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17 को 11 बजे हाईवे को पूरी तरह से बंद करेंगे किसान
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रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईर्व स्थित खेड़ा बॉर्डर पर पिछले 154 दिनों से धरने पर बैठे किसानों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, जब उन्हें पता चला कि हिसार में पुलिस टीम ने किसानों पर लाठीचार्ज किया है। किसानों ने फैसला किया कि 17 मई को करीब 11 बजे हाईवे को पूरी तरह से बंद करके वह विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बता दें कि कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। इसके बाद से किसानों ने यहीं पर आंदोलन शुरू कर दिया था। वहीं खेड़ा बॉर्डर पर समूह चर्चा करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत व डॉ. संजय माधव ने कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अभी भी दिल्ली के चारों ओर सीमाओं पर अपनी फसलों और नस्लों को बचाने के लिए डटे हुए हैं। किसान-संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बीते चार महीने से कोई बातचीत नहीं हुई है। हम इस अंधी, बहरी और गूंगी सरकार को चेतावनी देते हैं कि वो किसानों पर दमन बंद करते हुए उनकी मांगों को तुरंत मान ले, वर्ना इसके बहुत ही गंभीर परिणाम भाजपा-आरएसएस और उनकी सरकारों को भुगतने हेंगे। किसानों के ये मोर्चे अब हमारे गांव, घर और कॉलोनी बन गए हैं और ये अब ऐसे ही नहीं हटेंगे। गांव और शहरों की तुलना में किसान आंदोलन में जनसंख्या का घनत्व कम है। इसलिए यहां पर कोरोना संक्रमण होने का ज्यादा खतरा नहीं है। सरकार कोरोना का बहाना देकर हमें नहीं हटा सकती है।
समूह चर्चा में ये रहे शामिल
खेड़ा बॉर्डर समूह चर्चा में अमराराम, रामकिशन महलावत, राजाराम मील, रणजीत राजू, तारा सिंह सिद्धू बलवीर छिल्लर, हरफूल सिंह, कुलदीप यादव, मदन सिंह यादव, रूड सिंह महला, रघुवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, महावीर सिंह सरपंच, अनिल भेरा, जय सिंह जनवास, चौधरी फजलुद्दीन, कुलदीप मोहनपुर, सोनू, बाबा जैमल सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, पृथ्वी सिंह, मौलाना दिलशाद, अमजद भाई, फजरु भाई, साजिद भाई, अब्दुल भाई, प्रहलाद मांडोता, पवन दुग्गल, नवीन नागौर, सुरेन्द्र खोखर, काला मंडार, लखवीर सिंह, बेअंत सिंह, गुरजीत सिंह, सुनील बिश्नोई, भूपेंद्र सिंह, जगमाल सिंह, हरगोविंद सिंह, जसवीर सिंह, सुखविंदर सिंह, मालीराम, निशा सिद्धू, अजमेर सैनी, विक्रम राठौड़, रामरतन बागड़िया, सुभाष पलडिया तिजारा, सतपाल यादव, राजबाला यादव व जुनैद भाई सहित अन्य शामिल रहे।
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बता दें कि कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। इसके बाद से किसानों ने यहीं पर आंदोलन शुरू कर दिया था। वहीं खेड़ा बॉर्डर पर समूह चर्चा करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत व डॉ. संजय माधव ने कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अभी भी दिल्ली के चारों ओर सीमाओं पर अपनी फसलों और नस्लों को बचाने के लिए डटे हुए हैं। किसान-संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बीते चार महीने से कोई बातचीत नहीं हुई है। हम इस अंधी, बहरी और गूंगी सरकार को चेतावनी देते हैं कि वो किसानों पर दमन बंद करते हुए उनकी मांगों को तुरंत मान ले, वर्ना इसके बहुत ही गंभीर परिणाम भाजपा-आरएसएस और उनकी सरकारों को भुगतने हेंगे। किसानों के ये मोर्चे अब हमारे गांव, घर और कॉलोनी बन गए हैं और ये अब ऐसे ही नहीं हटेंगे। गांव और शहरों की तुलना में किसान आंदोलन में जनसंख्या का घनत्व कम है। इसलिए यहां पर कोरोना संक्रमण होने का ज्यादा खतरा नहीं है। सरकार कोरोना का बहाना देकर हमें नहीं हटा सकती है।
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समूह चर्चा में ये रहे शामिल
खेड़ा बॉर्डर समूह चर्चा में अमराराम, रामकिशन महलावत, राजाराम मील, रणजीत राजू, तारा सिंह सिद्धू बलवीर छिल्लर, हरफूल सिंह, कुलदीप यादव, मदन सिंह यादव, रूड सिंह महला, रघुवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, महावीर सिंह सरपंच, अनिल भेरा, जय सिंह जनवास, चौधरी फजलुद्दीन, कुलदीप मोहनपुर, सोनू, बाबा जैमल सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, पृथ्वी सिंह, मौलाना दिलशाद, अमजद भाई, फजरु भाई, साजिद भाई, अब्दुल भाई, प्रहलाद मांडोता, पवन दुग्गल, नवीन नागौर, सुरेन्द्र खोखर, काला मंडार, लखवीर सिंह, बेअंत सिंह, गुरजीत सिंह, सुनील बिश्नोई, भूपेंद्र सिंह, जगमाल सिंह, हरगोविंद सिंह, जसवीर सिंह, सुखविंदर सिंह, मालीराम, निशा सिद्धू, अजमेर सैनी, विक्रम राठौड़, रामरतन बागड़िया, सुभाष पलडिया तिजारा, सतपाल यादव, राजबाला यादव व जुनैद भाई सहित अन्य शामिल रहे।
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