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एक रुपये शगुन लेकर डाली वरमाला
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
Updated Mon, 23 Nov 2015 01:27 AM IST
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रेवाड़ी। दहेज जैसी कुप्रथा पर प्रहार करने के लिए रामपुरा क्षेत्र में एक नई शुरूआत हुई है। इस दौरान न तो लड़की पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर था और न ही वर पक्ष। लेकिन शादी से पहले ही वर कुलदीप और वधू श्वेता यादव ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सादगी से शादी करने का फैसला लिया और इसमें परिजनों की भी रजामंदी ली। वर पक्ष ने महज एक रुपये शगुन लिया और वधू पक्ष ने भी शाम को बेटी के ससुराल में छोटा सा संयुक्त प्रीति भोज करवाया। इस नव युगल ने दहेज लोभियों को सुधार का संदेश भी दिया।
खोरी स्टेशन पर स्टेशन सुपरिंटेंडेंट कैलाश चंद की तीन बेटियों में सबसे छोटी बेटी श्वेता यादव एमबीए, एमकॉम पास हैं और पी.एचडी कर रही हैं। वह जिले के एक कॉलेज में अध्यापिका भी हैं। पेशे से प्रापर्टी डीलर सूबे सिंह का बेटा कुलदीप भी दुनिया की जानीमानी हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी एयरबस के तकनीकी विभाग में जॉब करता है। ऐसे में आर्थिक रूप से सक्षम दोनों पक्षों ने आम सहमति से यह फैसला लिया है।
- दिन में सगाई, शाम को डाली वरमाला
वर-वधू ने श्वेता के घर के मेनगेट पर रविवार को महज एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी की। डेढ़ बजे धारूहेड़ा निवासी कुलदीप ने श्वेता और कुलदीप ने एक-दूसरे को सगाई की अंगूठी पहनाई और चंद मिनट बाद ही वरमाला भी डाल दी। इसके पीछे दोनों ने कहा कि समारोह में लाखों रुपये बर्बाद करना ही मांगने की आदत जगाता है। रात की शादी भी ज्यादा तड़क-भड़क में होती है, दिन में कई खर्च कम हो जाते हैं।
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खोरी स्टेशन पर स्टेशन सुपरिंटेंडेंट कैलाश चंद की तीन बेटियों में सबसे छोटी बेटी श्वेता यादव एमबीए, एमकॉम पास हैं और पी.एचडी कर रही हैं। वह जिले के एक कॉलेज में अध्यापिका भी हैं। पेशे से प्रापर्टी डीलर सूबे सिंह का बेटा कुलदीप भी दुनिया की जानीमानी हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी एयरबस के तकनीकी विभाग में जॉब करता है। ऐसे में आर्थिक रूप से सक्षम दोनों पक्षों ने आम सहमति से यह फैसला लिया है।
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- दिन में सगाई, शाम को डाली वरमाला
वर-वधू ने श्वेता के घर के मेनगेट पर रविवार को महज एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी की। डेढ़ बजे धारूहेड़ा निवासी कुलदीप ने श्वेता और कुलदीप ने एक-दूसरे को सगाई की अंगूठी पहनाई और चंद मिनट बाद ही वरमाला भी डाल दी। इसके पीछे दोनों ने कहा कि समारोह में लाखों रुपये बर्बाद करना ही मांगने की आदत जगाता है। रात की शादी भी ज्यादा तड़क-भड़क में होती है, दिन में कई खर्च कम हो जाते हैं।
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