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Rewari News: नाहड़, रेवाड़ी और बावल में लगेंगी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट, 48 लाख से अधिक होंगे खर्च
Fri, 02 Jan 2026 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:26 AM IST
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रेवाड़ी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक और अन्य कचरे से मुक्त कराने की दिशा में नए साल पर बड़ी पहल की जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएम-जी) के दूसरे चरण के तहत जिले के तीन ब्लॉक नाहड़, रेवाड़ी और बावल में ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जाएगी। इन तीनों यूनिटों पर कुल 48 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रति यूनिट करीब 16 लाख रुपये की लागत आएगी।
पंचायत राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन यूनिटों का मुख्य उद्देश्य गांवों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को एकत्र करना, उसकी छंटाई करना और फिर रीसाइक्लिंग या अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उसका निस्तारण करना है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था भी मजबूत होगी।
दो माह में पूरी होगी तैयारी : यूनिटों की स्थापना के लिए जगह का चयन, बिजली कनेक्शन और कचरा लाने-ले जाने वाले वाहनों के लिए सुगम रास्ता सुनिश्चित करने का काम विभागीय अधिकारियों की ओर से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया अगले दो महीनों में पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मशीनों की व्यवस्था कर यूनिटों को चालू कर दिया जाएगा ताकि गांवों से आने वाले प्लास्टिक वेस्ट का सही निस्तारण और दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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गांव से ब्लॉक तक पहुंचेगा अलग किया गया कचरा
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक गांव में घरों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े को दो हिस्सों में अलग किया जाएगा। इसमें बायोडिग्रेडेबल (जैविक) और नॉन-बायोडिग्रेडेबल (गैर-जैविक यानी प्लास्टिक) कचरा शामिल होगा। ग्राम पंचायतें इस अलग किए गए प्लास्टिक कचरे को घर-घर से एकत्र कर गांव में बने सामान्य ग्राम शेड (पृथक्करण शेड) तक पहुंचाएंगी। यहां प्रारंभिक छंटाई के बाद जिला और ब्लॉक अधिकारियों के समन्वय से प्लास्टिक को ब्लॉक स्तर पर स्थापित यूनिटों तक भेजा जाएगा।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार, पंचायतों को होगी आय
इन यूनिटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और गैर-सरकारी संगठनों को सौंपी जाएगी। यूनिटों में महिलाएं धूल हटाने वाली मशीन, प्लास्टिक श्रेडर और प्लास्टिक बेलर जैसी मशीनों की मदद से प्लास्टिक को संसाधित करेंगी। यानी उसके टुकड़े किए जाएंगे और गांठें बनाई जाएंगी। संसाधित प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को बेचा जाएगा। जो प्लास्टिक रीसाइकिल नहीं हो सकेगा, उसे सड़क निर्माण या सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों और ग्राम पंचायतों को राजस्व मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं का सशक्तीकरण भी होगा।
खुले में प्लास्टिक जलाने पर लगेगी रोक
इन यूनिटों के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक को खुले में जलाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगेगी। इससे डाइऑक्सिन, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही गांवों में स्वच्छता का स्तर और बेहतर होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद अन्य ब्लॉकों में भी यूनिटें लगेंगी
एडीसी एवं जिला परिषद सीईओ राहुल मोदी ने बताया कि नाहड़, रेवाड़ी और बावल में ये यूनिटें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्थापित की जा रही हैं। मशीनों को लेकर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इनका संचालन संभालेंगी। उन्होंने कहा कि तीनों ब्लॉकों में जमीन तलाशने सहित अन्य कार्यवाही जारी है। नए साल में अगले दो महीनों के भीतर इन्हें शुरू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इन यूनिटों के सफल संचालन के बाद जिले के शेष चार ब्लॉकों में भी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जाएंगी। इससे गांव स्वच्छ होंगे और ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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पंचायत राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन यूनिटों का मुख्य उद्देश्य गांवों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को एकत्र करना, उसकी छंटाई करना और फिर रीसाइक्लिंग या अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उसका निस्तारण करना है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था भी मजबूत होगी।
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दो माह में पूरी होगी तैयारी : यूनिटों की स्थापना के लिए जगह का चयन, बिजली कनेक्शन और कचरा लाने-ले जाने वाले वाहनों के लिए सुगम रास्ता सुनिश्चित करने का काम विभागीय अधिकारियों की ओर से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया अगले दो महीनों में पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मशीनों की व्यवस्था कर यूनिटों को चालू कर दिया जाएगा ताकि गांवों से आने वाले प्लास्टिक वेस्ट का सही निस्तारण और दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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गांव से ब्लॉक तक पहुंचेगा अलग किया गया कचरा
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक गांव में घरों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े को दो हिस्सों में अलग किया जाएगा। इसमें बायोडिग्रेडेबल (जैविक) और नॉन-बायोडिग्रेडेबल (गैर-जैविक यानी प्लास्टिक) कचरा शामिल होगा। ग्राम पंचायतें इस अलग किए गए प्लास्टिक कचरे को घर-घर से एकत्र कर गांव में बने सामान्य ग्राम शेड (पृथक्करण शेड) तक पहुंचाएंगी। यहां प्रारंभिक छंटाई के बाद जिला और ब्लॉक अधिकारियों के समन्वय से प्लास्टिक को ब्लॉक स्तर पर स्थापित यूनिटों तक भेजा जाएगा।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार, पंचायतों को होगी आय
इन यूनिटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और गैर-सरकारी संगठनों को सौंपी जाएगी। यूनिटों में महिलाएं धूल हटाने वाली मशीन, प्लास्टिक श्रेडर और प्लास्टिक बेलर जैसी मशीनों की मदद से प्लास्टिक को संसाधित करेंगी। यानी उसके टुकड़े किए जाएंगे और गांठें बनाई जाएंगी। संसाधित प्लास्टिक को रीसाइक्लिंग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को बेचा जाएगा। जो प्लास्टिक रीसाइकिल नहीं हो सकेगा, उसे सड़क निर्माण या सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों और ग्राम पंचायतों को राजस्व मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं का सशक्तीकरण भी होगा।
खुले में प्लास्टिक जलाने पर लगेगी रोक
इन यूनिटों के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक को खुले में जलाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगेगी। इससे डाइऑक्सिन, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही गांवों में स्वच्छता का स्तर और बेहतर होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद अन्य ब्लॉकों में भी यूनिटें लगेंगी
एडीसी एवं जिला परिषद सीईओ राहुल मोदी ने बताया कि नाहड़, रेवाड़ी और बावल में ये यूनिटें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्थापित की जा रही हैं। मशीनों को लेकर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इनका संचालन संभालेंगी। उन्होंने कहा कि तीनों ब्लॉकों में जमीन तलाशने सहित अन्य कार्यवाही जारी है। नए साल में अगले दो महीनों के भीतर इन्हें शुरू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इन यूनिटों के सफल संचालन के बाद जिले के शेष चार ब्लॉकों में भी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जाएंगी। इससे गांव स्वच्छ होंगे और ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।