{"_id":"6054e1828ebc3e59220c5e7a","slug":"penshion-10th-voter-id-distt-rewari-news-rtk6006986140","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुजुर्ग सम्मान भत्ता में 2005 से पहले का वोटर कार्ड व 10वीं कक्षा की मार्कशीट शर्त बनी रोडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुजुर्ग सम्मान भत्ता में 2005 से पहले का वोटर कार्ड व 10वीं कक्षा की मार्कशीट शर्त बनी रोडा
विज्ञापन
वोट लेने के लिए नेताओं की ओर से अनेक वादे किए जाते हैं, लेकिन जब वादों को पूरा करने का समय आता है तो अनेक शर्तें लगाकर लोगों को वंचित करने का खेल शुरू हो जाता है। ऐसे ही कुछ बुजुर्ग सम्मान भत्ता में सामने आ रहा है। मेडिकल से बुजुर्गों की आयु का निर्धारण करने की प्रक्रिया बंद करने, 2005 से पहले का वोटर कार्ड व 10 वीं कक्षा की मार्कशीट शर्त अब बुजुर्गों की पेंशन में रोड़ा बन रही है। अकेले शहर में इस तरह के तीन हजार से अधिक मामले हैं, ऐसे में जिले की संख्या आसानी से समझी जा सकती है। शुक्रवार को सामाजिक संगठनों से लेकर जन प्रतिनिधियों ने बुढ़ापा पेंशन के लिए बेटी की उम्र 40, 2005 से पहले का बना पैन कार्ड व मेडिकल प्रक्रिया के तहत उम्र के निर्धारण की मांग की है। बता दें कि बुढ़ापा पेंशन के लिए 60 वर्ष की आयु होना जरूरी है। समाज कल्याण विभाग पर मनमानी व समाधान की मांग करने वालों में साकेत धींगड़ा नप उपप्रधान श्याम चुघ, एडवोकेट मोनू राव, पार्षद नीरज, पार्षद सुरेश सैनी, एडवोकेट करण धींगड़ा, संजय गुप्ता, हरिकिशन व अन्य लोग मौजूद रहे।
इन शर्तों को खत्म करने से बढ़ी परेशानी
समाज कल्याण विभाग की ओर से बेटे की उम्र 40 साल होने पर बुजुर्ग को सम्मान भत्ते के योग्य मान लिया जाता था। अब यह नियम खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा 2005 से पहले का पेन कार्ड के तहत 60 साल की उम्र होने पर पेंशन बन जाती थी। लेकिन अब पेन कार्ड को भी नहीं माना जा रहा है। बढ़ती परेशानी को देखते हुए सरकार की ओर से मेडिकल के बाद उम्र निर्धारण का नया नियम बनाया गया था, लेकिन कोरोनाकाल में उसको बंद कर दिया गया। लोगों की माने तो अन्य जिलों में मेडिकल से अभी भी उम्र का निर्धारण किया जा रहा है।
अब पेंशन के लिए जरूरी दस्तावेेज
नई शर्तों के तहत यदि बुजुर्ग को पेंशन लेनी है तो उसके पास कुछ दस्तावेेज जरूरी हैं। यदि किसी ने अपना वोटर कार्ड नहीं बनवाया और उसने पढ़ाई भी नहीं की तो वह बुजुर्ग सम्मान भत्ते से वंचित रह सकता है। क्योंकि नई व्यवस्था के तहत बुजुर्ग के पास 2005 से पहले का वोटर कार्ड, वोटर कार्ड व आधार कार्ड में एक ही नाम होना जरूरी व 10वीं स्कूल का प्रमाण पत्र होने पर ही पेंशन बनाई जा सकती है।
विज्ञापन
लाडली पेंशन में भी फंसा पेच
यदि कोई व्यक्ति केवल बेटियों का पिता है तो 45 की आयु होने पर लाडनी पेंशन देने का प्रावधान है। पेंशन की राशि बुजुर्ग भत्ते जितनी ही मिलती है। 60 वर्ष की आयु पूूरी करने पर समाज कल्याण विभाग की ओर से लाडली पेंशन को बुजुर्ग सम्मान भत्ते में बदल दिया जाता था। वर्ष 2018 में नियम बदलकर मां की आयु 45 की शर्त लगा दी गई। शिकायत के अनुसार वर्ष 2021 में जिनकी उम्र 60 वर्ष हो गई है, उनकी पेंशन बंद कर दी गई है।
दिसंबर तक की लाडली पेंशन मिली, लेकिन इसके बाद बंद कर दी गई। करीब एक हजार लोगों को लाडली पेंशन मिल रही थी। मार्च में पता चला तो अधिकारियों ने कहा कि बढ़ापा पेंशन बनवाओ। अब जो आदमी मार्च में आवेदन करेगा उसको पांच महीने बाद बुढ़ापा पेंशन मिल पाएगी। इससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है। अन्य जिलों में मेडिकल से आयु का निर्धारण हो रहा है तो रेवाड़ी में क्यों नहीं।
साकेत धींगड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता
मेरे वार्ड में भी सैकड़ों लोग बुढ़ापा पेंशन से वंचित हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से चक्कर कटाया जा रहा है। जो लोग स्कूल में नहीं गए, उनको कैसे पेंशन मिल पाएगी। विभाग को इस तरह की शर्तों को हटाकर बुजुर्गों को राहत देने का कार्य करना चाहिए। जब अन्य जिलों में मेडिकल से पेंशन मिल सकती है तो रेवाड़ी में अधिकारियों को क्या परेशानी है।
सुरेश सैनी, पार्षद- वार्ड- 7
एसडीएम को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। बुजुर्गों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा, नियमानुसार बुुजुर्गों की पेंशन बनवाई जाएगी।
यशेंद्र सिंह, डीसी रेवाड़ी।
विज्ञापन
इन शर्तों को खत्म करने से बढ़ी परेशानी
समाज कल्याण विभाग की ओर से बेटे की उम्र 40 साल होने पर बुजुर्ग को सम्मान भत्ते के योग्य मान लिया जाता था। अब यह नियम खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा 2005 से पहले का पेन कार्ड के तहत 60 साल की उम्र होने पर पेंशन बन जाती थी। लेकिन अब पेन कार्ड को भी नहीं माना जा रहा है। बढ़ती परेशानी को देखते हुए सरकार की ओर से मेडिकल के बाद उम्र निर्धारण का नया नियम बनाया गया था, लेकिन कोरोनाकाल में उसको बंद कर दिया गया। लोगों की माने तो अन्य जिलों में मेडिकल से अभी भी उम्र का निर्धारण किया जा रहा है।
विज्ञापन
अब पेंशन के लिए जरूरी दस्तावेेज
नई शर्तों के तहत यदि बुजुर्ग को पेंशन लेनी है तो उसके पास कुछ दस्तावेेज जरूरी हैं। यदि किसी ने अपना वोटर कार्ड नहीं बनवाया और उसने पढ़ाई भी नहीं की तो वह बुजुर्ग सम्मान भत्ते से वंचित रह सकता है। क्योंकि नई व्यवस्था के तहत बुजुर्ग के पास 2005 से पहले का वोटर कार्ड, वोटर कार्ड व आधार कार्ड में एक ही नाम होना जरूरी व 10वीं स्कूल का प्रमाण पत्र होने पर ही पेंशन बनाई जा सकती है।
विज्ञापन
लाडली पेंशन में भी फंसा पेच
यदि कोई व्यक्ति केवल बेटियों का पिता है तो 45 की आयु होने पर लाडनी पेंशन देने का प्रावधान है। पेंशन की राशि बुजुर्ग भत्ते जितनी ही मिलती है। 60 वर्ष की आयु पूूरी करने पर समाज कल्याण विभाग की ओर से लाडली पेंशन को बुजुर्ग सम्मान भत्ते में बदल दिया जाता था। वर्ष 2018 में नियम बदलकर मां की आयु 45 की शर्त लगा दी गई। शिकायत के अनुसार वर्ष 2021 में जिनकी उम्र 60 वर्ष हो गई है, उनकी पेंशन बंद कर दी गई है।
दिसंबर तक की लाडली पेंशन मिली, लेकिन इसके बाद बंद कर दी गई। करीब एक हजार लोगों को लाडली पेंशन मिल रही थी। मार्च में पता चला तो अधिकारियों ने कहा कि बढ़ापा पेंशन बनवाओ। अब जो आदमी मार्च में आवेदन करेगा उसको पांच महीने बाद बुढ़ापा पेंशन मिल पाएगी। इससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है। अन्य जिलों में मेडिकल से आयु का निर्धारण हो रहा है तो रेवाड़ी में क्यों नहीं।
साकेत धींगड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता
मेरे वार्ड में भी सैकड़ों लोग बुढ़ापा पेंशन से वंचित हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से चक्कर कटाया जा रहा है। जो लोग स्कूल में नहीं गए, उनको कैसे पेंशन मिल पाएगी। विभाग को इस तरह की शर्तों को हटाकर बुजुर्गों को राहत देने का कार्य करना चाहिए। जब अन्य जिलों में मेडिकल से पेंशन मिल सकती है तो रेवाड़ी में अधिकारियों को क्या परेशानी है।
सुरेश सैनी, पार्षद- वार्ड- 7
एसडीएम को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। बुजुर्गों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा, नियमानुसार बुुजुर्गों की पेंशन बनवाई जाएगी।
यशेंद्र सिंह, डीसी रेवाड़ी।