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अंतिम संस्कार के लिए 60 लाख में खरीदी मशीन ट्रायल में ही फेल
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रेवाड़ी। कोरोना की पहली लहर में इलेक्ट्रिक मशीन से अंतिम संस्कार करने के लिए 60 लाख रुपये की कीमत से खरीदी गई मशीन नप अधिकारियों की लापरवाही के चलते ट्रायल में ही फेल हो गई।
नगर परिषद की ओर से करीब 10 माह पहले कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के लिए शहर के आदर्श नगर के शमशान घाट में मशीन लगाई थी। दूसरी लहर में जब मौतों की संख्या बढ़ी तो मशीन का ट्रायल एक अज्ञात शव पर किया गया, लेकिन मशीन में शव का अंतिम संस्कार पूरी तरह से नहीं हो पाया। इसके चलते मशीन केवल सफेद हाथी बनकर रह गई है। जबकि अप्रैल से लेकर 25 मई तक जिला में 186 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत कोविड प्रोटोकॉल के तहत की गई। यदि मशीन सुचारु होती तो इसका लाभ मिल सकता था।
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पर्यावरण के साथ लोगों को भी नहीं करना पड़ा इंतजार
अप्रैल के अंतिम व मई के प्रथम सप्ताह में शहर में एक-एक दिन में 12 से 15 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इस दौरान नगर परिषद की ओर से कोविड प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली रोड स्थित स्वर्ग आश्रम में अंतिम संस्कार किए जा रहे थे। संख्या ज्यादा होने के चलते अंतिम संस्कार में देरी परिजनों का दर्द और ज्यादा बढ़ा रही थी। इसके अलावा भारी मात्रा में लकड़ी के लिए पेड़ों को भी काटना पड़ता है, वहीं धुआं निकलने से वायु प्रदूषण भी होता है। पहले से ही ऑक्सीजन की किल्लत झेल रहे मरीजों को शुद्ध ऑक्सीजन के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन नप अधिकारियों की लापरवाही से समाधान नहीं हो पाया।
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मशीन के लिए स्थान का चयन भी गलत
लाखों रुपये मशीन के लिए नगर परिषद की ओर स्थान भी उपयुक्त नहीं चुना गया। आदर्श नगर में दो-दो रेलवे लाइन पार कर जाना पड़ेगा। ऐसे में लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जबकि दिल्ली रोड सहित अन्य आसानी से पहुंचने वाले शमशान घाट पर मशीन को लगाया जा सकता था।
वर्जन
मशीन चलाने से पहले ट्रायल किया गया तो रिजल्ट ठीक नहीं रहा। मशीन लगाने वाली कंपनी की ओर से इंजीनियर भेजा जाना है, वह इसको ठीक करके जाएगा। अभी तक कंपनी को इसके पैसे नहीं दिए हैं, चालू होने के बाद ही पेमेंट की जाएगी। जल्द ही मशीन को चलाने के प्रयास हैं।
- मनोज यादव, ईओ नप रेवाड़ी।
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नगर परिषद की ओर से करीब 10 माह पहले कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के लिए शहर के आदर्श नगर के शमशान घाट में मशीन लगाई थी। दूसरी लहर में जब मौतों की संख्या बढ़ी तो मशीन का ट्रायल एक अज्ञात शव पर किया गया, लेकिन मशीन में शव का अंतिम संस्कार पूरी तरह से नहीं हो पाया। इसके चलते मशीन केवल सफेद हाथी बनकर रह गई है। जबकि अप्रैल से लेकर 25 मई तक जिला में 186 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत कोविड प्रोटोकॉल के तहत की गई। यदि मशीन सुचारु होती तो इसका लाभ मिल सकता था।
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पर्यावरण के साथ लोगों को भी नहीं करना पड़ा इंतजार
अप्रैल के अंतिम व मई के प्रथम सप्ताह में शहर में एक-एक दिन में 12 से 15 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इस दौरान नगर परिषद की ओर से कोविड प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली रोड स्थित स्वर्ग आश्रम में अंतिम संस्कार किए जा रहे थे। संख्या ज्यादा होने के चलते अंतिम संस्कार में देरी परिजनों का दर्द और ज्यादा बढ़ा रही थी। इसके अलावा भारी मात्रा में लकड़ी के लिए पेड़ों को भी काटना पड़ता है, वहीं धुआं निकलने से वायु प्रदूषण भी होता है। पहले से ही ऑक्सीजन की किल्लत झेल रहे मरीजों को शुद्ध ऑक्सीजन के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन नप अधिकारियों की लापरवाही से समाधान नहीं हो पाया।
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मशीन के लिए स्थान का चयन भी गलत
लाखों रुपये मशीन के लिए नगर परिषद की ओर स्थान भी उपयुक्त नहीं चुना गया। आदर्श नगर में दो-दो रेलवे लाइन पार कर जाना पड़ेगा। ऐसे में लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जबकि दिल्ली रोड सहित अन्य आसानी से पहुंचने वाले शमशान घाट पर मशीन को लगाया जा सकता था।
वर्जन
मशीन चलाने से पहले ट्रायल किया गया तो रिजल्ट ठीक नहीं रहा। मशीन लगाने वाली कंपनी की ओर से इंजीनियर भेजा जाना है, वह इसको ठीक करके जाएगा। अभी तक कंपनी को इसके पैसे नहीं दिए हैं, चालू होने के बाद ही पेमेंट की जाएगी। जल्द ही मशीन को चलाने के प्रयास हैं।
- मनोज यादव, ईओ नप रेवाड़ी।