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Rewari News: जनता की सेवा के लिए लगाए अधिकारी ही बने भ्रष्टाचार के जनक

Sun, 08 Dec 2024 09:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 08 Dec 2024 09:47 PM IST
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Officials appointed to serve the public became the fathers of corruption.
रेवाड़ी। भ्रष्टाचार रोकने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है, उसके बावजूद भ्रष्टाचार के मामले हर साल सामने आते हैं। इस साल जिले में आए भ्रष्टाचार के अधिकतर मामलों में छोटे-मोटे कर्मचारी नहीं बल्कि बड़े अधिकारी लपेटे में आए हैं।
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जिले में इस साल सबसे ज्यादा केस पुलिस विभाग के सामने आए हैं। इस साल 5 पुलिसकर्मियों को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है। खास बात यह है कि यह पांचों पुलिसकर्मी अधिकारी रैंक के थे। वहीं एक मामले में रिश्वत लेते जिला मत्स्य अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी मामलों में कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने की थी। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप कुछ डिपो होल्डरों ने लगाए हैं। फिलहाल आरोपों की जांच अभी चल रही है।
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केस 1 : सीआईए इंस्पेक्टर रिश्वत लेते रंगे हाथों हुआ था गिरफ्तार
फरवरी में एंटी करप्शन ब्यूरो गुरुग्राम की टीम ने क्राइम इन्वेस्टीगेशन एजेंसी-3 के इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। टीम ने मौके पर से 3 लाख 75 हजार रुपये की रिश्वत की राशि बरामद की थी। इसी मामलों में एक और इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, 28 जनवरी की रात को शहर के उत्तम नगर स्थित एक घर में सीआईए 3 की टीम ने रेड करते हुए क्रिकेट मैच पर सट्टा लगवाने के लिए चलाई जा रही बुक का खुलासा किया था। पुलिस ने मौके पर से कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। जो आरोपी पकड़े गए थे इसमें से एक की जमानत कालाका निवासी एक युवक ने कराई थी। उसके बाद से ही सीआईए की टीम ने उस पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। सीआईए इंस्पेक्टर युवक को परेशान करने लगा था। युवक ने इसकी जानकारी एसीबी को दी थी। जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।
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केस 2 : सदर थाना प्रभारी और एएसआई 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार
अप्रैल माह में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी और एएसआई को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया था। मौके से रिश्वत के 50 हजार रुपये भी बरामद किए गए थे। इस मामले में गोकलगढ़ गांव का एक युवक सट्टेबाजी का काम करता था और हर महीने सदर थाने को 25 हजार रुपये मासिक (मंथली) देता था। पिछले दो महीने से उसने पुलिस को रुपये नहीं दिए थे। आरोपी एएसआई ने उसे पैसे देने के लिए सदर थाने के पास पुलिस क्वार्टर में बुलाया जहां एसएचओ भी मौजूद था। जैसे ही पुलिसकर्मियों ने पैसे लिए, एसीबी की टीम ने दोनों को 50 हजार रुपये के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।

केस 3 : ईएसआई को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते किया था गिरफ्तार
जुलाई में रामपुरा थाने में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने एक ईएसआई को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपी ईएसआई एक मामले में जांच अधिकारी था। दरअसल, शहर के मोहल्ला कुतुबपुर निवासी ने एसीबी को बताया था कि 9 माह पहले दीपावली के त्योहार पर रामपुरा थाना पुलिस ने उनके घर से पटाखे पकड़े थे। इस मामले में वह कोर्ट में पेशी भी भुगत रहा था। उनके पास रामपुरा थाना में तैनात एक ईएसआई का फोन आया और कहा कि उसके छोटे भाई का भी इस केस में नाम है। अगर भाई का नाम कटवाना है तो 40 हजार रुपये देने होंगे। इस पर युवक ने 10 हजार रुपये दे दिए। परिवार के लोगों ने पुलिसकर्मी से फरियाद भी लगाई, फिर भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद रिश्वत मांगने की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में दी गई।

केस 4 : एसीबी ने जिला मत्स्य अधिकारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा
मार्च में जिला मत्स्य अधिकारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो गुरुग्राम की टीम ने गिरफ्तार किया था। दरअसल, मत्स्य अधिकारी ने सब्सिडी का लाभ देने के एवज में 1 लाख 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। एक लाख रुपये वह पहले ही ले चुका था। शिकायतकर्ता की पत्नी ने मत्स्य विभाग में संचालित योजना के तहत 25 फिश बायो फ्लो टैंक लगवाए थे। इसके लिए उन्होंने बैंक से 60 फीसदी यानी 17 लाख 75 हजार रुपये तक का लोन लिया था। इस योजना के तहत महिला को मत्स्य पालन विभाग से सब्सिडी मिलनी थी। सब्सिडी राशि स्वीकृत करने की एवज में अधिकारी ने महिला से रिश्वत की मांग की थी।
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