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Rewari News: गर्भावस्था में बरती जा रही लापरवाही नवजातों के लिए बन रही गंभीर बीमारियों का कारण

Fri, 10 Apr 2026 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 11:24 PM IST
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Negligence during pregnancy is becoming the cause of serious illnesses in newborns.
सिविल अस्पताल रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस हर साल 11 अप्रैल को मनाया जाता है। गर्भावस्था के दौरान बरती जा रही छोटी-छोटी लापरवाहियां नवजातों के लिए गंभीर बीमारियों का कारण बन रही हैं। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग के एक सर्वे में हुआ है। जिले में कई बच्चे जन्म से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
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इसमें दिल में छेद, कटे-फटे होंठ व तालु, भेंगापन, टेढ़े-मुड़े पैर, मोतियाबिंद, तंत्रिका नलिका दोष व रेटिनोपैथी जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 88 बच्चों का निशुल्क इलाज और ऑपरेशन किया गया। इनमें सबसे अधिक 34 बच्चे दिल में छेद की समस्या से पीड़ित मिले।
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इसके अलावा 15 बच्चों के कटे होंठ व तालु, 13 के भेंगापन, 12 के टेढ़े-मुड़े पैर, 11 के मोतियाबिंद, 2 के तंत्रिका नलिका दोष और 1 बच्चे में रेटिनोपैथी पाई गई। पिछले वर्ष प्रसव के दौरान आठ महिलाओं की मृत्यु हो गई थी।
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मातृत्व दिवस को मनाने का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को उचित स्वास्थ्य देखभाल, संस्थागत प्रसव और गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम वाली देखभाल के प्रति जागरूक करना है।
स्वास्थ्य विभाग में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना यादव के अनुसार इन जन्मजात बीमारियों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। गर्भावस्था के दौरान कुपोषण, संक्रमण, समय पर जांच न कराना और मां का नशा करना बच्चे के विकास पर सीधा असर डालता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में भी ऐसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं।

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समय पर जांच से हो सकता है बचाव

डॉ. अर्चना यादव ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, अल्ट्रासाउंड और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को फोलिक एसिड व आयरन की दवाइयों का सेवन करना चाहिए और संतुलित आहार लेना चाहिए। तनाव से बचना भी जरूरी है, क्योंकि इसका असर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।


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डीईआईसी में मिल रही निशुल्क सुविधा

नागरिक अस्पताल के जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) में जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की जांच और पंजीकरण किया जाता है। यहां विशेषज्ञ चयनित बच्चों के पैनल में शामिल अस्पतालों में निशुल्क ऑपरेशन करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में सर्वे व जागरूकता अभियान चलाकर ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है ताकि समय रहते इलाज किया जा सके।
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