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न्योता नहीं मिला, इसलिए किसान आंदोलन में नहीं गया : चढ़ूनी

Fri, 21 Mar 2025 12:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 21 Mar 2025 12:33 AM IST
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I did not get an invitation, so I did not go to the farmers' protest: Chadhuni
फोटो : 09नई अनाज मंडी स्थित किसान भवन में भारतीय किसान यूनियन चढूनी के नेता गुरनाम सिंह चढूनी
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने वीरवार को नई अनाज मंडी स्थित किसान भवन में किसानों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने संगठन के विस्तार को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्हें किसान आंदोलन में सम्मिलित होने का न्योता नहीं आया था। इस वजह से वह आंदोलन में नहीं गए।
हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई से खुद को दूर करते हुए गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि अगर वह इस आंदोलन के बारे में कुछ बोलेंगे तो लोग कहेंगे कि वह आपत्तिजनक बोलते हैं। आंदोलन की शुरूआत ही एसकेएम को दो फाड़ करने के बाद हुई थी। इसलिए इस आंदोलन को लेकर वही लोग बता सकते हैं जो आंदोलन में बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अपनी आवाज बुलंद करने का अधिकार सभी को है। अगर आवाज बुलंद नहीं की जाएगी तो सरकार कैसे मानेगी। चढूनी ने कहा कि केंद्र सरकार किसान नेताओं के साथ बातचीत के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। एक-एक महीने में किसान नेताओं के साथ बैठक हो रही है। सरकार कुछ करना ही नहीं चाहती थी। आंदोलन चलाने वाले नेता ही अब इसके परिणाम के बारे में बता पाएंगे।
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रेवाड़ी की अनाज मंडी में सरसों लैब नहीं

चढ़ूनी ने कहा कि बीमा के लिए भी ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को परेशानी आ रही है। बीमा कंपनियां किसानों के साथ मनमानी कर रही हैं। सरकार को खुद की कंपनी बनानी चाहिए, जिससे किसानों को भी राहत मिलेगी और सरकार का भी इससे फायदा होगा। रेवाड़ी की अनाज मंडी में सरसों लैब नहीं है। बिना लैब के किसानों को सही भाव नहीं मिलेगा। सरसों लैब तो प्रदेश की हर अनाज मंडी में होनी चाहिए। किसी निजी फर्म की लैब को किसान नहीं मानते, हर मंडी में सरकारी लैब होना चाहिए।
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समस्याओं को उठाने का दिया आश्वासन

किसान भवन में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने किसानों की समस्याएं उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से पाम ऑयल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पाम ऑयल हेल्थ के लिए खराब है। पाम ऑयल पर प्रतिबंध लगेगा तो सरसों उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिलेगा। ऐसा हुआ तो सरसों का भाव 7 हजार पहुंच जाएगा। चढूनी ने कहा कि हर गांव तक संगठन का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए हर जिले में वह बैठक कर रहे हैं। संगठन में अब किसानों के साथ-साथ खेतिहर मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा। खेतिहर मजदूर किसान से जुड़ा वर्ग है। किसान और खेतिहर मजदूरों को संगठित करने का कार्य अब भाकियू करेगी।
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