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गाड़ी और वाणी में ब्रेक बहुत जरूरी : पं. प्रदीप मिश्रा
Sat, 23 Mar 2024 02:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 23 Mar 2024 02:56 PM IST
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रेवाड़ी। शहर के सेक्टर-18 स्थित हुडा मैदान में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं, सुनते हैं सच्चे दिल की पुकार। एक हाथी की पुकार सुनकर भगवान दौड़े आए, हाथी मनुष्य नहीं जीव था। दिल से पुकारना और दिखावे से पुकारने में अंतर है।
कहा कि जब भगवान अपने भक्त के बुलाने पर नंगे पांव भागे चले आए। जैसे एक मां अपने बच्चे की पुकार सुनकर आती है। उसी प्रकार भगवान हैं। शिवपुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गाड़ी और वाणी में ब्रेक बहुत जरूरी है। यदि ब्रेक नहीं लगेगा तो व्यक्ति का जीवन नष्ट हो जाएगा। इसलिए बोलने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि हम क्या कह रहे हैं। हमारी वाणी से किसी को ऐसी चोट नहीं लग जाए कि वह अंदर से घायल हो जाए। उन्होंने कहा कि जीभ का घाव जल्दी भर जाता है, लेकिन जीभ से दिया हुआ घाव पूरी जिंदगी नहीं भरता।
इसलिए गाड़ी और वाणी दोनों पर नियंत्रण करना आना चाहिए। कथा में पंडित मिश्रा ने कहा कि दुनिया में धनाढ्य व्यक्ति अपने दुख को बेच नहीं सकता। न ही वह सुख खरीद सकता है। कर्मगति से जो लिखा गया है वह उसको भोगना ही होगा। श्रद्धालु आस्था के साथ घंटों बैठकर कथा का आनंद ले रहे हैं। वहीं कथा के बीच होने वाले भजनों पर झूम भी रहे हैं। कथा के चौथे दिन भी भीषण गर्मी और उमस से लोग बेहाल रहे ऐसे हालातों में भी लोग कथा सुनने के लिए घंटों डटे रहे।
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कहा कि जब भगवान अपने भक्त के बुलाने पर नंगे पांव भागे चले आए। जैसे एक मां अपने बच्चे की पुकार सुनकर आती है। उसी प्रकार भगवान हैं। शिवपुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गाड़ी और वाणी में ब्रेक बहुत जरूरी है। यदि ब्रेक नहीं लगेगा तो व्यक्ति का जीवन नष्ट हो जाएगा। इसलिए बोलने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि हम क्या कह रहे हैं। हमारी वाणी से किसी को ऐसी चोट नहीं लग जाए कि वह अंदर से घायल हो जाए। उन्होंने कहा कि जीभ का घाव जल्दी भर जाता है, लेकिन जीभ से दिया हुआ घाव पूरी जिंदगी नहीं भरता।
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इसलिए गाड़ी और वाणी दोनों पर नियंत्रण करना आना चाहिए। कथा में पंडित मिश्रा ने कहा कि दुनिया में धनाढ्य व्यक्ति अपने दुख को बेच नहीं सकता। न ही वह सुख खरीद सकता है। कर्मगति से जो लिखा गया है वह उसको भोगना ही होगा। श्रद्धालु आस्था के साथ घंटों बैठकर कथा का आनंद ले रहे हैं। वहीं कथा के बीच होने वाले भजनों पर झूम भी रहे हैं। कथा के चौथे दिन भी भीषण गर्मी और उमस से लोग बेहाल रहे ऐसे हालातों में भी लोग कथा सुनने के लिए घंटों डटे रहे।
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