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Rewari News: मनचाहे वर के लिए लड़कियों ने मां कूष्मांडा की पूजा की
Fri, 12 Apr 2024 10:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 12 Apr 2024 10:19 PM IST
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रेवाड़ी। मंदिर में पूजा अर्चना करते भक्त। संवाद
रेवाड़ी। नवरात्र के चौथे दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की गई। पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालु मंदिरों में उमड़ पड़े। देवी कूष्मांडा की पूजा अविवाहित लड़कियां करती हैं, तो उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। सुहागन स्त्रियां को अखंड सौभाग्य मिलता है। इस दौरान लोगों ने माता के जयकारे भी लगाए।
बारा हजारी स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित अयोध्या प्रसाद तिवारी ने बताया कि मंदिरों में शाम को भजन-कीर्तन हुआ। शहर के दुर्गा मंदिर, मां मनसा देवी मंदिर, गोल चक्कर स्थित प्राचीन देवी मंदिर आदि में पूजन किया गया। भक्तों ने मैया से आशीर्वाद मांगा। शाम को मां की आरती के बाद भोग लगाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। आज पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं।
मां के शृंगार के लिए खूबसूरत रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। आज के दिन भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए। यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए।
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बारा हजारी स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित अयोध्या प्रसाद तिवारी ने बताया कि मंदिरों में शाम को भजन-कीर्तन हुआ। शहर के दुर्गा मंदिर, मां मनसा देवी मंदिर, गोल चक्कर स्थित प्राचीन देवी मंदिर आदि में पूजन किया गया। भक्तों ने मैया से आशीर्वाद मांगा। शाम को मां की आरती के बाद भोग लगाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। आज पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं।
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मां के शृंगार के लिए खूबसूरत रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। आज के दिन भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए। यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए।
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