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Rewari News: 120 स्थानों पर भूजल में अधिक फ्लोराइड

Tue, 18 Mar 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 18 Mar 2025 12:20 AM IST
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More fluoride in groundwater at 120 places
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। जिले के 120 स्थानों पर भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। यहां हैंडपाइप या सबमर्सिबल का पानी पीने से 30-40 फीसदी लोग फ्लोरोसिस के मरीज पाए गए हैं। फ्लोरोसिस से पीड़ित व्यक्ति की हड्डियां कमजोर हो जाती है और दांत खराब हो जाते हैं।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार जिले में 120 साइट हैं, जहां पर फ्लोराइड की अधिकता है। इनमें बहरामपुर भड़ेगी, मोहम्मदपुर, अलावलपुर, आसलवास, बनीपुर, बावल शहर, भगवानपुर, बीदावास, बोलनी, चांदुवास, गढ़ी, गोविंदपुरी, जलालपुर, खिजूरी, किशनपुर, ओढ़ी, रायपुर, रणसी माजरी, रुद्ध, साबन, सांजरपुर, मनेठी, बलवाड़ी, भठेड़ा, ढाणी सांतो, धामलावास, कोलाना, नांधा, नंगली गोधा, पीथड़ावास, राजपुरा इस्तमुरार, प्रागपुरा, टांकड़ी, चिमनावास, देहलावास व सुठानी सहित अन्य शामिल हैं। इन स्थानों पर 30 से लेकर 50 प्रतिशत बच्चों व बड़ों में फ्लोरोसिस की समस्या पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने की वजह से होती है। फ्लोरोसिस अधिकतर दांतों, हड्डियों व मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है। डेंटल फ्लोरोसिस 8 या उससे कम उम्र के बच्चों में फ्लोरोसिस विकसित होने का खतरा होता है।
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इस बीमारी के फैलने के बड़े कारणों में पानी के अलावा काला नमक खाने, सुपारी खाने व बिना दूध की चाय पीने से भी हो सकती है। पानी में फ्लोराइड का लेवल एक पीपीएम तक होना चाहिए। जहां फ्लोरोसिस ज्यादा है वहां विटामिन डी, कैल्शियम, विटामिन सी का सेवन अधिक करना चाहिए। संतुलित आहार लेने से भी फ्लोरोसिस की समस्या कुछ हद तक रोकथाम की जा सकती है।
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फ्लोरोसिस बीमारी के सामान्य लक्षण
दंत चिकित्सक डॉ. मीत वर्मा ने बताया कि दांतों में पीलापन, हड्डियों से संबंधित बीमारियां जैसे गर्दन, पीठ, कंधे व घुटनों के जोड़ों में दर्द फ्लोरोसिस के लक्षण हैं। इससे स्मरण शक्ति कमजोर होना व गुर्दे की बीमारी भी होने का खतरा रहता है। स्केलेटल फ्लोरोसिस हड्डियों की बीमारी है, जो अंदर ही अंदर हमारी हड्डियों को खोखला कर देती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को गठिया यानी अर्थराइटिस जैसा दर्द महसूस होता है। यह बीमारी खास तौर पर हड्डियों में दर्द पैदा करती है। इस बीमारी के होने पर कमर दर्द, हाथ पैरों में दर्द और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। मांसपेशियों के फ्लोरोसिस में बार-बार पेट में दर्द होना, उल्टी आना, सुन्नपन होना आदि होता है। सिविल अस्पताल में एक साल पहले शुरू हुई फ्लोरोसिस टेस्टिंग लैब, डेंटल ओपीडी में भी होती है।




वर्जन
स्वास्थ्य विभाग की ओर से फ्लोरोसिस का पता लगाने के लिए स्कूलों में बच्चों की जांच की जाती है। अगर किसी में फ्लोरोसिस के लक्षण मिलते हैं तो उसके यूरीन सैंपल लेकर टेस्ट किया जाता है। अगर ज्यादा मिलती है तो बच्चों को बेहतर खान-पान के बारे में अवगत कराया जाता है। फ्लोरोसिस के कारण दांतों में पीलापन, हड्डियों में दर्द सहित अन्य समस्या बढ़ रही हैं। किसी सोर्स में ज्यादा फ्लोराइड मिलता है तो वहां का पानी न पीने की सलाह दी जाती है। साथ ही पब्लिक हेल्थ को भी लिखा जाता है।- डॉ. सीमा राव, नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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