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Rewari News: अब महाविद्यालयों में भी होगी अभिभावक-शिक्षक बैठक,
Sat, 30 May 2026 11:25 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 30 May 2026 11:25 PM IST
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उच्चतर शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश, सत्र शुरू होते ही होगी पीटीएम, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर होगा मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। निजी स्कूलों की तर्ज पर अब जिले महाविद्यालयों में भी नए शैक्षणिक सत्र से अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित की जाएगी। इसमें प्रोफेसर विद्यार्थियों के प्रदर्शन, व्यवहार और भविष्य की योजनाओं पर अभिभावकों से संवाद करेंगे। इसको लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं।
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही महाविद्यालयों में पीटीएम का आयोजन कर विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी। पीटीएम के दौरान प्रोफेसर अभिभावकों से सीधे संवाद कर विद्यार्थियों के प्रदर्शन, व्यवहार और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
इसके अलावा महाविद्यालय अपने स्तर पर अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए सेमिनार आयोजित करेंगे। इसमें शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों और चुनौतियों पर मंथन किया जाएगा।
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अब तक अभिभावक-शिक्षक बैठकें मुख्य रूप से स्कूलों में ही आयोजित होती थीं लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को महाविद्यालयों में भी लागू करने का निर्णय लिया है।
शिक्षाविदों का मानना है कि महाविद्यालय स्तर पर पहुंचने के बाद विद्यार्थियों में मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और भावनात्मक परिपक्वता विकसित होने लगती है। उनकी तर्क शक्ति और चिंतन क्षमता भी बढ़ती है।
ऐसे में उन्हें औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ मार्गदर्शन और संवाद की भी आवश्यकता होती है। पीटीएम के माध्यम से अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी एक मंच पर आकर समस्याओं और संभावनाओं पर चर्चा कर सकेंगे। फिलहाल महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश जारी है।
प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने और नया सत्र शुरू होने के बाद कॉलेजों में पहली पीटीएम आयोजित की जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और अभिभावकों की सहभागिता दोनों में वृद्धि होगी।
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60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से बात करनी जरूरी हो गई है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे महाविद्यालय न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी महाविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
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वर्जन
महाविद्यालय में आयोजित होने वाली सेमिनार में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। इसमें अभिभावकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा।-दयावती, उप-प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। निजी स्कूलों की तर्ज पर अब जिले महाविद्यालयों में भी नए शैक्षणिक सत्र से अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित की जाएगी। इसमें प्रोफेसर विद्यार्थियों के प्रदर्शन, व्यवहार और भविष्य की योजनाओं पर अभिभावकों से संवाद करेंगे। इसको लेकर उच्चतर शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं।
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही महाविद्यालयों में पीटीएम का आयोजन कर विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी। पीटीएम के दौरान प्रोफेसर अभिभावकों से सीधे संवाद कर विद्यार्थियों के प्रदर्शन, व्यवहार और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
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इसके अलावा महाविद्यालय अपने स्तर पर अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए सेमिनार आयोजित करेंगे। इसमें शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों और चुनौतियों पर मंथन किया जाएगा।
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अब तक अभिभावक-शिक्षक बैठकें मुख्य रूप से स्कूलों में ही आयोजित होती थीं लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को महाविद्यालयों में भी लागू करने का निर्णय लिया है।
शिक्षाविदों का मानना है कि महाविद्यालय स्तर पर पहुंचने के बाद विद्यार्थियों में मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और भावनात्मक परिपक्वता विकसित होने लगती है। उनकी तर्क शक्ति और चिंतन क्षमता भी बढ़ती है।
ऐसे में उन्हें औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ मार्गदर्शन और संवाद की भी आवश्यकता होती है। पीटीएम के माध्यम से अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी एक मंच पर आकर समस्याओं और संभावनाओं पर चर्चा कर सकेंगे। फिलहाल महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश जारी है।
प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने और नया सत्र शुरू होने के बाद कॉलेजों में पहली पीटीएम आयोजित की जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और अभिभावकों की सहभागिता दोनों में वृद्धि होगी।
60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से बात करनी जरूरी हो गई है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे महाविद्यालय न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी महाविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
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वर्जन
महाविद्यालय में आयोजित होने वाली सेमिनार में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। इसमें अभिभावकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा।-दयावती, उप-प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा।