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छह माह में 32 बैंक खातों से ऑनलाइन ठगी, उड़ाए 15 लाख
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अभी तक लोग बैंक खातों में ऑनलाइन ठगी और एटीएम पासवर्ड की जानकारी लेकर ठगी करने वालों से ही परेशान थे, लेकिन अब हैकर की दहशत ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। हैरत की बात है कि बैंक के ग्राहक का डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड भी उनके पास होता है और पिन नंबर भी किसी को नहीं बताया। बावजूद इसके बदमाश ग्राहकों के खातों से नगदी साफ कर रहे हैं। पुलिस ऐसे मामलों को ट्रेस नहीं कर पा रही है। पिछले छह माह में 32 बैंक खातों से 15 लाख रुपये नकदी साफ कर दी गई। हालात ऐसे हैं कि बैंकों के पास साइबर क्राइम के ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रयाप्त संसाधन भी नही हैं।
जिलेभर में पिछले छह माह के दौरान ऑनलाइन ठगी के 32 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बदमाशों द्वारा करीब 15 लाख रुपेय की ठगी की गई। इनमें 50 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें उपभोक्ताओं की जेब में एटीएम कार्ड होने व किसी को पासवर्ड नहीं बताने के बावजूद खाते से रुपये निकाल लिए गए। पुलिस की जांच में सामने आया है कि बदमाश एटीएम का क्लोन तैयार करने सहित अन्य तरीकों से लोगों के खातों से रुपये निकाल रहे हैं। ऐसे में अपराधियों को न तो ग्राहक के एटीएम की जरूरत पड़ती और न ही पासवर्ड की जरूरत पड़ती है।
बदमाशों द्वारा ऑनलाइन ठगी के मामलों में ग्राहकों के खातों में रुपये वापस नहीं आए है। जबकि उपभोक्ताओं बैंक अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
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ऐसे करें बचाव
- एटीएम कार्ड पैनल को ध्यान से देखने के बाद ही रुपये की निकासी करनी चाहिए।
- 3 से 5 माह में एटीएम पिन को बदलते रहें इससे कार्ड हैक करने की संभावना कम हो जाती है
- कार्ड स्वाइप करते समय अलर्ट रहे। मशीन में कार्ड आसानी से नहीं जा रहा है तो चेक करें कि वहां के डुप्लीकेट डिवाइस या नंबर प्लेट तो नहीं लगाई है।
स्कीमर डिवाइस के माध्यम से हो रही ठगी
इस तरह की ठगी स्कीम के जरिए हो रहा है। स्कीमर एक ऐसा डिवाइस है जो एटीएम कार्ड में डालने की जगह फिट किया जाता है । इसके जरिए आपके एटीएम कार्ड का मेटर स्किमर में छप जाता है। फिर उसी के जरिए डुप्लीकेट कार्ड का क्लोन तैयार कर धोखाधड़ी कर ली जाती है।
पुलिस सभी मामलों की गहनता से जांच कर रही है। एटीएम बदलने के मामलों में कुछ बदमाशों को काबू भी किया गया हैं। फिर भी उपभोक्ताओं को जागरूक होने की जरूरत हैं। एटीएम कार्ड इस्तेमाल करते समय सावधानी अवश्य बरतें।
नाजनीन भसीन, पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी।
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जिलेभर में पिछले छह माह के दौरान ऑनलाइन ठगी के 32 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बदमाशों द्वारा करीब 15 लाख रुपेय की ठगी की गई। इनमें 50 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें उपभोक्ताओं की जेब में एटीएम कार्ड होने व किसी को पासवर्ड नहीं बताने के बावजूद खाते से रुपये निकाल लिए गए। पुलिस की जांच में सामने आया है कि बदमाश एटीएम का क्लोन तैयार करने सहित अन्य तरीकों से लोगों के खातों से रुपये निकाल रहे हैं। ऐसे में अपराधियों को न तो ग्राहक के एटीएम की जरूरत पड़ती और न ही पासवर्ड की जरूरत पड़ती है।
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बदमाशों द्वारा ऑनलाइन ठगी के मामलों में ग्राहकों के खातों में रुपये वापस नहीं आए है। जबकि उपभोक्ताओं बैंक अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
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ऐसे करें बचाव
- एटीएम कार्ड पैनल को ध्यान से देखने के बाद ही रुपये की निकासी करनी चाहिए।
- 3 से 5 माह में एटीएम पिन को बदलते रहें इससे कार्ड हैक करने की संभावना कम हो जाती है
- कार्ड स्वाइप करते समय अलर्ट रहे। मशीन में कार्ड आसानी से नहीं जा रहा है तो चेक करें कि वहां के डुप्लीकेट डिवाइस या नंबर प्लेट तो नहीं लगाई है।
स्कीमर डिवाइस के माध्यम से हो रही ठगी
इस तरह की ठगी स्कीम के जरिए हो रहा है। स्कीमर एक ऐसा डिवाइस है जो एटीएम कार्ड में डालने की जगह फिट किया जाता है । इसके जरिए आपके एटीएम कार्ड का मेटर स्किमर में छप जाता है। फिर उसी के जरिए डुप्लीकेट कार्ड का क्लोन तैयार कर धोखाधड़ी कर ली जाती है।
पुलिस सभी मामलों की गहनता से जांच कर रही है। एटीएम बदलने के मामलों में कुछ बदमाशों को काबू भी किया गया हैं। फिर भी उपभोक्ताओं को जागरूक होने की जरूरत हैं। एटीएम कार्ड इस्तेमाल करते समय सावधानी अवश्य बरतें।
नाजनीन भसीन, पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी।