{"_id":"67b4cfbf900237dbae0cd2b4","slug":"livestock-census-2-percent-increase-this-time-compared-to-2019-rewari-news-c-198-1-rew1001-215440-2025-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: पशुधन गणना.... 2019 की तुलना में इस बार 2 फीसदी की बढ़ोतरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: पशुधन गणना.... 2019 की तुलना में इस बार 2 फीसदी की बढ़ोतरी
विज्ञापन
फोटो : 12पशुओं की गणना करते विभाग की टीम। स्रोत : विभाग
रेवाड़ी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग का 21वां पशुधन गणना अभियान जिले में जारी है। इसके लिए विभाग की टीमें जिले में घर-घर जाकर पूरी तरह डिजिटल तौर पर पशुओं की गणना कर रही हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 2019 की तुलना में इस बार पशुओं की संख्या में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
रेवाड़ी के सभी 61 शहरी वार्डों में रेवाड़ी के 31, धारूहेड़ा के 17, बावल 13 और 424 गांवों में पशु गणना कार्य के लिए विभाग ने 72 वीएलडीए को बतौर पशु प्रगणक (इन्युमरेटर) व 17 पशु चिकित्सकों की बतौर पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) की ड्यूटी लगाई है। इसी के साथ जिला स्तर पर एक जिला नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है। 21वीं पशु गणना में जिले के कुक्कुट (पोल्ट्री) और पालतू पशुओं की 16 प्रजातियों की गणना की जा रही है।
विभाग की तरफ से यह कार्य 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। पशुधन गणना से पशुपालन से जुड़े लोगों के पास उपलब्ध डेयरी उपकरणों सहित अन्य जानकारी विभाग को मिल सकेगी। इससे जिलेभर में पशुओं की सहायता के लिए सही इंतजाम किए जा सकेंगे।
विज्ञापन
पांच साल के अंतर पर की जाती है गणना
प्रत्येक 5 साल के अंतराल में पशु गणना का कार्य किया जाता है। पशुधन गणना से पशुपालन व डेयरिंग विभाग को जिलेभर की पशुधन की गिनती, उनकी प्रजाति, नस्ल, उत्पादकता स्थिति, उम्र, श्रेणी, पशुपालन के रुझान की जानकारी प्राप्त हो जाएगी। विभाग के अधिकारियों के मानें तो इसी आधार पर यह तय किया जाएगा कि जिलेभर में विभाग को पशुओं की सहायता के लिए कितनी मात्रा में दवाइयां, ब्रिडिंग सर्विस के लिए कितने टीके और वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। वहीं, इसी के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में नए पशु अस्पताल खोलने का निर्णय भी विभाग लेगा।
19वीं और 20वीं पशुधन गणना में अंतरः
पशु-- -- -- -- -- -- 2019-- -- अंतर प्रतिशत में-- -- 2012
गाय-- -- -- -- -- -44310-- -- 0.16-- -- -- -- -- 44382
भैंस-- -- -- -- -- -160423-- -23.17-- -- -- -- -- 208796
भेड़-- -- -- -- -- -- 5384-- -- 38-- -- -- -- -- -- 8684
बकरी-- -- -- -- -- -24127-- -3.83-- -- -- -- -- -23237
घोड़ा व घोड़ी-- -- -- -276-- -़49.08-- -- -- -- -- -- 542
खच्चर-- -- -- -- -- -248-- -- 70.44-- -- -- -- -- 839
गधा-- -- -- -- -- -- -22-- -- -78-- -- -- -- -- -- 100
सुअर-- -- -- -- -- -7457-- -- 177.42-- -- -- -- -- 2688
ऊंट-- -- -- -- -- -- -219-- -- 78.19-- -- -- -- -- -1004
कुत्ता-- -- -- -- -- -- 1877-- -- 70.19-- -- -- -- -- -6296
कुक्कुट (पोल्ट्री)-- -- -441638-- -34.69-- -- -- -- -- -676214
नोटः डाटा पशुपालन एवं डेयरिंग विभागद्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
पोल्ट्री सहित पशुओं की 16 प्रजातियों की गणना होगी
21वीं पशुगणना के तहत जिलेभर में कुक्कुट (पोल्ट्री) और पालतू पशुओं की 16 प्रजातियों गाय, भैंस, भेड़, बक भेड़, बकरी, सूअर, ऊंट, घोड़े, खच्चर, पोनी, गधे, याक, मिथुन, खरगोश, हाथी, कुत्ते और मुर्गी, टर्की, बटेर और बतख की 219 नस्लों के साथ ही बेसहारा पशुओं की गणना की जाएगी।
2019 में जिले में घटे थे ऊंट, गधे, कुत्ते और खच्चर
2012 और 2019 में की गई गणना के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में करीब 52 हजार 140 पशुधन की संख्या में गिरावट आई थी। 2012 में जिले में पशुधन की संख्या 2,96,568 थी, जो 2019 में घटकर 2,44,428 पहुंच गई थी। इस दौरान सबसे ज्यादा ऊंट, गधा, कुत्ता, खच्चर, गाय, भैंस, भेड़, घोड़ा व घोड़ी की संख्या घटी थी। वहीं, इस दौरान सूअर और बकरी की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
वर्जन-
-21वीं पशु गणना की जा रही है। इसी के आधार पर प्रदेश सरकार विभिन्न स्तरों पर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक योजनाओं के सूत्रीकरण, संसाधन आवंटन करती है। लोगों को पशुधन गणना में सहयोग करना चाहिए।
- डॉ. नसीब सिंह यादव, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग
विज्ञापन
रेवाड़ी के सभी 61 शहरी वार्डों में रेवाड़ी के 31, धारूहेड़ा के 17, बावल 13 और 424 गांवों में पशु गणना कार्य के लिए विभाग ने 72 वीएलडीए को बतौर पशु प्रगणक (इन्युमरेटर) व 17 पशु चिकित्सकों की बतौर पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) की ड्यूटी लगाई है। इसी के साथ जिला स्तर पर एक जिला नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है। 21वीं पशु गणना में जिले के कुक्कुट (पोल्ट्री) और पालतू पशुओं की 16 प्रजातियों की गणना की जा रही है।
विज्ञापन
विभाग की तरफ से यह कार्य 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। पशुधन गणना से पशुपालन से जुड़े लोगों के पास उपलब्ध डेयरी उपकरणों सहित अन्य जानकारी विभाग को मिल सकेगी। इससे जिलेभर में पशुओं की सहायता के लिए सही इंतजाम किए जा सकेंगे।
विज्ञापन
पांच साल के अंतर पर की जाती है गणना
प्रत्येक 5 साल के अंतराल में पशु गणना का कार्य किया जाता है। पशुधन गणना से पशुपालन व डेयरिंग विभाग को जिलेभर की पशुधन की गिनती, उनकी प्रजाति, नस्ल, उत्पादकता स्थिति, उम्र, श्रेणी, पशुपालन के रुझान की जानकारी प्राप्त हो जाएगी। विभाग के अधिकारियों के मानें तो इसी आधार पर यह तय किया जाएगा कि जिलेभर में विभाग को पशुओं की सहायता के लिए कितनी मात्रा में दवाइयां, ब्रिडिंग सर्विस के लिए कितने टीके और वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। वहीं, इसी के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में नए पशु अस्पताल खोलने का निर्णय भी विभाग लेगा।
19वीं और 20वीं पशुधन गणना में अंतरः
पशु
गाय
भैंस
भेड़
बकरी
घोड़ा व घोड़ी
खच्चर
गधा
सुअर
ऊंट
कुत्ता
कुक्कुट (पोल्ट्री)
नोटः डाटा पशुपालन एवं डेयरिंग विभागद्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार।
पोल्ट्री सहित पशुओं की 16 प्रजातियों की गणना होगी
21वीं पशुगणना के तहत जिलेभर में कुक्कुट (पोल्ट्री) और पालतू पशुओं की 16 प्रजातियों गाय, भैंस, भेड़, बक भेड़, बकरी, सूअर, ऊंट, घोड़े, खच्चर, पोनी, गधे, याक, मिथुन, खरगोश, हाथी, कुत्ते और मुर्गी, टर्की, बटेर और बतख की 219 नस्लों के साथ ही बेसहारा पशुओं की गणना की जाएगी।
2019 में जिले में घटे थे ऊंट, गधे, कुत्ते और खच्चर
2012 और 2019 में की गई गणना के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में करीब 52 हजार 140 पशुधन की संख्या में गिरावट आई थी। 2012 में जिले में पशुधन की संख्या 2,96,568 थी, जो 2019 में घटकर 2,44,428 पहुंच गई थी। इस दौरान सबसे ज्यादा ऊंट, गधा, कुत्ता, खच्चर, गाय, भैंस, भेड़, घोड़ा व घोड़ी की संख्या घटी थी। वहीं, इस दौरान सूअर और बकरी की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
वर्जन-
-21वीं पशु गणना की जा रही है। इसी के आधार पर प्रदेश सरकार विभिन्न स्तरों पर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक योजनाओं के सूत्रीकरण, संसाधन आवंटन करती है। लोगों को पशुधन गणना में सहयोग करना चाहिए।
- डॉ. नसीब सिंह यादव, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग