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Rewari News: मजबूरी में पिता ने बेची टैक्सी, लाइब्रेरी में पढ़ बेटे ने यूपीएससी में पाई सफलता
Thu, 18 Apr 2024 02:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 18 Apr 2024 02:15 AM IST
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रेवाड़ी। शिवम के साथ मां कमलेश, पिता हरदयाल और परिवार अन्य सदस्य। स्त्रोत : परिजन
रेवाड़ी। शहर के गुलाबी बाग में रहने वाले शिवम ने यूपीएससी में 457वीं रैंक प्राप्त कर दूसरे प्रयास पर सफलता प्राप्त की है। मूल रूप से गांव नांगल के रहने वाले शिवम वर्तमान में दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। जैसे ही परिवार को शिवम के रिजल्ट के बारे में पता चला, इस दौरान खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
शिवम के पिता हरदयाल टैक्सी ड्राइवर हैं। 2 साल पहले उन्हें मजबूरी में अपनी टैक्सी बेचनी पड़ी थी तब मां कमलेश ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शिवम की मां कमलेश देवी स्नातकोत्तर तक पढ़ी हैं। मौजूदा समय में कमलेश घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। कमलेश का कहना है कि बेटे की सफलता पर उन्हें बहुत खुशी है। परिवार में शुभम सबसे छोटा है। शिवम की दो बड़ी बहनें हैं। दोनों शिक्षिका हैं। कमलेश ने बताया, बेटे ने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। पिता हरदयाल का कहना है कि भले ही वह 10वीं कक्षा तक भी नहीं पढ़े हैं, लेकिन शिक्षा का महत्व उन्हें पता है, इसलिए बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा दी।
सेल्फ स्टडी के दम पर पाई सफलता
शिवम ने बताया कि कोई कोचिंग नहीं ली। दिल्ली में लाइब्रेरी ज्वाइन कर रखी थी, वहीं जाकर पढ़ाई करते थे। पुस्तकें पढ़ने का शौक स्कूल के समय से ही था। नवोदय स्कूल नैचाना से पढ़े थे। 12वीं में नॉन मेडिकल ली थी और जयपुर रीजन में टॉपर आए थे। 12वीं के बाद आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक किया। इसके बाद पुणे की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई। वहां सिविल इंजीनियर के रूप में 2 साल तक काम किया मगर मन में हमेशा अधिकारी बनने का ही सपना था। इसके बाद नौकरी छोड़ दी और दिल्ली पढ़ाई करने के लिए चले आए। शिवम बोले- इतनी रैंक में आईएएस तो नहीं बन पाऊंगा, मगर तैयारी जारी रखूंगा।
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शिवम के पिता हरदयाल टैक्सी ड्राइवर हैं। 2 साल पहले उन्हें मजबूरी में अपनी टैक्सी बेचनी पड़ी थी तब मां कमलेश ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शिवम की मां कमलेश देवी स्नातकोत्तर तक पढ़ी हैं। मौजूदा समय में कमलेश घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। कमलेश का कहना है कि बेटे की सफलता पर उन्हें बहुत खुशी है। परिवार में शुभम सबसे छोटा है। शिवम की दो बड़ी बहनें हैं। दोनों शिक्षिका हैं। कमलेश ने बताया, बेटे ने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। पिता हरदयाल का कहना है कि भले ही वह 10वीं कक्षा तक भी नहीं पढ़े हैं, लेकिन शिक्षा का महत्व उन्हें पता है, इसलिए बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा दी।
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सेल्फ स्टडी के दम पर पाई सफलता
शिवम ने बताया कि कोई कोचिंग नहीं ली। दिल्ली में लाइब्रेरी ज्वाइन कर रखी थी, वहीं जाकर पढ़ाई करते थे। पुस्तकें पढ़ने का शौक स्कूल के समय से ही था। नवोदय स्कूल नैचाना से पढ़े थे। 12वीं में नॉन मेडिकल ली थी और जयपुर रीजन में टॉपर आए थे। 12वीं के बाद आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक किया। इसके बाद पुणे की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई। वहां सिविल इंजीनियर के रूप में 2 साल तक काम किया मगर मन में हमेशा अधिकारी बनने का ही सपना था। इसके बाद नौकरी छोड़ दी और दिल्ली पढ़ाई करने के लिए चले आए। शिवम बोले- इतनी रैंक में आईएएस तो नहीं बन पाऊंगा, मगर तैयारी जारी रखूंगा।
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