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66 निजी स्कूलों समेत 75 के खिलाफ जारी किया नोटिस
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sat, 21 May 2016 12:48 AM IST
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सूबे के शिक्षाधिकारियों के अलावा जिले के 66 निजी स्कूलों समेत 75 लोगों को पार्टी बनाकर सिविल जज की कोर्ट में नयागांव निवासी सत्यवीर सिंह ने याचिका डाली है। मामला संविधान की धारा का उल्लंघन कर कक्षा 6 से 14 तक के बच्चों से पढ़ाई के लिए फीस लेने से जुड़ा है। इसके अलावा बीपीएल परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि को भी सरकार व आम आदमी पर अतिरिक्त भार बताया गया है।
नयागांव निवासी सत्यवीर सिंह ने सिविल जज सीनियर डिवीजन विवेक कुमार की अदालत में दायर इस्तगासे में कहा है कि निजी स्कूलों में गैर कानूनी तरीके से दाखिले व अन्य मद में फीस वसूली की जा रही है। संविधान की धारा 21-क के अनुसार 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इससे निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 की अवहेलना की जा रही है।
सत्यवीर सिंह ने इस मामले में जिला उपायुक्त, निदेशक मौलिक शिक्षा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, निदेशक सेकेंडरी एजूकेशन, हरियाणा शिक्षा विभाग बजरिए सचिव, हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग, सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी, मानव संसाधन मंत्रालय बजरिए सचिव व केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के मारफत सचिव आदि 9 अधिकारियों व विभागों को पार्टी बनाया गया है। इनके अतिरिक्त जिला के 66 प्राइवेट स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया है। सत्यवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इन सभी को जवाब दायर करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली तारीख 19 जुलाई रखी गई है।
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सरकारी खजाने व आम आदमी पर अतिरिक्त है भार
इस्तगासे का आधार बताते हुए सत्यवीर सिंह ने कहा कि सरकार निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों को पढ़ाने के लिए 300 व 500 रुपये देने की घोषणा कर रही है। इससे सरकारी खजाने के साथ ही आम आदमी पर ही अतिरिक्त भार पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर प्राइवेट स्कूल संचालक अगर सरकार के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं तो इनकी मान्यता को रद्द किया जाए।
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नयागांव निवासी सत्यवीर सिंह ने सिविल जज सीनियर डिवीजन विवेक कुमार की अदालत में दायर इस्तगासे में कहा है कि निजी स्कूलों में गैर कानूनी तरीके से दाखिले व अन्य मद में फीस वसूली की जा रही है। संविधान की धारा 21-क के अनुसार 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इससे निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 की अवहेलना की जा रही है।
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सत्यवीर सिंह ने इस मामले में जिला उपायुक्त, निदेशक मौलिक शिक्षा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, निदेशक सेकेंडरी एजूकेशन, हरियाणा शिक्षा विभाग बजरिए सचिव, हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग, सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी, मानव संसाधन मंत्रालय बजरिए सचिव व केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के मारफत सचिव आदि 9 अधिकारियों व विभागों को पार्टी बनाया गया है। इनके अतिरिक्त जिला के 66 प्राइवेट स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया है। सत्यवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इन सभी को जवाब दायर करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली तारीख 19 जुलाई रखी गई है।
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सरकारी खजाने व आम आदमी पर अतिरिक्त है भार
इस्तगासे का आधार बताते हुए सत्यवीर सिंह ने कहा कि सरकार निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों को पढ़ाने के लिए 300 व 500 रुपये देने की घोषणा कर रही है। इससे सरकारी खजाने के साथ ही आम आदमी पर ही अतिरिक्त भार पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर प्राइवेट स्कूल संचालक अगर सरकार के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं तो इनकी मान्यता को रद्द किया जाए।