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Rewari News: एचएसपीसीबी और पीएचईडी हुए आमने सामने, एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

Sat, 07 Dec 2024 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 07 Dec 2024 11:33 PM IST
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HSPCB and PHED face to face, both departments are not paying attention
साहबी बैराज जिसमें छोड़ा जा रहा है एसटीपी प्लांटों की तरफ से गंदा पानी। संवाद
रेवाड़ी। साहबी बैराज में एसटीपी प्लांटों के दूषित पानी छोड़े जाने के मामले में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) आमने-सामने आ चुके हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके सीवरेज सिस्टम में जो औद्योगिक इकाइयां अपशिष्ट निपटान नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।
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विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बनती है, क्योंकि प्रदूषण रोकने का कार्य इन्हीं का है। वहीं, प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज में कोई पानी छोड़ रहा है और उन्हें पता भी नहीं चल रहा है, जबकि इसे खुद भी विभाग रोक सकता है। मामले में एनजीटी ने कहा था कि पानी सीवर लाइन में जा रहा है, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग आखिर किसका इंतजार कर रहा है? विभाग पानी को सीवर में आने से रोक सकता था। संवाद
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एसटीपी की गुणवत्ता की जांच के बाद फंसा था पीएचईडी
बता दें कि इस पूरे प्रकरण में पिछले दिनों जब जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की जांच केंद्र केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से की गई तो संशोधित पानी की गुणवत्ता काफी गंभीर श्रेणी में पाई गई थी। इस पर अभियांत्रिकी विभाग ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पानी की सैंपलिंग कराई थी। उसके बाद पता चला कि सीवरेज में औद्योगिक इकाइयां गंदा पानी छोड़ रही हैं। फिर टीम तैयार कर चिन्हित कर 169 औद्योगिक इकाइयों की लिस्ट एनजीटी को सौंपी। अगर एसटीपी की जांच नहीं होती तो यह कभी पता ही नहीं चल पाता की सीवरेज में औद्योगिक इकाइयां भी गंदा पानी छोड़ रही हैं। मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर को है।
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सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया था मुद्दा
बता दें कि यह पूरा मामला साहबी बैराज में एसटीपी के पानी छोड़ने से जुड़ा हुआ है। मामले में याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने जिले के 6 एसटीपी द्वारा शोधित किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि यह पानी काफी गंदा है। इसके निस्तारण में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण साहबी बैराज का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
साहबी बैराज को कृत्रिम झील बनाने का था प्रोजेक्ट, नहीं चढ़ी योजना सिरे
साहबी बैराज में पहली बार 2017 में लगातार 66 दिन नहरी पानी से 20,274 फीट तक पूरा भरा गया था। 2018 में 68 दिन से लगातार बैराज को 24,042 फीट तक पानी से भरा गया था। यमुना का भी अतिरिक्त पानी बैराज में पहुंचाया गया था। तब पूर्व सीएम मनोहर लाल ने कहा था कि पर्यटकों के लिए इसे रमणीक स्थल बनाया जाएगा। यहां पर रेस्टोरेंट व ठहरने के लिए हट्स भी बनाए जाएंगे। बोटिंग के बाद फूड कोर्ट, एडवेंचर कैंप की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साहबी क्षेत्र के कई किलोमीटर में फैले बैराज में नेचर ट्रेल भी विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना 18 किलोमीटर तक ट्रेल बनाने की थी, ताकि एक बेहतर पर्यटक स्थल बनाया जा सके। परंतु 6 साल बाद यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।



जल प्रदूषण रोकने का कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। क्योंकि औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई उन्हीं की टीम कर सकती है। हमने 169 औद्योगिक इकाइयां जो जल अपशिष्ट नियमों का उल्लंघन कर रही है, चिन्हित कर रिपोर्ट भेज दी है।

-विनय चौहान, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, रेवाड़ी।

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बोर्ड की तरफ से 142 औद्योगिक कंपनियों की जांच की गई थी, जो कि ठीक मिली थीं। जिन 169 इकाइयों की बात जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कर रहा है, उन पर कार्रवाई खुद ही विभाग को करनी चाहिए। क्योंकि उनके सीवर सिस्टम में पानी वह छोड़ा जा रहा है।
-हरीश, आरओ, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रेवाड़ी।
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