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Rewari News: साहबी नदी में प्रदूषण के मुद्दे पर एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को बनाया प्रतिवादी

Sat, 28 Feb 2026 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 28 Feb 2026 12:13 AM IST
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NGT makes National Mission for Clean Ganga a respondent in the issue of pollution in Sahibi River
साहबी बैराज में जमा दूषित पानी। स्रोत : ग्रामीण
रेवाड़ी। साहबी बैराज व नदी में लगातार छोड़े जा रहे सीवर और औद्योगिक प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भी प्रतिवादी बना लिया है। जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. ए सेंथिल वेल ने माना कि साहबी नदी यमुना की सहायक नदी है और यमुना गंगा की। लिहाजा, इस नदी में हो रहा प्रदूषण गंगा नदी प्रणाली से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने एनएमसीजी को सहाबी बैराज में पहुंच रहे प्रदूषण की निगरानी राष्ट्रीय स्तर पर करने के आदेश दिए।
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एनजीटी ने 25 फरवरी को साहबी नदी में प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए पक्षकारों की सूची में संशोधन कर एनएमसीजी को नोटिस जारी किया। ट्रिब्यूनल ने एनएमसीजी को अगली सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के शामिल होने से अब इस मामले की निगरानी केंद्रीय स्तर पर भी होगी। साथ ही सभी संबंधित विभागों को पहले जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना होगा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 को होगी।
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राष्ट्रीय स्तर पर नदी संरक्षण का बना मुद्दा
खरखड़ा गांव के सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने साहबी नदी में छोड़े जा रहे सीवर, औद्योगिक कचरे और नदी तटों पर हो रहे अवैध अतिक्रमण के मामले में जनहित याचिका दायर की थी। प्रकाश की दायर जनहित याचिका अब राष्ट्रीय स्तर पर नदी संरक्षण के मुद्दा बन गई है।
याचिका में कहा-नदी और भूजल दोनों हो रहे प्रभावित

याचिका में बताया गया है कि धारूहेड़ा और रेवाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला ट्रीटेड और बिना ट्रीटेड सीवर का पानी साहबी नदी के माध्यम से मसानी स्थित साहबी बैराज तक पहुंच रहा है। यह बैराज जल संरक्षण का महत्वपूर्ण स्रोत है लेकिन प्रदूषित पानी से इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। नदी और भूजल दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

नदी में नौ गुना अधिक पाया गया सीओडी और बीओडी

पिछले साल एनजीटी में इस मामले की सुनवाई के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया की रिपोर्ट में बताया गया था कि नदी में घरेलू सीवरेज के मुकाबले औद्योगिक अपशिष्ट में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) का स्तर 9 गुना तक अधिक पाया गया था। औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित 5 मुख्य स्थानों पर जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब पाई गई है। एसटीपी के आउटलेट्स पर पानी की गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रही।
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