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आधुनिकता की दौड़ और तनाव पड़ रहा है जिंदगी पर भारी

Tue, 10 Sep 2019 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2019 12:54 AM IST
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in the race for modernity, it weighs heavily
खत्म होती संयुक्त परिवार की प्रथा और भागदौड़ भरी जिंदगी तनाव को जन्म दे रही है। कई मामलों में यह तनाव आत्महत्या का कारण बन रहा है। कुछ सालों में ऐसे मामलों में इजाफा हुआ है जिसमें लोगों ने मौत को गले लगा लिया। खासकर युवा अवस्था में सुसाइड के मामले ज्यादा देखे गए हैं। इसके साथ ही आधुनिकता की दौड़ में तनाव जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। पिछले 6 साल के दौरान जिले में 98 लोगों ने आत्महत्या कर ली है।
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कारण भले ही निजी हो, लेकिन सामाजिक परिदृश्य व लोगों की मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोग छोटी-छोटी बात बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसके पीछे भौतिकवादी युग में शिथिल होते सामाजिक संबंधों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। लोगों के संबंध सीमित हो गए हैं। लिहाजा परेशानी की स्थिति में वे अकेलापन महसूस करने लगते हैं। यही आत्महत्या के कारण बन जाते। जिले में औसत हर 22 दिन में एक व्यक्ति खुदकुशी कर रहा है। विकास की धारा में लोगों की मानसिकता संकीर्ण होती जा रही है। आर्थिक व पारिवारिक तनाव बढ़ा है।
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आवेश में जान देने से नहीं हिचकते
आपसी मनमुटाव व कहासुनी के बाद आवेश में कई लोग जिंदगी को मौत के मुंह में धकेलने से भी नहीं हिच-किचाते। एकल परिवार व एकांकी जीवनवृति, अपनों से अनबन,अविश्वास की भावना सहित तमाम ऐसे कारण हैं, जिनके चलते लोग आत्महत्या कर बैठते हैं।
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महिलाएं
महिलाएं पुरुषों के मुकाबले मजबूत हैं। महिलाओं को भले ही कमजोर दिल माना जा रहा हो, लेकिन आत्महत्या के मामले में पुरुषों की तुलना में मजबूत हैं। इस साल जिले में अब तक कुछेक महिलाओं ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है। जबकि मौत को गले लगाने वाले पुरुष कई हैं।
युवाओं में अवसाद ज्यादा
युवाओं में डिप्रेशन ज्यादा है। जिससे आत्महत्या करने वालों में अधिकांश युवा है। प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि काम का दबाव, नशे की लत, आत्मनिर्भरता की कमी, प्रेम प्रसंग के चलते युवा डिप्रेशन में जल्दी आ जाते हैं और मौत को गले लगा लेते हैं।
किस साल कितने लोगों ने की आत्महत्या
2014 में 20 लोगों ने आत्महत्या की, 2015 में 6 लोगों ने, 2016 में 16 लोगों ने, 2017 में 19 लोगों ने, 2018 में 23 एवं 30 जून 2019 तक 14 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार जिले में पिछले 6 साल में 98 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। आत्महत्या को रोकने के लिए लोगों को मेडिटेशन करते रहना चाहिए।
- साकेत धींगड़ा, आरटीआई कार्यकर्ता
जब व्यक्ति को लगता है कि वह समस्या को कंट्रोल नहीं कर पाता है तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठाता है। इसके साथ ही जब व्यक्ति को लगता है कि वह हेल्थलेस, होपलेस व वेल्थलेस तीनों से विश्वास उठ जाता है तो वह डिप्रेशन में आ जाता है। ऐसे में परिवार व समाज के लोगों को सहयोग करना चाहिए। साथ ही व्यक्ति अपनी बातों को एक-दूसरे से शेयर करें।
- डॉ. विजय भार्गव, मनोचिकित्सक
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