{"_id":"65d38e9919b6c165800c1c09","slug":"litterateur-gopal-vashishtha-received-honour-rewari-news-c-198-1-rew1001-201002-2024-02-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: साहित्यकार गोपाल वशिष्ठ को मिला सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: साहित्यकार गोपाल वशिष्ठ को मिला सम्मान
Mon, 19 Feb 2024 10:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 19 Feb 2024 10:53 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में रचनाधर्मिता एवं मंच संचालन के लिए साहित्यकार गोपाल वशिष्ठ को स
रेवाड़ी। अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड फाउंडेशन की ओर से दिल्ली स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के महामंत्री व जैन पब्लिक स्कूल के हिंदी विभागाध्यक्ष रंगकर्मी साहित्यकार गोपाल वशिष्ठ को अमृत-कुंभ सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मान रचनाधर्मिता और मंच संचालन के लिए दिया गया है।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ व असम, मिजोरम, नागालैंड एवं अंडमान निकोबार के निवर्तमान राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने वशिष्ठ के संचालन और हिंदी सेवा की सराहना की। फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश वत्स ने बताया कि अमृत-कुंभ सम्मान के लिए देश के विभिन्न प्रांतों से 3500 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी। प्रतिनिधि मंडल ने श्रेष्ठ रचनाओं को कसौटी पर खरा पाया। अंतिम चरण में करीब 50 रचनाएं शामिल की गईं जिसमें गोपाल वशिष्ठ की रचना उल्लेखनीय रही। मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि हिंदी आत्मा की भाषा है। इसे उच्च मुकाम तक पहुंचाने में मीडिया, हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कर्मठ शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण है। हिंदी की वैश्विक पहचान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का योगदान अतुलनीय है। हिंदी भविष्य की भाषा है और देश के सांस्कृतिक उत्थान के लिए इसका उत्थान आवश्यक है। कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, चंडीगढ़ आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विज्ञापन
कार्यक्रम में प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ व असम, मिजोरम, नागालैंड एवं अंडमान निकोबार के निवर्तमान राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने वशिष्ठ के संचालन और हिंदी सेवा की सराहना की। फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश वत्स ने बताया कि अमृत-कुंभ सम्मान के लिए देश के विभिन्न प्रांतों से 3500 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी। प्रतिनिधि मंडल ने श्रेष्ठ रचनाओं को कसौटी पर खरा पाया। अंतिम चरण में करीब 50 रचनाएं शामिल की गईं जिसमें गोपाल वशिष्ठ की रचना उल्लेखनीय रही। मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि हिंदी आत्मा की भाषा है। इसे उच्च मुकाम तक पहुंचाने में मीडिया, हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कर्मठ शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण है। हिंदी की वैश्विक पहचान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का योगदान अतुलनीय है। हिंदी भविष्य की भाषा है और देश के सांस्कृतिक उत्थान के लिए इसका उत्थान आवश्यक है। कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, चंडीगढ़ आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विज्ञापन