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डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से बढ़ रही लागत : विजय
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। राष्ट्रीय नवचेतना मंच के राष्ट्रीय संयोजक विजय सोमाणी ने पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों, महंगाई और उसके कृषि तथा ग्रामीण जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
कहा कि ईंधन की कीमतें केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं हैं। इसका सीधा असर खेती, खाद्यान्न ढुलाई, सिंचाई, उर्वरक और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। जब डीजल महंगा होता है तो ट्रैक्टर, पंपसेट और मंडियों तक माल पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि देश का किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत से जूझ रहा है। ऐसे में ईंधन पर अत्यधिक कर का बोझ उसकी लागत बढ़ा देता है। सरकार को चाहिए कि वह कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले डीजल पर विशेष रियायत दे या कृषि क्षेत्र को ईंधन कर से आंशिक राहत प्रदान करे, ताकि उत्पादन लागत कम हो और किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
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सोमाणी ने कहा कि महंगाई सीधे लोगों की थाली, बच्चों की शिक्षा और परिवार की बचत पर असर डालती है। ऐसे में राजस्व वृद्धि के साथ-साथ जनकल्याण का संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले करों की संरचना पर पुनर्विचार करें और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
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रेवाड़ी। राष्ट्रीय नवचेतना मंच के राष्ट्रीय संयोजक विजय सोमाणी ने पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों, महंगाई और उसके कृषि तथा ग्रामीण जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
कहा कि ईंधन की कीमतें केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं हैं। इसका सीधा असर खेती, खाद्यान्न ढुलाई, सिंचाई, उर्वरक और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। जब डीजल महंगा होता है तो ट्रैक्टर, पंपसेट और मंडियों तक माल पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है।
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उन्होंने कहा कि देश का किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत से जूझ रहा है। ऐसे में ईंधन पर अत्यधिक कर का बोझ उसकी लागत बढ़ा देता है। सरकार को चाहिए कि वह कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले डीजल पर विशेष रियायत दे या कृषि क्षेत्र को ईंधन कर से आंशिक राहत प्रदान करे, ताकि उत्पादन लागत कम हो और किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
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सोमाणी ने कहा कि महंगाई सीधे लोगों की थाली, बच्चों की शिक्षा और परिवार की बचत पर असर डालती है। ऐसे में राजस्व वृद्धि के साथ-साथ जनकल्याण का संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले करों की संरचना पर पुनर्विचार करें और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।