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घोषणा के बाद भी नहीं की गई बाजरे की सरकारी खरीद : राजेंद्र
Sat, 03 Oct 2026 12:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:36 AM IST
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रेवाड़ी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने अनाज मंडी में बाजरा बेचने पहुंचे किसानों को हो रही परेशानियों पर चिंता जताते हुए सरकार और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 अक्तूबर से बाजरे की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने एक भी दाना नहीं खरीदा है।
उन्होंने कहा कि मंडी में किसानों की एंट्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां हैं। किसानों ने अगर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का विवरण दर्ज कर दिया है तो उसका सत्यापन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिले में अभी तक पोर्टल पर दर्ज फसल का 42 प्रतिशत ही सत्यापन हुआ है। सत्यापन नहीं होने के कारण किसानों को मंडी से लौटना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आढ़तियों की ओर से बाजरा 2190 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जा रहा है, जबकि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। सवाल उठाया कि 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर मिलने के बाद भी किसानों को एमएसपी के बराबर पूरी राशि कैसे मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों का भावांतर भी किसानों को नहीं मिला है।
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उन्होंने मांग की है कि सरकार किसानों की पूरी बाजरा फसल 2900 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदे और राशि सीधे बैंक खातों में जमा करे। खरीद एजेंसी को भावांतर की भरपाई सरकार करे। उन्होंने मंडी में किसानों के लिए सस्ता भोजन, शुद्ध पेयजल और विश्राम की व्यवस्था करने तथा किसान भवन को ठहरने के लिए उपलब्ध कराने की मांग भी की।
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उन्होंने कहा कि मंडी में किसानों की एंट्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां हैं। किसानों ने अगर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का विवरण दर्ज कर दिया है तो उसका सत्यापन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिले में अभी तक पोर्टल पर दर्ज फसल का 42 प्रतिशत ही सत्यापन हुआ है। सत्यापन नहीं होने के कारण किसानों को मंडी से लौटना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि आढ़तियों की ओर से बाजरा 2190 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जा रहा है, जबकि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। सवाल उठाया कि 600 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर मिलने के बाद भी किसानों को एमएसपी के बराबर पूरी राशि कैसे मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों का भावांतर भी किसानों को नहीं मिला है।
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उन्होंने मांग की है कि सरकार किसानों की पूरी बाजरा फसल 2900 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदे और राशि सीधे बैंक खातों में जमा करे। खरीद एजेंसी को भावांतर की भरपाई सरकार करे। उन्होंने मंडी में किसानों के लिए सस्ता भोजन, शुद्ध पेयजल और विश्राम की व्यवस्था करने तथा किसान भवन को ठहरने के लिए उपलब्ध कराने की मांग भी की।