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Rewari News: रामपुरा में स्थापित होगी तेल मिल, 150 टीपीडी होगी क्षमता
Tue, 16 Sep 2025 12:53 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 16 Sep 2025 12:53 AM IST
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रेवाड़ी। हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ लिमिटेड (हैफेड) की तरफ से रामपुरा में सरसों तेल का अत्याधुनिक मिल स्थापित किया जाएगा। इसकी प्रारंभिक प्रसंस्करण क्षमता 150 टीपीडी होगी, जिसे 300 टीपीडी तक बढ़ाया जा सकेगा।
यह परियोजना डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) आधार पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत क्रियान्वित की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मुख्यालय में हुई बैठक में यह जानकारी दी गई।
बैठक में बताया गया कि यह संयंत्र अनुबंध प्रदान किए जाने की तिथि से 18 महीने के भीतर चालू होने की उम्मीद है। संयंत्र में विश्वस्तरीय प्रसंस्करण मानक अपनाए जाएंगे और कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
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रामपुरा क्षेत्र भिवानी, महेन्द्रगढ़, हिसार, रोहतक, झज्जर और रेवाड़ी जैसे प्रमुख सरसों उत्पादक जिलों से जुड़ा हुआ है। ये जिले संयुक्त रूप से हरियाणा के कुल तोरिया-सरसों उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत योगदान करते हैं।
यहां से कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती है। संयंत्र की वार्षिक आवश्यकता 45 हजार मीट्रिक टन होगी, जो कैचमेंट क्षेत्र की उपलब्धता का लगभग 10 प्रतिशत है। इस प्रकार, संयंत्र का संचालन नियमित और स्थिर रहेगा।
प्रस्तावित स्थल कैचमेंट क्षेत्र से 200 किलोमीटर की परिधि में स्थित है और बेहतरीन सड़क तथा रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इससे सुचारू खरीद, परिवहन और वितरण के साथ-साथ प्रदेश के तिलहन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और सुदृढ़ होगी।
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यह परियोजना डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) आधार पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत क्रियान्वित की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मुख्यालय में हुई बैठक में यह जानकारी दी गई।
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बैठक में बताया गया कि यह संयंत्र अनुबंध प्रदान किए जाने की तिथि से 18 महीने के भीतर चालू होने की उम्मीद है। संयंत्र में विश्वस्तरीय प्रसंस्करण मानक अपनाए जाएंगे और कुशल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
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रामपुरा क्षेत्र भिवानी, महेन्द्रगढ़, हिसार, रोहतक, झज्जर और रेवाड़ी जैसे प्रमुख सरसों उत्पादक जिलों से जुड़ा हुआ है। ये जिले संयुक्त रूप से हरियाणा के कुल तोरिया-सरसों उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत योगदान करते हैं।
यहां से कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती है। संयंत्र की वार्षिक आवश्यकता 45 हजार मीट्रिक टन होगी, जो कैचमेंट क्षेत्र की उपलब्धता का लगभग 10 प्रतिशत है। इस प्रकार, संयंत्र का संचालन नियमित और स्थिर रहेगा।
प्रस्तावित स्थल कैचमेंट क्षेत्र से 200 किलोमीटर की परिधि में स्थित है और बेहतरीन सड़क तथा रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इससे सुचारू खरीद, परिवहन और वितरण के साथ-साथ प्रदेश के तिलहन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और सुदृढ़ होगी।