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Rewari News: वन्य प्राणी विहार के विकास पर खर्च होंगे एक करोड़
Wed, 19 Mar 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 19 Mar 2025 12:06 AM IST
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फोटो : 21नाहड़ वन्य प्राणी विहार की अधूरी बाउंड्री। संवाद
- फोटो : बैठक में निर्देश देते डीएम शिवशरणप्पा व मौजूद एसपी अरूण कुमार सिंह ।
संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। नाहड़ स्थित वन्य प्राणी विहार में वर्षों से रुके कार्यों को एक करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। 98 एकड़ में चहारदीवारी के निर्माण पर 70 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जबकि पेयजल व्यवस्था पर करीब 34 लाख रुपये खर्च होंगे।
वन्य प्राणी विहार में लंबे समय से लंबित कार्यों को पूरा करने की मांग उठ रही थी। एक करोड़ से चहारदीवारी और पेयजल की व्यवस्था होने से काफी हद तक समस्या दूर हो जाएगी। चहारदीवारी बनाए जाने के बाद वन्य जीवों की सुरक्षा चाक चौबंद होगी। लंबे समय से यह कार्य अधूरा पड़ा था। जंगली जीवों के लिए पानी का भी विशेष प्रबंध किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की तरफ से स्टोरेज टैंक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी। सोलर पैनल ट्यूबवेल भी लगाया जाएगा। करीब 34 लाख रुपये इस पर भी खर्च होंगे। इन दोनों कार्यों को लेकर वन विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिया है।
प्राणी विहार क्षेत्र की तारबंदी का कार्य वर्षों पूर्व कर दिया गया था, ताकि खतरनाक जीव बाहर जाकर लोगों व पशुओं को अपना शिकार ना बना सकें, लेकिन कुछ समय बाद तारबंदी टूटने से अभ्यारण्य में विचरण करने वाले पशु पक्षी बाहर निकलने लगे थे। इसको देखते हुए वर्ष 2016 में तारबंदी को हटाकर पक्की दीवार बनाने का कार्य शुरू किया गया था। बजट के अभाव में 98 एकड़ जमीन की दीवार बाकी रह गई थी जिससे अभ्यारण्य में विचरण करने वाले जीव सुरक्षित नहीं हैं। ना ही अभ्यरण्य में पेड़ ही सुरक्षित रह गए हैं।
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अभ्यारण्य में पल रहे कई प्रजाति के वन्य जीव
नाहड़ वन्य जीव अभयारण्य 522 एकड़ में फैला है। प्रदेश सरकार ने 30 जनवरी 1987 को इसे अभ्यारण्य घोषित किया था। इससे पूर्व यह जमीन आरक्षित वन क्षेत्र के दायरे में शामिल थी। अभ्यारण्य घोषित किए जाने के बाद इसके विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। वन्य जीव प्राणी विभाग की ओर से अभ्यारण्य में वास करने वाले लगभग 250 किस्म के वन्य जीवों के भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। नाहड़ वन्य जीव अभ्यारण्य वन्य जीवों को संरक्षण देने की मिसाल पेश कर रहा है। यह अभ्यारण्य अरावली क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षण देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसमें कई प्रजातियों के वन्य जीव पल रहे हैं।
वन्य प्राणी विहार में हैं यह प्रजातियां : अभ्यारण्य में इस समय काला हिरण, नीलगाय, गीदड़, लोमड़ी, सियार आदि वन्य जीव मौजूद हैं। यहां की कई तरह की सांपों की प्रजातियां भी मौजूद हैं। पक्षियों में तोता, उल्लू, मोर, काला तीतर 250 से अधिक स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहां रहती हैं।
वर्जन
अभ्यारण्य में 70 लाख रुपये से 98 एकड़ की अधूरी चहारदीवारी बनाई जाएगी। इसके अलावा जानवरों व पक्षियों के लिए पीने के पानी की समुचित व्यवस्था के लिए 34 लाख का बजट दिया गया है।-ज्योति सिंह, इंस्पेक्टर, वन विभाग।
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कोसली। नाहड़ स्थित वन्य प्राणी विहार में वर्षों से रुके कार्यों को एक करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। 98 एकड़ में चहारदीवारी के निर्माण पर 70 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जबकि पेयजल व्यवस्था पर करीब 34 लाख रुपये खर्च होंगे।
वन्य प्राणी विहार में लंबे समय से लंबित कार्यों को पूरा करने की मांग उठ रही थी। एक करोड़ से चहारदीवारी और पेयजल की व्यवस्था होने से काफी हद तक समस्या दूर हो जाएगी। चहारदीवारी बनाए जाने के बाद वन्य जीवों की सुरक्षा चाक चौबंद होगी। लंबे समय से यह कार्य अधूरा पड़ा था। जंगली जीवों के लिए पानी का भी विशेष प्रबंध किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की तरफ से स्टोरेज टैंक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी। सोलर पैनल ट्यूबवेल भी लगाया जाएगा। करीब 34 लाख रुपये इस पर भी खर्च होंगे। इन दोनों कार्यों को लेकर वन विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिया है।
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प्राणी विहार क्षेत्र की तारबंदी का कार्य वर्षों पूर्व कर दिया गया था, ताकि खतरनाक जीव बाहर जाकर लोगों व पशुओं को अपना शिकार ना बना सकें, लेकिन कुछ समय बाद तारबंदी टूटने से अभ्यारण्य में विचरण करने वाले पशु पक्षी बाहर निकलने लगे थे। इसको देखते हुए वर्ष 2016 में तारबंदी को हटाकर पक्की दीवार बनाने का कार्य शुरू किया गया था। बजट के अभाव में 98 एकड़ जमीन की दीवार बाकी रह गई थी जिससे अभ्यारण्य में विचरण करने वाले जीव सुरक्षित नहीं हैं। ना ही अभ्यरण्य में पेड़ ही सुरक्षित रह गए हैं।
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अभ्यारण्य में पल रहे कई प्रजाति के वन्य जीव
नाहड़ वन्य जीव अभयारण्य 522 एकड़ में फैला है। प्रदेश सरकार ने 30 जनवरी 1987 को इसे अभ्यारण्य घोषित किया था। इससे पूर्व यह जमीन आरक्षित वन क्षेत्र के दायरे में शामिल थी। अभ्यारण्य घोषित किए जाने के बाद इसके विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। वन्य जीव प्राणी विभाग की ओर से अभ्यारण्य में वास करने वाले लगभग 250 किस्म के वन्य जीवों के भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। नाहड़ वन्य जीव अभ्यारण्य वन्य जीवों को संरक्षण देने की मिसाल पेश कर रहा है। यह अभ्यारण्य अरावली क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षण देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसमें कई प्रजातियों के वन्य जीव पल रहे हैं।
वन्य प्राणी विहार में हैं यह प्रजातियां : अभ्यारण्य में इस समय काला हिरण, नीलगाय, गीदड़, लोमड़ी, सियार आदि वन्य जीव मौजूद हैं। यहां की कई तरह की सांपों की प्रजातियां भी मौजूद हैं। पक्षियों में तोता, उल्लू, मोर, काला तीतर 250 से अधिक स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहां रहती हैं।
वर्जन
अभ्यारण्य में 70 लाख रुपये से 98 एकड़ की अधूरी चहारदीवारी बनाई जाएगी। इसके अलावा जानवरों व पक्षियों के लिए पीने के पानी की समुचित व्यवस्था के लिए 34 लाख का बजट दिया गया है।-ज्योति सिंह, इंस्पेक्टर, वन विभाग।