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किसान आंदोलन-2 : बॉर्डर सील, समय पर स्कूल पहुंचने को परीक्षा से पहले ‘परीक्षा’ दे रही बेटियां

Tue, 20 Feb 2024 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 20 Feb 2024 11:49 PM IST
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Kisan Andolan-2: Border sealed, daughters giving 'examination' before exams to reach school on time
परीक्षा के पहले की परीक्षा… सोनीपत के कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर रखे बैरिकेड को पार करने के लिए मशक
सोनीपत। किसानाें के दिल्ली कूच को लेकर बॉर्डर सील होने के बाद जनमानस परेशान है, लेकिन इन दिनों ज्यादा परेशानी छात्राओं को झेलनी पड़ रही है। कुंडली क्षेत्र से पढ़ने के लिए नरेला और आसपास के क्षेत्रों में जाने वाली बेटियों को रोजाना करीब चार किलोमीटर का रास्ता पैदल तय कर स्कूल और घर पहुंचना पड़ रहा है। फिर भी समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहीं। आने-जाने में ज्यादातर समय खराब होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि इन दिनों परीक्षाएं चल रही हैं। छात्राओं ने मांग की जल्द मार्ग खोला जाए।
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किसानों के दिल्ली कूच के एलान के बाद पुलिस ने 13 फरवरी को कुंडली बार्डर को सील कर दिया था। किसानों की सरकार के साथ चल रही बातचीत से उम्मीद की जाने लगी थी कि अब मार्ग खुल सकता है। सोमवार को किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को नकारते हुए दिल्ली कूच की हुंकार भर दी है। इससे बॉर्डर खुलने की सभी उम्मीद धरी रह गई हैं। इन दिनों सीबीएसई की परीक्षाएं चल रही हैं। कुंडली क्षेत्र के बड़ी संख्या में विद्यार्थी नरेला व आसपास के दिल्ली क्षेत्र में पढ़ने के लिए पहुंचते हैं।
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बॉर्डर सील होने से विद्यार्थियों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। छात्राओं ने मांग की है कि कम से कम दो पहिया वाहनों के लिए तो रास्ता खोल जाए, ताकि वह समय पर स्कूल पहुंच सकें।
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बोली छात्राएं
-रोजाना करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आ-जा रही हूं। रोजाना एक तरफ आने या जाने में एक घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। यही नहीं रास्तों पर डाले गए बैरिकेड पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है। समय पर स्कूल पहुंच सके, इसके लिए डेढ़ घंटा पहले निकलती हूं। फिर भी कई बार समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाती। सरकार को कम से कम दो पहिया वाहनों के लिए मार्ग खेालना चाहिए।-छवी, छात्रा

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-पैदल आने-जाने में ही अधिकतर समय खराब हो जाता है। इससे वह परीक्षाओं में न तो समय पर स्कूल पहुंच पा रही और ना ही बेहतर तरीके से पेपर की तैयारी कर पा रही हूं। जब तक घर नहीं पहुंच जाती, तब तक घरवालों को भी चिंता सताती रहती है। ऑटो चालकों ने भी किराया बढ़ा दिया है। सरकार कम से कम दो पहिया वाहनों के लिए मार्ग खोले, जिससे समय पर स्कूल पहुंच सकें।-तृप्ति, छात्रा
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