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त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल की तर्ज पर हरियाणा में बहाल हो पुरानी पेंशन व्यवस्था
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विधायक लक्ष्मण यादव को ज्ञापन सौंपते पेंशन बहाली संघर्ष समिति के सदस्य।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। पेंशन बहाली संघर्ष समिति की जिला इकाई ने प्रधान जितेंद्र यादव के नेतृत्व में कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव को पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि केंद्र सरकार द्वारा एक जनवरी 2004 व हरियाणा सरकार ने 1 जनवरी 2006 से अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन को समाप्त कर नई परिभाषित अंशदाई पेंशन योजना लागू कर दी, जो शेयर मार्केट के जोखिम पर आधारित है। नई व्यवस्था में कर्मियों के वेतन व महंगाई भत्ते का 10 फीसदी कटौती कर तथा उतनी ही राशि सरकार द्वारा जमा कर निजी क्षेत्र में लगाना अन्यायपूर्ण है। बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण इसमें किसी भी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं है। जिसके चलते यह व्यवस्था कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा को समाप्त करती है।
जिसके कर्मचारी अपने भविष्य को असुरक्षित महसूस कर रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि पीएफआरडीए किसी भी राज्य सरकार को पुरानी पेंशन व्यवस्था बनाए रखने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल इसका उदाहरण है, जहां आज भी पुरानी पेंशन लागू है। ज्ञापन में मांग की गई कि हरियाणा सरकार के अधीन एक लाख 50 हजार कर्मचारियों की 25 से 35 साल की सेवा का सम्मान करते हुए पुन: पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू कर कर्मियों को सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाए। इस मौके पर उपप्रधान रविंद्र प्रकाश, सरला यादव, रवि कुमार, महीपाल, रणधीर, भूपेंद्र कुमार, हेमंत, मनोज, श्रवण कुमार, पतराम, लोकेश, सुभाष चंद, अनिल, अशोक आदि मौजूद थे।
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उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि केंद्र सरकार द्वारा एक जनवरी 2004 व हरियाणा सरकार ने 1 जनवरी 2006 से अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन को समाप्त कर नई परिभाषित अंशदाई पेंशन योजना लागू कर दी, जो शेयर मार्केट के जोखिम पर आधारित है। नई व्यवस्था में कर्मियों के वेतन व महंगाई भत्ते का 10 फीसदी कटौती कर तथा उतनी ही राशि सरकार द्वारा जमा कर निजी क्षेत्र में लगाना अन्यायपूर्ण है। बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण इसमें किसी भी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं है। जिसके चलते यह व्यवस्था कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा को समाप्त करती है।
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जिसके कर्मचारी अपने भविष्य को असुरक्षित महसूस कर रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि पीएफआरडीए किसी भी राज्य सरकार को पुरानी पेंशन व्यवस्था बनाए रखने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल इसका उदाहरण है, जहां आज भी पुरानी पेंशन लागू है। ज्ञापन में मांग की गई कि हरियाणा सरकार के अधीन एक लाख 50 हजार कर्मचारियों की 25 से 35 साल की सेवा का सम्मान करते हुए पुन: पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू कर कर्मियों को सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाए। इस मौके पर उपप्रधान रविंद्र प्रकाश, सरला यादव, रवि कुमार, महीपाल, रणधीर, भूपेंद्र कुमार, हेमंत, मनोज, श्रवण कुमार, पतराम, लोकेश, सुभाष चंद, अनिल, अशोक आदि मौजूद थे।
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