{"_id":"607090df8ebc3ecc5f0d18ea","slug":"odisa-rtd-djp-six-state-accused-rewari-news-rtk6037221200","type":"story","status":"publish","title_hn":"उड़ीसा के रिटायर्ड डीजीपी को ठगने वाला बदमाश छह राज्यों में दे चुका वारदातों को अंजाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उड़ीसा के रिटायर्ड डीजीपी को ठगने वाला बदमाश छह राज्यों में दे चुका वारदातों को अंजाम
विज्ञापन
उड़ीसा के रिटायर्ड डीजीपी से पौने चार लाख की ठगी के मामले में रेवाड़ी साइबर थाना पुलिस के हत्थे चढ़े यूपी के बाराबंकी के पुरेवान तोरई निवासी शुभम ने रिमांड के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए है। शुभम ने आरोपी राजकुमार को अपना मोहरा बनाकर उसकी फर्जी आईडी से बैंक खाता खुलवाने के बाद एक-दो नहीं, बल्कि छह राज्यों में कई हाईप्रोफाइल लोगों को ठगने का काम किया।
साउथ रेंज रेवाड़ी साइबर थाना प्रभारी ऋषिकांत ने बताया कि 22 फरवरी को रिटायर्ड डीजीपी दीर्घपाल सिंह चौहान की शिकायत दर्ज करने के बाद ही पुलिस आरोपितों का सुराग लगाने में जुटी थी। शुरूआत में पुलिस के हाथ खाली थे, लेकिन पुलिस को जैसे ही आरोपितों के बैंक डिटेल की जानकारी मिली पुलिस ने बैंक से उनकी जानकारी जुटाई। बैंक अकाउंट के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की तो पता चला कि आरोपी राजकुमार के नाम से फर्जी आईडी पर अकाउंट खुला हुआ है। उसके बाद पुलिस ने आधार कार्ड नंबर के जरिए तलाश की तो पुलिस राजकुमार तक पहुंच गई। बाद में पुलिस ने ठगी के मास्टर माइंड शुभम को भी काबू कर लिया। दोनों लखनऊ में ही किराये पर रह रहे थे। मास्टर माइंड शुभम काफी पढ़ा लिखा है। वह एग्रीकल्चर में बीएससी पासआउट होने के बाद दिल्ली में एक कंपनी में बतौर फिल्ड ऑफिसर काम करता था। इस कंपनी के जरिए ही आयुर्वेदिक दवा की सप्लाई होती थी। शुभम को दवाईयां खरीदने वाले अधिकांश लोगों की जानकारी होती थी। पिछले साल लॉकडाउन के चलते उसकी नौकरी चली गई। उसके बाद आरोपी लखनऊ जाकर रहने लग गया और यहां उसने पांचवीं पास आरोपी राजकुमार को मोहरा बनाकर उसकी फर्जी आईडी से पहले बैंक खाता खुलवाया और फिर लोगों के साथ ठगी कर इस खाते में नकदी डलवाता और उसे तुरंत ही निकलवा भी लेता। शुभम के पास काफी सारे लोगों का डाटा था, जिसके जरिए ही उसने लोगों से संपर्क कर इंश्योरेंस क्लेम का प्रलोभन देकर ठगना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
साउथ रेंज रेवाड़ी साइबर थाना प्रभारी ऋषिकांत ने बताया कि 22 फरवरी को रिटायर्ड डीजीपी दीर्घपाल सिंह चौहान की शिकायत दर्ज करने के बाद ही पुलिस आरोपितों का सुराग लगाने में जुटी थी। शुरूआत में पुलिस के हाथ खाली थे, लेकिन पुलिस को जैसे ही आरोपितों के बैंक डिटेल की जानकारी मिली पुलिस ने बैंक से उनकी जानकारी जुटाई। बैंक अकाउंट के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की तो पता चला कि आरोपी राजकुमार के नाम से फर्जी आईडी पर अकाउंट खुला हुआ है। उसके बाद पुलिस ने आधार कार्ड नंबर के जरिए तलाश की तो पुलिस राजकुमार तक पहुंच गई। बाद में पुलिस ने ठगी के मास्टर माइंड शुभम को भी काबू कर लिया। दोनों लखनऊ में ही किराये पर रह रहे थे। मास्टर माइंड शुभम काफी पढ़ा लिखा है। वह एग्रीकल्चर में बीएससी पासआउट होने के बाद दिल्ली में एक कंपनी में बतौर फिल्ड ऑफिसर काम करता था। इस कंपनी के जरिए ही आयुर्वेदिक दवा की सप्लाई होती थी। शुभम को दवाईयां खरीदने वाले अधिकांश लोगों की जानकारी होती थी। पिछले साल लॉकडाउन के चलते उसकी नौकरी चली गई। उसके बाद आरोपी लखनऊ जाकर रहने लग गया और यहां उसने पांचवीं पास आरोपी राजकुमार को मोहरा बनाकर उसकी फर्जी आईडी से पहले बैंक खाता खुलवाया और फिर लोगों के साथ ठगी कर इस खाते में नकदी डलवाता और उसे तुरंत ही निकलवा भी लेता। शुभम के पास काफी सारे लोगों का डाटा था, जिसके जरिए ही उसने लोगों से संपर्क कर इंश्योरेंस क्लेम का प्रलोभन देकर ठगना शुरू कर दिया।
विज्ञापन