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Rewari News: 176974 विद्यार्थियों में से महज 34843 की हुई अपार आईडी जनरेट
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रेवाड़ी। विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करने के लिए विभाग ने बहुत पहले आदेश जारी कर दिए थे, मगर अभी तक इस पर कोई खास अमल नहीं हुआ है। रेवाड़ी के 952 सरकारी और निजी विद्यालयों में पहली से 12वीं तक है। अपार आईडी जनरेट करने में रेवाड़ी व खोल खंड की स्थिति खराब है।
रेवाड़ी खंड 7.2 प्रतिशत अपार आईडी जेनरेट करके बेहद खराब श्रेणी में है। 85331 विद्यार्थियों में से केवल 6157 की ही आईडी जनरेट हो पाई है। वहीं, खोल खंड 22.7 प्रतिशत अपार आईडी जेनरेट करके खराब श्रेणी में है। नाहड़ खंड 40.9 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करके टाप पर बना हुआ है। नाहड़ में 20709 विद्यार्थियों में से 8472 विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट हो चुकी है। वहीं, बावल खंड 31.2 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करके दूसरे स्थान पर है। इसी प्रकार नाहड़ खंड में 30 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट हो चुकी है।
इस वजह से बनाई जा रही अपार आईडी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी को सुव्यवस्थित तरीके से एक जगह पर एकत्रित करने के लिए अपार आइडी बनाने का निर्णय लिया है। इससे एक क्लिक में विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी मिल सके। इसलिए शिक्षा विभाग की तरफ से विद्यार्थियों की विद्यालयों में अपार आईडी बनाई जा रही है, जिसमें विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को दर्ज किया जाएगा। पत्र और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से प्राप्त उपलब्धियों को अपार आईडी में दर्ज होंगे। अपार आइडी बनाने से पहले सभी अभिभावकों से सहमति ली जा रही है। इससे न केवल ड्रापआउट में कमी आएगी, बल्कि विद्यार्थियों की प्रगति को ट्रैक करने में भी मदद मिलगी। विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों की पहचान आसान होगी।
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डिजिटल लाकर से जोड़ा जा रहा
अपार आईडी (आटोमेटिड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) को एबीसी (अकादमिक बैंक आफ क्रेडिट्स) और डिजिटल लाकर से जोड़ा जाएगा। छात्र सुरक्षित रूप से अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज यहां संग्रहित कर सकेंगे। इसको लेकर नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जा रहे हैं। यह 12 अंकों का यूनिक कोड है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को ट्रैक करने में सहायता करेगा और ड्रापआउट छात्रों की संख्या को कम करने में सहायक होगा। इस आईडी के जरिये विद्यार्थी देश के किसी भी हिस्से से आसानी से ट्रैक किए जा सकेंगे। क्योंकि यह एक राष्ट्र, एक छात्र आइडी के रूप में काम करेंगी।
वर्जन:
सभी बीईओ के माध्यम से विद्यालय के मुखियाओं को अपार आईडी जनरेट करने के निर्देश भेजे जा चुके हैं। अपार आईडी जनरेट करना बहुत जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल पहचान मिलेगी।
अजय, प्रोग्रामर, समग्र शिक्षा रेवाड़ी।
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रेवाड़ी खंड 7.2 प्रतिशत अपार आईडी जेनरेट करके बेहद खराब श्रेणी में है। 85331 विद्यार्थियों में से केवल 6157 की ही आईडी जनरेट हो पाई है। वहीं, खोल खंड 22.7 प्रतिशत अपार आईडी जेनरेट करके खराब श्रेणी में है। नाहड़ खंड 40.9 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करके टाप पर बना हुआ है। नाहड़ में 20709 विद्यार्थियों में से 8472 विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट हो चुकी है। वहीं, बावल खंड 31.2 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करके दूसरे स्थान पर है। इसी प्रकार नाहड़ खंड में 30 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट हो चुकी है।
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इस वजह से बनाई जा रही अपार आईडी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी को सुव्यवस्थित तरीके से एक जगह पर एकत्रित करने के लिए अपार आइडी बनाने का निर्णय लिया है। इससे एक क्लिक में विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी मिल सके। इसलिए शिक्षा विभाग की तरफ से विद्यार्थियों की विद्यालयों में अपार आईडी बनाई जा रही है, जिसमें विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को दर्ज किया जाएगा। पत्र और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से प्राप्त उपलब्धियों को अपार आईडी में दर्ज होंगे। अपार आइडी बनाने से पहले सभी अभिभावकों से सहमति ली जा रही है। इससे न केवल ड्रापआउट में कमी आएगी, बल्कि विद्यार्थियों की प्रगति को ट्रैक करने में भी मदद मिलगी। विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों की पहचान आसान होगी।
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डिजिटल लाकर से जोड़ा जा रहा
अपार आईडी (आटोमेटिड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) को एबीसी (अकादमिक बैंक आफ क्रेडिट्स) और डिजिटल लाकर से जोड़ा जाएगा। छात्र सुरक्षित रूप से अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज यहां संग्रहित कर सकेंगे। इसको लेकर नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जा रहे हैं। यह 12 अंकों का यूनिक कोड है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को ट्रैक करने में सहायता करेगा और ड्रापआउट छात्रों की संख्या को कम करने में सहायक होगा। इस आईडी के जरिये विद्यार्थी देश के किसी भी हिस्से से आसानी से ट्रैक किए जा सकेंगे। क्योंकि यह एक राष्ट्र, एक छात्र आइडी के रूप में काम करेंगी।
वर्जन:
सभी बीईओ के माध्यम से विद्यालय के मुखियाओं को अपार आईडी जनरेट करने के निर्देश भेजे जा चुके हैं। अपार आईडी जनरेट करना बहुत जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल पहचान मिलेगी।
अजय, प्रोग्रामर, समग्र शिक्षा रेवाड़ी।