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Rewari News: खुद सुरक्षित बसेरा बना लिया, जर्जर भवन हादसे के लिए छाेड़ा

Wed, 12 Jul 2023 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 12 Jul 2023 12:20 AM IST
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Made himself a safe shelter, dilapidated building left for accident
संघी का बास मोहल्ले में जर्जर पड़ा मकान। संवाद
रेवाड़ी। जिले में रुक-रुक कर मानसून की बारिश जारी है। इसकी वजह से जगह-जगह जलभराव से परेशानी बढ़ी हुई है, वहीं शहर में जर्जर हो चुके भवन भी लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। अधिकतर जर्जर हो चुके भवनों के स्वामी अपना आशियाना दूसरी जगह बना चुके हैं, लेकिन चंद रुपये के लालच में भवन को किराये पर दे रखा है।
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उसे गिरवाने की जरूरत तक नहीं समझ रहे हैं। बारिश के दौरान ये भवन लोगों के लिए काल बन सकते हैं। सोमवार को हुई बारिश से पुरानी तहसील की दीवार गिर गई थी। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इसके अलावा बावल में थाने में बना भवन की छत का मलबा भरभराकर गिर गया, जहां रात को होमगार्ड आराम करते थे।
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शहर के लोगों में बारिश और मौसम खराब में किसी अनहोनी की संभावना सताने लगती है। हालांकि प्रशासन ने भी करीब 20 खंडहर बन चुकीं हवेलियों को चिह्नित कर खतरनाक घोषित कर रखा है। इसके बावजूद कुछ भवनों को लोगों ने अपना आसरा बनाया हुआ है।
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बाजार के अंदर भी कई ऐसे भवन हैं, जो जर्जर हो चुके हैं। ये कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोगों की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा रहा है। नागरिक सुरक्षा के तहत ऐसे जर्जर भवनों को ध्वस्त करने का जिम्मा नगर परिषद व लोक निर्माण विभाग का है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से लोगों की जिंदगी खतरे में है। गत दिवस भी शहर की पुरानी तहसील के निकट एक ऐसे ही जर्जर भवन की दीवार गिर गई थी, गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई।

शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई

शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, चौधरीवाड़ा के अलावा अन्य जगह पर 100 साल से अधिक पुराने भवन हैं, जो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो लंबे समय से बंद हैं। भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किरायेदार बसा दिए हैं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत नगर परिषद में की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब किरायेदार इन भवनों को खाली करने को तैयार नहीं हैं। इस कारण नप प्रशासन भी दबाव में रहता है।

लोक निर्माण विभाग देता है नप को निर्देश



जर्जर भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने अथवा नहीं कराने के निर्देश देते हैं, लेकिन इसी काम में दोनों ही विभाग के अधिकारी महीनों लगा देते हैं। वर्तमान में ऐसे कई भवन हैं, जिनकी शिकायत पर ऐसी ही नाममात्र कार्रवाई चल रही है।

लोग स्वयं जागरूक हों

विभाग की ओर से ऐसे भवनों को चिह्नित कर लिया गया है। इसे तोड़ने का काम मकान मालिक का है, न कि विभाग का। ऐसे में लोगों को स्वयं जागरूक होना होगा। - आदित्य देशवाल, एक्सईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग रेवाड़ी




मामले में शिकायत आने पर पीडब्ल्यूडी, बीएंडआर को भेज दी जाती हैं। उनके अधिकारी भवन का निरीक्षण करके नगर परिषद को बताते हैं। इसके बाद ही नप अधिकारी ऐसे भवन मालिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हैं।

- पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी
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