिलेगी राहत
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फोटो: 08रेवाड़ी। राव तुलाराम स्टेडियम में निर्माणाधीन सिंथेटिक ट्रैक। संवाद
रेवाड़ी। शहर के राव तुलाराम स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण जारी है। आठ लेन के 400 मीटर के ट्रैक बनाए जाएंगे। ट्रैक के निर्माण, समतलीकरण, ड्रेसिंग, रेलिंग पर 9 करोड़ 69 लाख 76 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनने पर यहां जिले से लेकर नेशनल स्तर की खेल प्रतियोगिताएं कराई जा सकेंगी। जिले के अलावा महेंद्रगढ़ के खिलाड़ी भी यहां आकर अभ्यास कर सकेंगे। जिले के खिलाड़ियों को गुरुग्राम या अन्य जगह अभ्यास करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सिंथेटिक ट्रैक बनने से बड़े खिलाड़ी तैयार होंगे। अभी स्टेडियम में सेंडर ट्रैक बना है।
इस पर दौड़ने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, गोला फेंक, भाला फेंक सहित 100 मीटर से लेकर 10 हजार मीटर तक दौड़ प्रतियोगिता होगी।
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सिंथेटिक ट्रैक एक खास तरह के रबर को कुसिंग करके बनाया जाता है। ट्रैक बनाने के लिए पहले मिट्टी और रोड़ी की कई परतें बिछाई जाती हैं। इसके बाद समतलीकरण कर सड़क बनाने का काम किया जाता है और फिर ट्रैक के चारों ओर रेलिंग लगाई जाती है।
इसके बाद प्लास्टिक की घास बिछाई जाती है और ट्रैक तैयार होता है। स्टेडियम में ट्रैक 8 लेन का होगा। एक लेन की चौड़ाई 1.22 से 1.25 मीटर तक होगी।
13 जिलों में बनाए गए हैं सिंथेटिक ट्रैक
अभी राज्य के 13 जिलों में धावकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक ट्रैक बनाया गया है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद का नरवाना शामिल हैं।
वर्जन
राव तुलाराम स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक के निर्माण कार्य जारी है। इसके बनने से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, दूसरे जिलों में भी जाना पड़ेगा।
-ममता, कार्यकारी डीएसओ रेवाड़ी।
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स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनने पर यहां जिले से लेकर नेशनल स्तर की खेल प्रतियोगिताएं कराई जा सकेंगी। जिले के अलावा महेंद्रगढ़ के खिलाड़ी भी यहां आकर अभ्यास कर सकेंगे। जिले के खिलाड़ियों को गुरुग्राम या अन्य जगह अभ्यास करने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सिंथेटिक ट्रैक बनने से बड़े खिलाड़ी तैयार होंगे। अभी स्टेडियम में सेंडर ट्रैक बना है।
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इस पर दौड़ने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, गोला फेंक, भाला फेंक सहित 100 मीटर से लेकर 10 हजार मीटर तक दौड़ प्रतियोगिता होगी।
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सिंथेटिक ट्रैक एक खास तरह के रबर को कुसिंग करके बनाया जाता है। ट्रैक बनाने के लिए पहले मिट्टी और रोड़ी की कई परतें बिछाई जाती हैं। इसके बाद समतलीकरण कर सड़क बनाने का काम किया जाता है और फिर ट्रैक के चारों ओर रेलिंग लगाई जाती है।
इसके बाद प्लास्टिक की घास बिछाई जाती है और ट्रैक तैयार होता है। स्टेडियम में ट्रैक 8 लेन का होगा। एक लेन की चौड़ाई 1.22 से 1.25 मीटर तक होगी।
13 जिलों में बनाए गए हैं सिंथेटिक ट्रैक
अभी राज्य के 13 जिलों में धावकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक ट्रैक बनाया गया है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, अंबाला, सोनीपत, पानीपत, भिवानी, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार और जींद का नरवाना शामिल हैं।
वर्जन
राव तुलाराम स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक के निर्माण कार्य जारी है। इसके बनने से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, दूसरे जिलों में भी जाना पड़ेगा।
-ममता, कार्यकारी डीएसओ रेवाड़ी।